National

48 घंटों में पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव संभव, अमरिंदर राजा वारिंग की जगह इस नेता को मिल सकती है कमान

पंजाब कांग्रेस को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. अगले 48 घंटों में पंजाब कांग्रेस नेतृत्व में बड़ा फेरबदल हो सकता है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्य कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को अगले 48 घंटों में हटाया जा सकता है. वहीं वारिंग की जगह विजय सिंगला को दिल्ली बुलाया जा सकता है. कांग्रेस हाईकमान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की समीक्षा के आधार पर यह फैसला ले सकता है. यह बदलाव तब हो रहा है जब तीन महीने पहले ही पार्टी ने उन्हें PCC प्रमुख बनाए रखने का फैसला किया था.

सूत्रों के अनुसार, पंजाब के नेताओं के साथ 56 से ज्यादा बैठकें और बातचीत हुई हैं. संगठन के कई लोगों का कहना है कि वारिंग की जगह किसी नए चेहरे को मौका दिया जाए. यह फैसला नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट की ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित बताया जा रहा है. पायलट ने राज्य के नेताओं और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं से बात की थी. ऐसे में अब कांग्रेस हाईकमान पायलट और राहुल गांधी की बैठक के बाद फैसला ले सकता है.

पायलट का काम संगठन की सही तस्वीर समझना है. वे जिला अध्यक्षों और दूसरे स्तर के नेताओं से भी व्यापक बातचीत कर रहे हैं.

वारिंग की जगह कौन आ सकता है?

पार्टी सूत्रों ने कई नाम बताए हैं, जिनमें चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विजय इंदर सिंगला, प्रताप सिंह बाजवा, परगत सिंह, जीएस औजला और सुखबिंदर सरकारिया का नाम शामिल है.

हालांकि इन सभी में विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. वे पूर्व मंत्री हैं और पार्टी के प्रमुख हिंदू चेहरे माने जाते हैं. वे केंद्रीय नेतृत्व के करीबी भी हैं. पहले भी नेतृत्व संबंधी चर्चाओं में उनका नाम प्रमुखता से आया था. राहुल गांधी ने उनसे और अन्य नेताओं से अलग-अलग मुलाकात भी की थी.

सिंगला को बनाया प्रमुख तो होगा ये बदलाव अगर सिंगला को PCC प्रमुख बनाया जाता है तो इसका राजनीतिक मतलब भी होगा. हिंदू नेता को संगठन का प्रमुख बनाने से कांग्रेस PCC चीफ को संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करने से बच सकती है. इससे चन्नी और रंधावा जैसे सिख नेताओं की मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा बनी रह सकती है. पार्टी 2027 के चुनाव में बिना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए लड़ सकती है.

सूत्रों के अनुसार, अगर अकाली दल और भाजपा 2027 से पहले साथ आते हैं तो कांग्रेस सामाजिक संतुलन बनाना चाहेगी. CLP नेता प्रताप सिंह बाजवा के जरिए जाट सिख प्रतिनिधित्व बनाए रखते हुए विजय इंदर सिंगला जैसे हिंदू चेहरे को संगठन का प्रमुख बनाकर हिंदू मतदाताओं में अपनी अपील बढ़ा सकती है.

पहले सीएम का चेहरा नहीं बताएगी कांग्रेसकांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह सामूहिक नेतृत्व के तहत चुनाव लड़ेगी, न कि पहले से मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करेगी. यही बड़ा मकसद नेतृत्व बदलाव के पीछे हो सकता है. संगठन का चेहरा बदलना, लेकिन बड़े नेताओं की महत्वाकांक्षाओं का दरवाजा बंद न करना.

आने वाले 48 घंटे तय करेंगे कि कांग्रेस आंतरिक असंतोष पर अमल करती है या फिर 2027 के चुनाव से पहले गुटों को एक साथ रखने का कोई और फॉर्मूला अपनाती है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj