Success Story: दादी का हौसला और 3 साल की मेहनत, रोज 19 घंटे पढ़ाई कर सुनीता ने ICAR में हासिल की AIR-1

Last Updated:October 01, 2026, 11:11 IST
Jaipur Sunita Todavata Success Story: किसान परिवार की बेटी सुनीता टोडावता ने मेहनत और लगन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. जयपुर के सांचौती गांव की 24 वर्षीय सुनीता ने ICAR JRF/SRF परीक्षा-2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है. कृषि प्रसार शिक्षा विषय में देशभर में पहला स्थान हासिल करने वाली सुनीता पिछले तीन वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने पढ़ाई के दौरान रोजाना करीब 19 घंटे अध्ययन किया और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी. सुनीता की सफलता में परिवार के साथ उनकी 75 वर्षीय दादी बिला देवी का भी अहम योगदान रहा. अब सुनीता कृषि प्रसार शिक्षा में रिसर्च करेंगी. उनका लक्ष्य भविष्य में कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों की समस्याओं को समझना और शोध के जरिए उनके समाधान तलाशना है.
कहते हैं मेहनत और लगन से कुछ बड़ा करने की इच्छा हो तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है. ऐसा ही जयपुर जिले की कालवाड़ तहसील के सांचौती गांव की 24 वर्षीय सुनीता टोडावता ने अपनी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. किसान परिवार से आने वाली सुनीता ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की JRF/SRF परीक्षा-2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की. उन्होंने कृषि प्रसार शिक्षा विषय में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया. सुनीता की इस सफलता से परिवार के साथ गांव में भी खुशी का माहौल है.
सुनीता किसान मालीराम टोडावता और मां मांगी देवी की बेटी हैं. माता-पिता लंबे समय से खेती का काम करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद सुनीता ने पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा. वह पिछले तीन वर्षों से लगातार परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. सुनीता ने बताया कि तैयारी के दौरान मेरा पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहा. रोजाना करीब 19 घंटे तक अध्ययन करती थी और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर रखी.
सुनीता की यह पहली राष्ट्रीय उपलब्धि नहीं है. श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर से स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 13वीं रैंक हासिल की थी. वहीं कैटेगरी में उन्हें चौथी रैंक मिली थी. इसके बाद उनका चयन दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में हुआ. वर्ष 2024 में भी सुनीता ने IARI से संबंधित परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर चौथी रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था.
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सुनीता ने बताया कि उनकी सफलता में परिवार के साथ 75 वर्षीय दादी बिला देवी का भी विशेष योगदान रहा. दादी हमेशा मुझे पढ़ाई के लिए प्रेरित करती थीं और आगे बढ़ने के लिए हौसला देती थीं. वह अक्सर कहती थीं कि बेटा, तू एक दिन परिवार का नाम जरूर रोशन करेगी. दादी की ये बातें मेरे लिए प्रेरणा बन गई. कठिन तैयारी के दौर में परिवार का सहयोग और दादी का विश्वास मुझे लगातार आगे बढ़ाता रहा.
सुनीता ने बताया कि कृषि प्रसार शिक्षा विभाग में रहते हुए रेडी प्रोग्राम के साथ तैयारी की और लगातार मेहनत करती रहीं. परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सीनियर्स और परिचितों ने फोन कर उन्हें बधाई दी. ऑल इंडिया रैंक-1 मिलने की जानकारी से परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. सुनीता अब कृषि प्रसार शिक्षा से जुड़े विषय पर रिसर्च करेंगी. उनका वर्तमान रिसर्च कार्य करीब तीन साल तक चलने की जानकारी उन्होंने दी.
सुनीता ने बताया कि सपना भविष्य में कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों के लिए काम करना है. उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र में शोध के माध्यम से किसानों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान खोजने की दिशा में काम करना चाहती हैं. किसान परिवार में पली-बढ़ी होने के कारण खेती और किसानों की चुनौतियों को उन्होंने करीब से देखा है. इसी वजह से उनका लक्ष्य कृषि से जुड़े शोध को किसानों के हित से जोड़ना है. उनकी सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणा बनी है.
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October 01, 2026, 11:11 IST



