रोजाना 7500 लीटर खून की पंपिंग और 1 लाख धड़कनें, आखिर कैसे पूरे शरीर को जिंदा रखता है 280 ग्राम का हार्ट

How Heart Work: हार्ट के बिना क्या हमारा शरीर जिंदा रह सकता है? आप कहेंगे यह क्या बकवास सवाल है. जिस समय हार्ट की धड़कन बंद हुई उसी समय हमारा जीवन खत्म. इसमें कौन सी नई बात है. यह हर कोई जानता है लेकिन क्या आप अपने हार्ट को जानते हैं. इस सवाल का जवाब अधिकांश के पास नहीं होगा. वास्तव में हममें से अधिकांश लोग अपने हार्ट के बारे में बिल्कुल नहीं जानते होंगे. हमारे शरीर का हार्ट एक दिन में एक लाख बार धड़कता है और साढ़े सात हजार लीटर खून को पंप करता है. इसी से समझ जा सकता है कि हार्ट का कितना बड़ा काम है. वह बेहद जटिल प्रक्रिया से गुजरता है. इसलिए हमने हार्ट की इस जटिलता को आसानी से समझने के लिए हमने फोर्टिस अस्पताल में कार्डियोलॉजी एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसपल डायरेक्टर डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से बात की.
हार्ट है क्या
सबसे पहले यही जानते हैं कि हार्ट है क्या? डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी बताते हैं कि हमारे शरीर के दोनों लंग्स के बीच और छाती की कैविटी में बंद मुट्ठी की तरह एक मस्कुलर अंग होता है जिसे हार्ट कहा जाता है. इसका वजन महज 280 ग्राम से 350 ग्राम के बीच होता है. इसके अंदर चार चैंबर होते हैं जिनके बीच में मजबूत दीवारें होती हैं. उपर वाले दो चैंबर राइट एट्रियम और लेफ्ट एट्रियम होते हैं. नीचे वाले दोनों चैंबर में लेफ्ट वेंट्रिकल और राइट वेंट्रिकल होते हैं. हम सब जानते हैं कि हमारे शरीर में 5 से 6 लीटर खून होता है. इसी खून के माध्यम से शरीर के कतरे-कतरे में ऑक्सीजन, सभी तरह के पोषक तत्व और अन्य रसायन पहुंचते हैं और वहां से कोशिकाओं द्वारा छोड़े गए कचरे और कार्बन डाइऑक्साइड को शरीर से बाहर निकाला जाता है. लेकिन यह काम अपने आप नहीं होता. इसके लिए एक बहुत पावरफुल मशीन हार्ट होती है जो खून के पूरे तंत्र को कंट्रोल करती है और इसी से पूरा शरीर जिंदा रहता है. इस तरह हार्ट एक पंपिंग मशीन है जो बिना थके पूरा दिन खून को पंप करता रहता है और शरीर के कतरे-कतरे तक शुद्ध खून पहुंचाता है और वहां से अशुद्ध खून को लाता है.
हार्ट कैसे काम करता है
अब सवाल है कि हार्ट कैसे काम करता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि हार्ट पूरे दिन में 1 लाख बार धड़क कर रोजाना 7500 लीटर खून को शरीर में पंप करता है. सबसे पहले यह समझिए कि हमारा शरीर कोशिकाओं से बना हुआ है. शरीर में खरबों कोशिकाएं हैं, जिनकी गिनती लगभग नामुमकिन है. 1 क्यूबिक मिलीमीटर एरिया में लगभग 1 से 10 लाख कोशिकाएं होती है. इन सभी कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्व चाहिए. साथ ही ये कोशिकाएं कार्बन डाइऑक्साइड भी छोड़ती है और कचरे भी पैदा करती है. इन्हें शरीर से बाहर निकालना जरूरी है. ये सारा काम हार्ट के माध्यम से ही होगा. हार्ट शरीर की सभी कोशिकाओं से अशुद्ध खून प्राप्त करता है और इस अशुद्ध खून को लंग्स में पंप कर देता है. फिर लंग्स में जब खून ऑक्सीजन को ग्रहण कर लेता है तो अपने पास खींच लाता है और इस शुद्ध यानी ऑक्सीजन वाले खून को जोर से पंप कर शरीर के कतरे-कतरे तक पहुंचा देता है. यह पूरी प्रक्रिया एक प्रोसेस से चलती है. पहले यह समझिए कि जब कोशिकाएं ऑक्सीजन और पोषक तत्व को खत्म कर लेगी तो इसमें दोबारा से कैसे शुद्ध खून आएगा. जब कोशिकाओं में पहुंचे खून में ऑक्सीजन और पोषक तत्व खर्च हो जाएगा तो अशुद्ध खून बारीक कैपिलरी के माध्यम से थोड़ी बड़ी नली वेन्यूल्स में एकत्र होगा. फिर वेन्यूल्स से होते हुए खून एक बड़ी नली वेंस में पहुंचेगा. इसके बाद खून मुख्य नली सुपीरियर वेना कावा और इन्फीरियर वेना कावा के माध्यम से सीधे हार्ट में पहुंच जाएगा. सुपीरियर वेना कावा से शरीर के उपरी हिस्से का खून हार्ट के राइट चैंबर यानी राइट एट्रियम में पहुंचता है. वहीं शरीर के निचले हिस्से जैसे पेट, लिवर, किडनी, पैर, आंत, जननांग आदि से अशुद्ध खून इन्फीरियर वेना कावा में पहुंचता है. ये दोनों शिराएं दाएं एट्रियम में जाकर खुलती है और वहां अशुद्ध खून उड़ेल दिया जाता है. अब दाएं एट्रिया में जमा अशुद्ध खून को ऑक्सीजन और पोषक तत्व चाहिए. यह कैसे प्राप्त करेगा.
