Explained: मोटापे के नाम पर कैसे फैल रहा है देश में ‘नकली दवाओं’ का धंधा?

डायबिटीज के मामलों में भारत दुनिया में नंबर 2 पर आता है. ये आंकड़े डराने वाले हैं और चेताने वाले भी. डायबिटीज एक लाइपस्टाइल से जुड़ी बीमारी है और मोटापा इसकी बड़ी वजह है. यही वजह है कि भारत वजन कम करने वाली दवाओं का बड़ा बाजार बन चुका है. ओज़ेम्पिक (Ozempic), मोनजारो जैसी दवाएं आने के बाद बहुत से लोगों ने मोटापे से लड़ने और वजन घटाने के लिए इनका इस्तेमाल करना शुरू भी कर दिया है. अभी तक इन दवाओं पर पेटेंट था पर मार्च में ये पेटेंट खत्म हो गया है. यानी अब भारतीय कंपनियां भी इन दवाओं का सस्ता जेनेरिक संस्करण बना सकती हैं लेकिन एक तरफ जहां ये भारतीय उपभोक्ताओं के लिए फायदे की खबर हो सकती है. वहीं दूसरी तरफ इसी खबर के साथ एक नई चिंता पसर रही है. वो है ‘दवाएं का नकली बाजार’ की.
अब भारतीय दवा कंपनियां मोटापा कम करने वाली दवाओं के सस्ते जेनेरिक अवतार बना पाएंगी. अगर सही डॉक्टर की सलाह के साथ ये सस्ती दवाएं ली जाएं तो लाखों लोगों की मदद हो सकती है. ये दवाएं भारत में लगातार बढ़ते डायबिटीज के मामलों को रोकने में बड़ी मदद साबित हो सकती हैं. लेकिन इससे पहले ही बाजार में नकली वजन घटाने वाली दवाओं की बाढ़ आ गई है. यानी पेटेंट खत्म होने का फायदा जहां लोगों को होना था, वही फायदा अब नकली दवा बनाने वाले उठा रहे हैं.
डायबिटीज के इलाज में गिफ्ट मिला वेट-लॉसदुनियाभर में डायबिटीज एक बड़ा खतरा है. इसी को देखते हुए कुछ साल पहले डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने ओज़ेम्पिक नाम की दवा लॉन्च की थी. यह एक इंजेक्शन है, जो डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है. ये दवा तो डायबिटीज के लिए बनी थी, पर इसका एक असर वजन पर भी नजर आया. यही वजह है कि ये दवाएं वजन कम करने की दवाओं के तौर पर ज्यादा चर्चित हुईं. ओजेम्पिक के बाद तो जैसे पूरी दुनिया में वजन घटाने वाली दवाओं को लेकर हंगामा ही मच गया. नोवो नॉर्डिस्क के बाद एली लिली (Eli Lilly) ने माउनजारो (Mounjaro) जैसी दवाएं लॉन्च कीं. ये दवाएं डायबिटीज के मरीजों की मदद कर सकती हैं. मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए भी ये फायदेमंद हो सकती हैं और कई मामलों में गंभीर हेल्थ रिस्क कम कर सकती हैं. यही वजह है कि भारत जैसे देश में, जहां जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं, ये दवाएं भारत के लिए वरदान साबित हो सकती थीं. क्योंकि हमारे देश में करोड़ों लोग मोटापे और डायबिटीज से प्रभावित हैं.
जेनेरिक दवाएं हो सकती हैं 70 प्रतिशत सस्तीपर ये दवाएं इतनी सस्ती नहीं कि हर कोई इन्हें इलाज के तौर पर इस्तेमाल कर ले. भारत में मोनजारो का एक इंजेक्शन 13,000 रुपये से भी ज्यादा का पड़ सकता है. इन इंजेक्शनों को कई महीनों तक लेना पड़ता है. ऐसे में पूरे इलाज का खर्च एक लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है. यानी ये सब काफी महंगा है. यही वजह है कि जब मार्च में इन दवाओं के पेटेंट खत्म हो गए, तो इन्हें लेकर उम्मीद जागी. ऐसा हुआ भी क्योंकि भारतीय कंपनियां इन दवाओं के सस्ते विकल्प तैयार कर लाईं, जिनकी कीमतें 70% तक कम है. करेंगी और लोगों तक पहुंच बढ़ेगी.
Firstpost की ताजा रिपोर्ट बाताती है कि इसी बीच नया व्यापार भी पनप रहा है. यानी नकली दवाओं का कारोबार. हाल के महीनों में कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं जो बताती हैं कि भारत में नकली वजन घटाने वाली दवाओं का बाजार तेजी से फैल रहा है. असली जेनेरिक दवाएं सच में सस्ती होती हैं, क्योंकि उनपर किसी बड़ी कंपनियों का ब्रांडनेम नहीं होता. लेकिन इसी का फायदा उठाया है नकली दवाओं ने.
असली पैकेट में नकली दवाओं का कारोबारबाजार में ऐसी दवाएं, इंजेक्शंस आ रहे हैं, जिनकी पैकेजिंग ओज़ेम्पिक या मोनजारो जैसी दिखती है, लेकिन अंदर की दवा असली नहीं होती. कई बार इनमें वजन घटाने वाली दवा होती ही नहीं. ऐसी नकली दवाएं अक्सर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बेची जाती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम कीमत देखकर लोग इन्हें खरीद लेते हैं और उन्हें लगता है कि उन्हें महंगी दवा सस्ते में मिल गई है.
नकली दवाओं की एक दूसरी श्रेणी भी है. ये पूरी तरह नकली नहीं होतीं क्योंकि इनमें असली सक्रिय तत्व तो मौजूद होता है, लेकिन दवा सही तरीके से तैयार नहीं की जाती. जैसे ओज़ेम्पिक में ‘सेमाग्लूटाइड’ नाम का सक्रिय तत्व होता है, जबकि माउनजारो में ‘टिरज़ेपाटाइड’ होता है. लेकिन ये दवाएं सिर्फ इन एक्टिव इग्रीडिंट्स से ही नहीं बनती. सुरक्षित और प्रभावी दवा बनाने के लिए इन्हें विशेष प्रक्रिया से तैयार करना पड़ता है, जो ब्रांड करते हैं. लेकिन कुछ अवैध निर्माता इस पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं. वे चीन जैसे देशों से ऐसे एक्टिव एलीमेंट्स मंगाकर जल्दबाजी में दवाएं तैयार कर देते हैं. बड़ी परेशानी है कि ये दवाएं साफ-सुथरे और सुरक्षित वातावरण में भी नहीं बनतीं, जिससे इनफेक्शन और बाकी हेल्थ रिस्क बढ़ जाते हैं.
नकली वजन घटाने वाली दवाएं भारत में एक बड़े कारोबार का रूप ले चुकी हैं. एक्सर्ट्स की मानें तो लोगों की सुरक्षा के लिए रेगुलेटिंग एजेंसियों को तुरंत कदम उठाने चाहिए.



