सत्य बोलने से लेकर रिश्वत देने तक, गांधीजी के सिद्धांतों पर जोधपुर वालों ने क्या कहा? 5 सवालों में सामने आई अलग-अलग सोच

Last Updated:October 01, 2026, 18:02 IST
What Youth Think About Mahatma Gandhi Ideas: गांधी जयंती के मौके पर जोधपुर की सड़कों पर लोगों से गांधीजी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के सिद्धांतों को लेकर सवाल किए गए. लोगों से यह भी पूछा गया कि रोजमर्रा की जिंदगी में वे झूठ, रिश्वत और सोशल मीडिया पर होने वाली गाली-गलौज को किस तरह देखते हैं. कार्तिक शर्मा ने माना कि कभी-कभी किसी को परेशानी से बचाने के लिए झूठ बोलना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर रिश्वत देने की स्थिति भी बनी है. सोशल मीडिया पर गाली मिलने पर वह जवाब देने के बजाय रिपोर्ट या ब्लॉक करना पसंद करते हैं. कोमल ने रिश्वत को गलत बताया, जबकि दिया ने झूठ और रिश्वत को लेकर परिस्थिति के अनुसार अपनी राय रखी.
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जोधपुर. गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और स्वच्छता को अपने जीवन का आधार बनाया था, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम इन सिद्धांतों पर कितना चलते हैं? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए हम पहुंचे जोधपुर की सड़कों पर और लोगों से पूछे पांच सीधे सवाल. जवाब कुछ ऐसे मिले, जिन्होंने हमें भी सोचने पर मजबूर कर दिया.
जोधपुर में गांधीजी के सत्य के सिद्धांत को लेकर जब लोगों से सवाल किया गया तो कार्तिक शर्मा ने बेबाकी से अपनी बात रखी. कार्तिक ने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में कभी-कभी झूठ बोलना पड़ता है. उनका कहना था कि कई बार किसी दूसरे व्यक्ति को परेशानी से बचाने के लिए झूठ बोलते हैं, लेकिन ऐसा झूठ नहीं बोलते, जिससे किसी को नुकसान पहुंचे. यानी उनके लिए झूठ की वजह और उसका असर दोनों मायने रखते हैं.
काम जल्दी हो तो रिश्वत की जरूरत पड़ती है- कार्तिकरिश्वत के सवाल पर भी कार्तिक ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि सिस्टम अभी इतना अपडेट नहीं हुआ है कि हर काम आसानी से हो जाए. कई बार किसी काम की जल्दबाजी या जरूरत होने पर रिश्वत देने की स्थिति बन जाती है और उनके साथ भी ऐसा हुआ है. कार्तिक के इस जवाब ने व्यवस्था और आम आदमी की मजबूरी के बीच की तस्वीर सामने रखी.
सोशल मीडिया पर गाली का जवाब ब्लॉक और रिपोर्ट सेसोशल मीडिया पर गाली-गलौज को लेकर कार्तिक ने कहा कि वह सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं और उनका पूरा कारोबार भी इससे जुड़ा है. उनके मुताबिक सोशल मीडिया अच्छा भी है और बुरा भी. अगर कोई बहस के दौरान गाली देता है तो वह गाली का जवाब गाली से देने के बजाय सामने वाले को रिपोर्ट या ब्लॉक करना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा कि लोगों का काम बोलना है, लेकिन खुद पर संयम रखना जरूरी है. कार्तिक ने हिंसा को सिर्फ हाथापाई तक सीमित नहीं माना और कहा कि शब्दों के जरिए भी हिंसा हो सकती है.
कोमल और दिया के जवाबों में दिखी अलग-अलग सोचदूसरी ओर, कोमल ने कहा कि वह भी कभी-कभी झूठ बोलती हैं, लेकिन कोशिश रहती है कि इससे किसी को नुकसान न हो. रिश्वत के सवाल पर उनका जवाब साफ था कि उन्होंने कभी रिश्वत नहीं दी और इसे गलत मानती हैं. सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करने वालों के लिए उनका तरीका भी सीधा है, ऐसे लोगों को रिपोर्ट कर देती हैं.
किसी की भावनाएं आहत करने से बचेंवहीं बीटेक की छात्रा दिया ने माना कि वह कभी-कभी झूठ बोलती हैं, खासकर किसी की भावनाएं आहत न हों, इसलिए. रिश्वत को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ विभागों में कभी-कभी इसकी जरूरत पड़ती है. सोशल मीडिया पर गाली का जवाब व्यक्ति और परिस्थिति के हिसाब से देने की बात कही. विदेशी और भारतीय सामान की पसंद पर दिया ने कहा कि वह उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर फैसला करेंगी. कुछ चीजों में उन्हें कोरियाई उत्पाद पसंद हैं, तो कुछ में भारतीय सामान.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
October 01, 2026, 18:02 IST