खून शुद्ध कैसे होता है
अब अशुद्ध खून राइट एट्रिया से ट्राइकस्पिड वाल्व के जरिए हार्ट के राइट वेंट्रिकल में गिरेगा. 70 से 80 प्रतिशत खून गुरुत्वाकर्षण और प्रेशर के कारण नीचे वाले राइट वेंट्रिकल में जाकर गिर जाएगा. लेकिन सारा खून नहीं गिरेगा. 20-30 प्रतिशत खून बच जाएगा. अब इसके लिए इसी राइट एट्रियम में कुदरती रूप से एक पेसमेकर होता है जिसे SA नोड कहा जाता है. इसमें से लगातार बहुत हल्की इलेक्ट्रिक सिग्नल पैदा होता रहता है. जैसे ही इलेक्ट्रिक सिग्नल पास होगा उपर वाला एट्रियम चैंबर की दीवार सिकुड़ जाएगी. इससे बचा हुआ खून निचुड़कर नीचे वाले राइट वेंट्रिकल में पहुंच जाएगा. SA नोड से इलेक्ट्रिक सिग्नल नीचे वाले चैंबर के बीच में मौजूद AV नोड पर पहुंचेगा. यहां सिग्नल सेकंड के बहुत छोटे हिस्से (0.1 सेकंड) के लिए रुकता है ताकि इस बीच एट्रियम का पूरा खून अच्छी तरह से नीचे वेंट्रिकल में भर जाए और वाल्व बंद हो सकें. AV नोड से यह इलेक्ट्रिक सिग्नल बंडल ऑफ हिस नाम की मुख्य वायर में जाता है. यह केबल हार्ट के बीच वाली दीवार से होती हुई दो शाखाओं में बंट जाती है. एक दाएं और दूसरा बाएं वेंट्रिकल की तरफ. अंत में यह करंट वेंट्रिकल की दीवारों में फैले पुरकिंजे फाइबर्स के बहुत बारीक नेटवर्क तक पहुंचता है. जैसे ही सिग्नल पुरकिंजे फाइबर्स तक पहुंचता है, दायां वेंट्रिकल बहुत तेजी से सिकुड़ेगा और खून को झटके के साथ पल्मोनरी आर्टरी के ज़रिए लंग्स में पंप कर देगा. इस पूरे नेटवर्क में इलेक्ट्रिक सिग्नल एक निश्चित ताल में पास होती है और उसी क्रम में हार्ट के चैंबर सिकुड़ते हैं और फैलते हैं. इसलिए निश्चित ताल में ही हार्ट में धड़कन आती है. राइट वेंट्रिकल से अशुद्ध खून पल्मोनरी ट्रंक से होते हुए पल्मोनरी आर्टरीज, आर्टियोल्स, पल्मोनरी कैपिलरी और अंत में एल्विओलाई तक पहुंचता है. वहां यह खून कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ देता है और वहीं पर ऑक्सीजन को ग्रहण कर लेता है. लंग्स से ऑक्सीजन से भरा शुद्ध खून सबसे पहले छोटी पल्मोनरी कैपिलरी और वेन्यूल्स में एकत्र होता है. यहां से यह आपस में मिलकर कुल चार बड़ी पल्मोनरी शिराओं से गुजरता हुआ सीधे हार्ट के लेफ्ट एट्रियम में पहुंचता है. फिर गुरुत्वाकर्षण और उसी तरह इलेक्ट्रिक सिग्नल के पास होते ही लेफ्ट एट्रियम सिकुड़ता है और नीचे जोर से लेफ्ट वेंट्रिकल में धकेल दिया जाता है. यहां से शुद्ध खून ब़ड़ी नली एओर्टा या महाधमनी में जोर से पंप कर दिया जाता है. इसके बाद यह छोटी-छोटी नलिकाओं के माध्यम से शरीर की प्रत्येक कोशिकाओं तक पहुंचा जाता है.
