Rajasthan

36 घंटे की ड्यूटी के आरोपों पर भड़के रेजिडेंट्स, एम्स जोधपुर में OPD बंद, 80 ऑपरेशन टले, 8 हजार मरीज प्रभावित

जोधपुर. एम्स जोधपुर के 14 साल के इतिहास में पहली बार रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रशासन के खिलाफ बड़े स्तर पर काम का बहिष्कार किया है. प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध गुरुवार को हड़ताल में बदल गया. करीब 450 रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर धरना दिया और एम्स डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग की. डॉक्टरों के आंदोलन का असर अस्पताल आने वाले मरीजों पर भी पड़ा. रेजिडेंट्स के काम पर नहीं आने से करीब 8 हजार मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया, जबकि पहले से तय करीब 80 ऑपरेशन टालने पड़े.

हालांकि ट्रामा, इमरजेंसी, आईसीयू और गंभीर मरीजों की जरूरी सेवाएं सीनियर डॉक्टरों के भरोसे जारी रहीं. रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि एम्स में लंबे समय से काम का दबाव और स्टाफ की कमी बनी हुई है. उनका कहना है कि जूनियर रेजिडेंट्स से कई बार 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जाती है. डॉक्टरों का दावा है कि काम के इसी दबाव और खराब वर्किंग कंडीशन को लेकर वे पहले भी अपनी समस्याएं उठा चुके हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी के घंटों और काम के दबाव को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते नजर आए.

डायरेक्टर के समझाने के बाद भी रेजिडेंट्स अपनी मांग पर अड़े रहे

राजनरेश यादव मंगलवार को रेस्ट रूम के बाथरूम में अचेत मिले थे. उनके पास सीरिंज मिलने की बात सामने आई है. बाद में उनकी मौत हो गई. हालांकि उनकी मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होगी. रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस घटना की पारदर्शी जांच और पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. गुरुवार को रेजिडेंट डॉक्टर सुबह से ओपीडी ब्लॉक में धरने पर बैठे रहे. शाम को उन्होंने कैंडल मार्च निकाला और एम्स डायरेक्टर डॉ. जीडी पूरी के आवास तक पहुंचे. बाद में वे वापस ओपीडी परिसर लौट आए. डायरेक्टर ने धरनास्थल पर पहुंचकर डॉक्टरों से बातचीत और समझाइश की, लेकिन रेजिडेंट्स अपनी मांगों पर अड़े रहे. उन्होंने डायरेक्टर से इस्तीफे की मांग भी की. शिकायत सुनने वाली कमेटी, फैकल्टी और विभागाध्यक्षों ने भी डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की.

रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रशासन के सामने रखी कई मांगें

रेजिडेंट डॉक्टरों ने कई मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं. इनमें घटना को लेकर सार्वजनिक माफी, मामले की पारदर्शी जानकारी, मृतक डॉक्टर के परिवार को 5 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, बीमा और अन्य संस्थागत लाभ देने तथा रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन को आधिकारिक मान्यता देने की मांग शामिल है. हड़ताल को देखते हुए एम्स प्रशासन ने अगले आदेश तक ओपीडी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला किया है. हालांकि ट्रामा, इमरजेंसी, आईसीयू, गंभीर मरीजों की सेवाएं, आपातकालीन सर्जरी, प्रसव, ब्लड बैंक और जरूरी जांच सेवाएं जारी रहेंगी. इस बीच भारतीय मेडिकल एसोसिएशन ने भी घटना पर चिंता जताई है.

प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी

आईएमए ने डॉक्टरों के लिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियों, पर्याप्त आराम और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत बताई है. एम्स भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से भी आंदोलन को समर्थन दिए जाने की बात सामने आई है. रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि उनका विरोध केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही स्टाफ की कमी, काम के दबाव और ड्यूटी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर है. फिलहाल प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनने से हड़ताल जारी है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj