Kumudini Benefits : पेट को ठंडक, हड्डियां करे मजबूत…तालाब में मिलने वाली कुमुदनी सेहत के लिए वरदान, गोंडा में खाते हैं इसका हलवा

Last Updated:September 19, 2026, 16:06 IST
Kumudini Benefits : गोंडा के तालाबों में पाए जाने वाले कुमुदनी फल को बेर्रा, कोकाबेली, ढेप या गुझारी भी कहते हैं. यह अपने औषधीय गुणों और हलवे के लिए जाना जाता है. इसके बीजों का उपयोग कमजोरी, पाचन और हड्डियों के लिए किया जाता है. गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि इसका पौधा तालाब के पानी में पत्तियों और फूलों के साथ तैरता हुआ दिखाई देता है. कुमुदनी का फल देखने में हरे रंग का गोल होता है. इसके अंदर छोटे-छोटे बीज पाए जाते हैं. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कुमुदनी के बीजों को सुखाने के बाद उनसे हलवा भी तैयार किया जाता रहा है.
ग्रामीण इलाकों में तालाबों के आसपास कई ऐसे जलीय पौधे पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल लोग लंबे समय से खाने के साथ-साथ पारंपरिक रूप से करते आ रहे हैं. इन्हीं में से एक है कुमुदनी का फल, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में बेर्रा, कोकाबेली, ढेप या गुझारी जैसे नामों से भी जाना जाता है. इसका पौधा तालाब के पानी में पत्तियों और फूलों के साथ तैरता हुआ दिखाई देता है.
लोकल 18 से गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कुमुदनी का फल देखने में हरे रंग का गोल होता है. इसके अंदर छोटे-छोटे बीज पाए जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में इन बीजों को कई जगह कच्चा भी खाया जाता है. इसके अलावा बीजों को सुखाकर अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जाता है.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कुमुदनी के बीजों को सुखाने के बाद उनसे हलवा भी तैयार किया जाता रहा है. गांवों में इसका इस्तेमाल पारंपरिक खान-पान के तौर पर किया जाता है. इसके बीज कुरकुरे होते हैं और लोग इन्हें पसंद से खाते हैं.
Add as Preferred Source on Google
वैद्य जमुना प्रसाद यादव कहते हैं कि कुमुदनी के बीजों को पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. ग्रामीण और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इनका सेवन शरीर को ऊर्जा देने और कमजोरी दूर करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि किसी बीमारी या कमजोरी के इलाज के लिए इसे दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कुमुदनी के फल और बीजों का पारंपरिक रूप से पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. इन्हें पेट को ठंडक देने और पाचन को बेहतर रखने में मददगार माना जाता है. कुछ क्षेत्रों में दस्त जैसी समस्या में भी इसका पारंपरिक उपयोग किया जाता है.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव कहते हैं कि इसके बीजों में विभिन्न पोषक तत्व और खनिज पाए जाते हैं. पारंपरिक मान्यता के अनुसार इनका सेवन हड्डियों को मजबूती देने में मदद कर सकता है. हालांकि हड्डियों या जोड़ों की बीमारी होने पर केवल इस फल पर निर्भर रहना उचित नहीं है.
कुमुदनी के बीजों का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में शरीर को शांत रखने और तनाव कम करने के लिए भी बताया जाता है. बेहतर नींद के लिए भी इसके इस्तेमाल की मान्यता है, लेकिन अनिद्रा लगातार बनी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि कुमुदनी का फल भले ही शहरों में बहुत ज्यादा दिखाई न देता हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में तालाबों और जलाशयों के आसपास इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है. स्थानीय लोग इसके फल और बीजों को खाने के अलावा पारंपरिक तरीके से भी इस्तेमाल करते हैं.
जमुना प्रसाद यादव के अनुसार कुमुदनी के फल और बीजों से जुड़े कई स्वास्थ्य लाभ पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है या वह नियमित दवाएं ले रहा है, तो इसका सेवन औषधि के रूप में करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
September 19, 2026, 16:06 IST