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हार्ट में खराबी किस तरह आती
हार्ट हमेशा अपनी रिद्म में चलता है. इसमें खराबी के एक नहीं बल्कि कई कारण है. अगर हार्ट की संरचना में किसी तरह की गड़बड़ हो जाए तो भी हार्ट का फंक्शन प्रभावित होता है लेकिन कुछ खराबियां इंसानों की गलतियों से आती है. अगर हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान सही नहीं है तो हार्ट में जाने वाली और आने वाली नलियों में कड़ापन या इंफ्लामेशन होने लगता है. दूसरी ओर इन नलियों में ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है. इससे नली के रास्ते में प्लाक जमा होने लगता है और यह नलियों के रास्ते को संकरा कर देता है जिसकी वजह से हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, कार्डिएक अरेस्ट जैसी बीमारियां होगी जो जानलेवा भी हो सकता है. यानी हार्ट के लिए खराब कोलेस्ट्रॉल बहुत बड़ा दुश्मन है जो धमनियों में रुकावट पैदा करता है. इसके अलावा हाई बीपी, डायबिटीज, वाल्व की बीमारी, इलेक्ट्रिकल कंडक्शन सिस्टम में खराबी, ज्यादा तनाव आदि के कारण भी हार्ट में खराबी आती है.
हम किस तरह अपने हार्ट को खराब कर रहे हैं
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी बताते हैं कि हम कई तरह से अपने ही हार्ट को खराब करने पर तुले है. क्योंकि हमारी कई आदतें हमारे हार्ट को बर्बाद कर रही है. इनमें से सबसे बड़ा दुश्मन स्मोकिंग है. यानी तंबाकू जनित किसी भी तरह का सेवन हार्ट का सबसे बड़ा दुश्मन है. तंबाकू में सैकड़ों तरह के हानिकारक रसायन होते हैं जो हार्ट की मांसपेशियों की नाजुक परत एंडोथेलियम को डैमेज कर देते हैं. इससे कोलेस्ट्रॉल के प्लाक बनने का रिस्क बढ़ जाता है. यही कारण है कि आज 25 से 40 वर्ष के युवाओं में भी बिना किसी बड़े ब्लॉकेज के अचानक मैसिव हार्ट अटैक आ रहे हैं. तंबाकू के अलावा अत्यधिक तनाव और मोटापा, डायबिटीज जैसी चीजें भी हार्ट के लिए दुश्मन है. डायबिटीज के कारण ग्लूकोज धमनियों को सख्त व संकरा कर देते हैं. इसलिए यह साइलेंट अटैक का खतरा बढ़ाता है. वहीं शिथिल जीवनशैली यानी बिना किसी शारीरिक मेहनत के जीवन गुजारना हार्ट के लिए बहुत बड़ा दुश्मन है. इससे ऑक्सीजन रिज़र्व और स्टैमिना कम हो जाती है जो हार्ट के लिए बहुत बड़ी परेशानी है. वहीं खराब खान-पान भी हार्ट को नुकसान पहुंचाता है. आज के जमाने में ज्यादा नमक, ज्यादा चीनी, ज्यादा तेल से बनी चीजों का लोग खूब सेवन करने लगे हैं. फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड आदि हार्ट को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं.
हार्ट को सही कैसे रखें
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी बताते हैं कि हार्ट को सही रखने का सिंपल तरीका है. सबसे पहले सिगरेट, शराब को छोड़ दें. इसके बाद संतुलित और पौष्टिक भोजन करें. इसके बाद तनाव न लें. यदि तनाव है तो उसे योग, मेडिटेशन से कम करें. इसके बाद खुश रहें. सात से 8 घंटे की नींद लें और रोजाना एक्सरसाइज करें. शरीर को थकाएं. यहीं हार्ट को हेल्दी रखने का सिंपल तरीका है.



