सड़क हादसे के बाद नहीं, पहले ही पता चलेगा खतरा, IIT जोधपुर कर रहा ट्रैफिक पर खास शोध

जोधपुर. ब्लू सिटी जोधपुर में आईआईटी का खास शोध, जाम और सड़क हादसों को रोकने की दिशा में बड़ी पहल साबित हो सकती हे. आईआईटी जोधपुर की परिवहन व्यवस्था एवं यातायात मॉडलिंग प्रयोगशाला में सड़क पर जाम लगने से पहले उसका अनुमान लगाने पर शोध किया जा रहा है. उन्नत वाहन चालन सिम्युलेटर के जरिए अलग-अलग परिस्थितियों में चालकों के व्यवहार को भी समझा जा रहा है. वहीं, वास्तविक सड़कों से जुटाए जा रहे आंकड़ों के जरिए वाहनों और सड़क उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों का अध्ययन किया जा रहा है. शोध का फोकस हादसा होने के बाद कारण तलाशने के बजाय हादसे से पहले जोखिम भरी परिस्थितियों की पहचान पर है, ताकि सड़क डिजाइन और यातायात प्रबंधन को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके.
जोधपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की परिवहन व्यवस्था एवं यातायात मॉडलिंग प्रयोगशाला में यातायात जाम बनने की परिस्थितियों को समझने और उसका पहले से अनुमान लगाने पर शोध किया जा रहा है. सिविल एवं आधारभूत संरचना अभियांत्रिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रयोगशाला प्रमुख डॉ. रंजू मोहन के नेतृत्व में परिवहन अभियांत्रिकी, गणित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यवहार विज्ञान और आंकड़ा विश्लेषण को एक साथ जोड़कर यातायात व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है. शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि अलग-अलग प्रकार के वाहन एक साथ चलने पर यातायात का प्रवाह किस तरह बदलता है और जाम बनने से पहले कौन से संकेत दिखाई देते हैं. इसके लिए गणितीय एवं संगणकीय मॉडल विकसित किए जा रहे हैं.
सिम्युलेटर में समझा जा रहा चालक का व्यवहार
प्रयोगशाला में मौजूद उन्नत ड्राइविंग सिम्युलेटर के माध्यम से वास्तविक सड़क जैसी परिस्थितियां तैयार कर वाहन चालकों की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जा रहा है. अलग-अलग सड़क, यातायात और पर्यावरणीय परिस्थितियों में चालक किस तरह निर्णय लेते हैं, इसका अध्ययन नियंत्रित वातावरण में किया जा रहा है, जिससे वास्तविक सड़क पर किसी व्यक्ति को जोखिम में डालने की जरूरत नहीं पड़ती. भारत-जापान सहयोग के तहत जेएसटी लोटस परियोजना में सड़क की भौतिक परिस्थितियों और चालक के व्यवहार के बीच संबंध को भी समझा जा रहा है. इसका उद्देश्य भविष्य में सुरक्षित और यात्रियों के लिए अधिक आरामदायक परिवहन ढांचा तैयार करने में मदद करना है.
जोधपुर के यातायात का तैयार हो रहा बड़ा आंकड़ा भंडार
शोध का एक अहम हिस्सा भारतीय यातायात की वास्तविक परिस्थितियों से जुड़े आंकड़े जुटाना है. इसके लिए प्रयोगशाला ‘आईडीएस जोधा’ नामक व्यापक परिवहन आंकड़ा भंडार विकसित कर रही है. अलग-अलग यातायात परिस्थितियों में बड़े स्तर पर क्षेत्रीय आंकड़े जुटाकर उनका अध्ययन किया जा रहा है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उन्नत तकनीकों, विशेष रूप से ग्राफ न्यूरल नेटवर्क के माध्यम से सड़क पर मौजूद वाहनों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच होने वाली जटिल गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है. इससे ऐसे पैटर्न पहचानने में मदद मिल सकती है, जो सामान्य तौर पर तुरंत दिखाई नहीं देते.
हादसे से पहले खतरे की पहचान पर जोर
प्रयोगशाला का शोध केवल दुर्घटना होने के बाद उसके कारण तलाशने तक सीमित नहीं है. ‘प्रोएक्टिव रोड सेफ्टी’ शोध के तहत यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दुर्घटना से पहले सड़क पर कौन सी जोखिम भरी परिस्थितियां बनती है. यातायात प्रवाह, चालक व्यवहार, सिम्युलेटर अध्ययन और वास्तविक सड़क से जुटाए गए आंकड़ों को एक साथ जोड़कर संभावित खतरों की पहले पहचान करने के तरीके विकसित किए जा रहे हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तरह के अध्ययन से भविष्य में सड़क डिजाइन, यातायात प्रबंधन और परिवहन नीतियों को अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है. प्रयोगशाला का उद्देश्य ऐसा परिवहन तंत्र विकसित करना है, जिसमें सड़क, वाहन, व्यक्ति, तकनीक और पर्यावरण सभी को एक साथ समझते हुए सुरक्षित और बेहतर यातायात व्यवस्था तैयार की जा सके.



