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त्वचा पर कठोर गांठें और तेज बुखार लम्पी के लक्षण, पशुओं को ऐसे बचाएं

Last Updated:September 18, 2026, 12:55 IST

Animal Care Tips: राजस्थान में गाय-भैंसों के लिए लम्पी स्किन डिजीज गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है. पशु चिकित्सक विशाल प्रजापति के अनुसार, यह बीमारी कैपरीपॉक्स वायरस से होती है और मच्छर-मक्खियों के जरिए फैलती है. इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, त्वचा पर कठोर गांठें, दूध में कमी और कमजोरी शामिल हैं. इससे बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाएं और पशुशाला में साफ-सफाई व कीट नियंत्रण का ध्यान रखें. लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह से उपचार शुरू करें.

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Nagaur: राजस्थान में पशुपालकों के लिए लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है. यह मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे गोवंशीय पशुओं में होने वाला एक बेहद संक्रामक और घातक रोग है. अगर समय रहते इसकी पहचान और सही उपचार नहीं किया गया, तो यह पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. इस बीमारी के कारण पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इससे पशुओं का दूध उत्पादन घट जाता है, वजन कम होने लगता है और पशु अत्यधिक कमजोर हो जाते हैं.

पशु चिकित्सक विशाल प्रजापति के अनुसार, लम्पी स्किन डिजीज ‘कैपरीपॉक्स’ वायरस समूह के विषाणु से होता है. यह वायरस संक्रमित पशु के रक्त, त्वचा के घावों और शरीर से निकलने वाले अन्य स्रावों में मौजूद रहता है. इस संक्रामक रोग का फैलाव मुख्य रूप से रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से होता है. इनमें मच्छर, मक्खी और किलनी प्रमुख हैं, जो एक संक्रमित पशु से स्वस्थ पशु तक वायरस को आसानी से पहुंचाते हैं. इसलिए पशुशाला और उसके आसपास के वातावरण में कीटों का नियंत्रण इस बीमारी से बचाव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है.

बीमारी के प्रमुख लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करेंपशुपालकों को अपने पशुओं की सेहत पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है. पशु चिकित्सक के अनुसार, लम्पी से संक्रमित पशु में सबसे पहले तेज बुखार दिखाई देता है. इसके बाद त्वचा पर अलग-अलग आकार की गोल, कठोर और दर्दनाक गांठें बनने लगती हैं. समय के साथ इन गांठों में घाव या पपड़ी भी बन सकती है. अन्य शुरुआती लक्षणों में पशु की आंख और नाक से पानी या स्राव आना, मुंह से अत्यधिक लार टपकना, भूख कम लगना और अत्यधिक कमजोरी आना शामिल है. इसके अलावा पशुओं के पैरों में सूजन आने से चलने में परेशानी हो सकती है और लिम्फ नोड्स भी बढ़ जाते हैं. गंभीर संक्रमण की स्थिति में निमोनिया और द्वितीयक जीवाणु संक्रमण जैसी स्थिति भी बन सकती है.

बचाव में टीकाकरण और स्वच्छता सबसे जरूरीविशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लम्पी से पशुओं को बचाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग की सलाह के अनुसार टीकाकरण (Vaccination) जरूर करवाएं. इसके साथ ही साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है. पशुशाला को हमेशा साफ, सूखा और हवादार बनाए रखें. वहां से गोबर और गंदगी नियमित रूप से हटाएं और आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छर-मक्खियां न पनपें. यदि आप बाहर से कोई नया पशु खरीदते हैं, तो उसे तुरंत अपने पुराने झुंड में शामिल करने के बजाय कुछ समय अलग रखें. इसके अलावा पशुशाला में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की नियमित सफाई करें.

लक्षण दिखने पर तुरंत बुलाएं पशु चिकित्सकअगर किसी पशु में गांठ या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएं. डॉ. विशाल प्रजापति के अनुसार, प्रभावित पशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए उपलब्धता के अनुसार खनिज लवण और विटामिन दिए जा सकते हैं. पर्याप्त पानी और संतुलित आहार देना भी बहुत जरूरी है. गांठों के फूटने पर स्थानीय स्तर पर किसी भी लेप या दवा का इस्तेमाल करने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है. घावों की साफ-सफाई और अन्य सभी प्रकार के उपचार केवल विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Nagaur,Nagaur,Rajasthan

First Published :

September 18, 2026, 12:55 IST

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