Karauli News: एक लाठी और 45 मिनट की मेहनत, करौली के इस शिक्षक का प्राचीन देसी फिटनेस फॉर्मूला

Last Updated:September 18, 2026, 14:04 IST
Karauli News: करौली के शिक्षक कपिल पाराशर फिटनेस के लिए न जिम जाते हैं और न महंगी एक्सरसाइज मशीनों का इस्तेमाल करते हैं. पिछले कई वर्षों से वह रोजाना लाठी के सहारे दंड अभ्यास करते हैं. करीब 150 किलोमीटर का सफर करने के बावजूद स्कूल जाने से पहले 45 मिनट से एक घंटे तक नियमित व्यायाम उनकी दिनचर्या का हिस्सा है.
आज के दौर में फिट रहने के लिए लोग जिम की महंगी फीस से लेकर आधुनिक एक्सरसाइज मशीनों तक का सहारा ले रहे हैं. कोई ट्रेडमिल पर पसीना बहा रहा है तो कोई घंटों जिम में वर्कआउट कर रहा है. लेकिन करौली का एक युवा शिक्षक ऐसा भी है, जिसने फिटनेस के लिए न महंगी मशीन चुनी और न ही जिम का सहारा लिया. उसके हाथ में रहती है सिर्फ एक लाठी और इसी के सहारे वह पिछले 8 साल से अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने में जुटा है.
हम बात कर रहे हैं करौली के चटीकना मोहल्ला निवासी शिक्षक कपिल पाराशर की. कपिल पेशे से सरकारी शिक्षक हैं और राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय बाड़ी, धौलपुर में कार्यरत हैं. स्कूल की जिम्मेदारियों के साथ वह रोजाना अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भारतीय परंपरा से जुड़े दंड अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए हुए हैं.
कपिल की दिनचर्या की सबसे खास बात यह है कि वह रोजाना करीब 150 किलोमीटर का सफर करने के बावजूद अपने व्यायाम के लिए समय निकालते हैं. उनका कहना है कि शरीर स्वस्थ रहेगा तो व्यक्ति अपने काम को ज्यादा ऊर्जा और बिना अनावश्यक तनाव के कर सकता है. इसी सोच के चलते वह किसी भी मौसम में स्कूल जाने से पहले करीब 45 मिनट से एक घंटे तक परंपरागत तरीके से शारीरिक अभ्यास करते हैं.
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कपिल के मुताबिक शुरुआत में यह केवल उनका शौक था, लेकिन धीरे-धीरे दंड अभ्यास उनकी जिंदगी की नियमित दिनचर्या बन गया. अब मौसम कैसा भी हो और दिन कितना भी व्यस्त क्यों न हो, वह अपने अभ्यास के लिए समय जरूर निकालते हैं. उन्हें प्राचीन भारतीय शारीरिक अभ्यास और मार्शल आर्ट से जुड़ी विधाओं में विशेष रुचि है. करीब 12 साल पहले उन्होंने दंड अभ्यास को नियमित रूप से करना शुरू किया.
उनका मानना है कि दंड अभ्यास भारतीय परंपरा और शारीरिक संस्कृति से जुड़ी एक पुरानी विधा है.नियमित अभ्यास के जरिए शरीर की क्षमता, सहनशक्ति और शारीरिक नियंत्रण पर काम किया जा सकता है. यही वजह है कि कपिल इसे केवल व्यायाम नहीं बल्कि पुरानी परंपरा से जुड़ने का माध्यम भी मानते हैं. कपिल का कहना है कि आज के समय में युवा फिटनेस को लेकर जागरूक हुए हैं और जिम जाकर व्यायाम करना भी अच्छी बात है. लेकिन इसके साथ उन्हें भारतीय परंपरा में मौजूद पुराने व्यायामों और शारीरिक कलाओं के बारे में भी जानना चाहिए.
उनके मुताबिक आधुनिक संसाधनों के साथ-साथ पारंपरिक व्यायाम को अपनाने से न केवल शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक हमारी पुरानी शारीरिक परंपराओं को भी पहुंचाया जा सकता है. उनकी दिनचर्या यह बताती है कि फिट रहने के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती. नियमितता, अनुशासन और अभ्यास के लिए निकाला गया समय ही फिटनेस की असली कुंजी है.
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September 18, 2026, 14:04 IST



