Toughest Exam in India: नीट, जेईई, यूपीएससी या यूजीसी नेट- देश की सबसे कठिन परीक्षा कौन सी है?

नई दिल्ली (Toughest Exam in India). देश की सबसे कठिन परीक्षा कौन सी है? कोई कहता है कि आईआईटी का रास्ता तय कराने वाली जेईई दुनिया की सबसे टेढ़ी खीर है. किसी का मानना है कि मेडिकल की दुनिया में कदम रखने वाले नीट का कॉम्पिटीशन रोंगटे खड़े कर देता है. वहीं दूसरी तरफ, देश के सबसे बड़े प्रशासनिक पदों पर बैठने का सपना दिखाने वाली यूपीएससी को तो कई लोग ‘परीक्षाओं का एवरेस्ट’ मानते हैं. उच्च शिक्षा और प्रोफेसर बनने की राह दिखाने वाला यूजीसी नेट भी पीछे नहीं है.
असल सवाल है कि क्या इन सभी परीक्षाओं को एक ही पैमाने पर तौल सकते हैं? जवाब है- बिल्कुल नहीं. हर एग्जाम का नेचर, उसका सिलेबस और उसमें पास होने का गणित बिल्कुल अलग है. जेईई और नीट जैसी परीक्षाएं 12वीं के तुरंत बाद टेक्निकल और साइंटिफिक एप्टीट्यूड का इम्तिहान लेती हैं. वहीं यूपीएससी और यूजीसी नेट मैच्योरिटी के स्तर पर खेले जाने वाले खेल हैं. यहां सालों का अनुभव और गजब का धैर्य होना चाहिए. जानिए देश की सबसे कठिन परीक्षा कौन सी है?
देश की सबसे कठिन परीक्षा कौन सी है?
कुछ युवा मैथ्स के फॉर्मूलों में उलझकर दम तोड़ देते हैं तो कुछ इतिहास और समाजशास्त्र के समंदर में गोता लगाते-लगाते थक जाते हैं. जेईई, नीट, यूपीएससी और यूजीसी नेट परीक्षाओं का स्तर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है. यहां तक कि इनके विषय भी अलग हैं. फिर भी यह बहस हमेशा होती है कि भारत की सबसे कठिन परीक्षा आखिर कौन सी है.
यूपीएससी (UPSC): परीक्षाओं का एवरेस्ट या मानसिक जंग?
सिलेबस का अता-पता नहीं और सफलता की गारंटी जीरो, इसे सबसे कठिन क्यों माना जाता है? सिविल सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल किया जाता है. इसकी वजह इसका असीम सिलेबस है. इसमें इतिहास से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक, सब कुछ शामिल है. यहां सिर्फ रटने से काम नहीं चलता. इसमें सोचने की क्षमता, एनालिटिकल थिंकिंग और प्रशासनिक सूझबूझ परखी जाती है. लाखों युवा यूपीएससी परीक्षा का फॉर्म भरते हैं और सफलता का प्रतिशत महज 0.1 से 0.2 के बीच रहता है. इसीलिए इसे सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि मानसिक और वैचारिक तपस्या माना जाता है.
जेईई एडवांस (JEE Advanced): इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा कांटा
अगर आपका सपना देश के टॉप आईआईटी से बीटेक करके इंजीनियर बनने का है तो जेईई एडवांस का चक्रव्यूह भेदना ही होगा. जेईई परीक्षा की कठिनाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां सवाल सीधे किताबों से नहीं आते, बल्कि इस तरह से घुमाकर पूछे जाते हैं कि अच्छे-अच्छे मेधावी स्टूडेंट्स का सिर भी चकरा जाए. नेगेटिव मार्किंग और समय की पाबंदी इस खेल को और खतरनाक बना देती है. जेईई एडवांस में चयन प्रतिशत बेहद कम है. एक-एक नंबर की चूक आपको आपकी मनपसंद ब्रांच से कोसों दूर कर सकती है.
नीट यूजी (NEET UG): 720 अंकों की दौड़ और नैनो सेकंड का दबाव
एक गलत गोला बना तो सीधा एक साल का इंतजार, मेडिकल की राह आसान क्यों नहीं? डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले लाखों युवाओं के लिए नीट परीक्षा किसी जंग के मैदान से कम नहीं है. इसका सिलेबस मुख्य रूप से एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों तक सीमित होता है. लेकिन असली खेल ‘स्पीड और एक्यूरेसी’ का है. फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के कुल 200 सवालों को बेहद कम समय में हल करना छात्रों की मानसिक स्थिति की कड़ी परीक्षा लेता है. यहां कॉम्पिटीशन इतना ज्यादा है कि एक-दो अंकों के फेर में हजारों रैंक ऊपर-नीचे हो जाती हैं, जिससे प्रेशर चरम पर होता है.
यूजीसी नेट (UGC NET): प्रोफेसर बनने की राह या रिसर्च का समंदर?
जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता तय करने वाला यूजीसी नेट अपने विषय की गहराई का सबसे बड़ा इम्तिहान है. ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब युवा इस मैदान में उतरते हैं तो उन्हें अपने ही सब्जेक्ट के ऐसे-ऐसे पहलुओं से रूबरू होना पड़ता है जो आम क्लासेस में नहीं पढ़ाए जाते. यूजीसी नेट में पेपर-1 का जनरल एप्टीट्यूड और पेपर-2 का कोर सब्जेक्ट मिलकर इसे बेहद कॉम्पिटीटिव बना देते हैं. यूजीसी नेट में सफलता का दायरा भी कैटेगरी और फेलोशिप के हिसाब से बहुत कठिन होता है.
इन चारों में से कौन-सी परीक्षा सबसे कठिन है?
निष्पक्ष होकर देखा जाए तो इन चारों परीक्षाओं की तुलना करना सेब और संतरे की तुलना करने जैसा है. यूपीएससी धैर्य, विजन और बहुमुखी ज्ञान की परीक्षा लेती है. वहीं जेईई और नीट कच्ची उम्र के टेक्निकल और लॉजिकल दिमाग को निचोड़ कर रख देती हैं. दूसरी तरफ, यूजीसी नेट एकेडमिक एक्सपर्टीज परखती है. तो फिर इनमें से सबसे कठिन परीक्षा कौन सी है? यह इस पर निर्भर करता है कि आपका दिमाग किस दिशा में ज्यादा तेजी से काम करता है- फिजिकल फॉर्मूलों में, मेडिकल के डायग्राम में या फिर देश की प्रशासनिक और सामाजिक समझ में.



