‘मैंने उन्हें ताबूत में देखा’, पिता की शहादत पर छलका निम्रत कौर का दर्द, नकली सैनिक बन आतंकियों ने किया था अगवा

Last Updated:October 01, 2026, 22:43 IST
बॉलीवुड एक्ट्रेस निम्रत कौर ने उस खौफनाक हादसे को याद किया, जिसने उनके पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था. साल 1994 में कश्मीर में तैनात उनके पिता मेजर भूपेंद्र सिंह को फर्जी सैनिक बनकर आए आतंकियों ने अगवा कर लिया था और फिर सात दिनों के बाद उनकी हत्या कर दी. निम्रत ने बताया कि उन्होंने उस सुबह पिता को काम पर जाते देखा था और उसके बाद सीधे ताबूत में ही देखा.
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निम्रत कौर ने पिता मेजर भूपेंद्र सिंह की शहादत को किया याद. (फोटो साभार: Instagram@nimratofficial)
नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्ट्रेस निम्रत कौर ने महज 11 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था. जनवरी 1994 में कश्मीर में तैनात उनके पिता मेजर भूपेंद्र सिंह को ड्यूटी से लौटते समय आतंकियों ने अगवा कर लिया और बाद में उनकी हत्या कर दी. इस खौफनाक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी. निम्रत कौर ने उस दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए बताया कि उन्होंने उस दिन पिता को काम पर जाते हुए देखा था और फिर अगली बार ताबूत में. देश के लिए बलिदान देने वाले मेजर भूपेंद्र सिंह को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था.
एएनआई को दिए इंटरव्यू में निम्रत कौर ने बताया कि उन्होंने आखिर बार अपने पिता को काम पर जाते हुए देखा था. उन्होंने बताया कि उस वक्त परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि आगे क्या तूफान आने वाला है. निमरत ने कहा, ‘मुझे अच्छी तरह याद है, उस सुबह पापा को काम पर जाते देखा था. उसके बाद अगली बार मैंने उन्हें सीधे ताबूत में ही देखा. उन्होंने आगे बताया कि इतने सालों बाद भी यह दर्दनाक घटना उनके परिवार को अंदर तक झकझोर देता है. निम्रत ने कहा, ‘दशक बीत चुके हैं और कहने को लगता है कि बहुत वक्त हो गया, लेकिन दिल का यह खालीपन कभी नहीं भरता.’
नकली सैनिक बनकर आतंकियों ने किया था अगवा
अपने पिता के अपहरण की घटना बयां करते हुए निम्रत ने बताया कि मेजर भूपेंद्र सिंह हर दिन की तरह अपनी ड्यूटी पूरी करके लौट रहे थे, इसी दौरान सेना की वर्दी पहने कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और अगवा कर लिया. निम्रत के मुताबिक, अगले 7 दिनों तक आतंकियों ने परिवार और प्रशासन के सामने कई बेतुकी शर्तें रखीं. उन्होंने बताया, ‘अपहरणकर्ताओं की मांगें बिल्कुल बेतुकी थीं. वे भारत की हिरासत में मौजूद अन्य आतंकियों की रिहाई की मांग कर रहे थे. उस एक हफ्ते के दौरान रोज नई-नई शर्तें सामने आती रहीं, जिसने पूरे परिवार को गहरी दहशत में डाल दिया था.’
अपहरण के बाद मिली पिता के शहीद होने की खबर
निम्रत कौर ने बताया कि उस दौर में उनका पूरा परिवार कश्मीर में ही मौजूद था. शुरुआत में वह अपनी मां और बहन के साथ वेरीनाग में थीं, लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे और खतरा बढ़ा, तो उन्हें सुरक्षित श्रीनगर शिफ्ट कर दिया गया. अपहरण के सातवें दिन आखिरकार परिवार को वह मनहूस खबर मिली, जिसने सब कुछ उजाड़ दिया. मेजर भूपेंद्र सिंह शहीद हो चुके थे. निम्रत ने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि आतंकियों की कैद में रहते हुए भी उनके पिता लगातार अपने परिवार को ही याद कर रहे थे.
आतंकियों की कैद में बेटियों को याद कर रहे थे मेजर भूपेंद्र सिंह
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, ‘उन्होंने उन लोगों से कहा था कि मेरा एक परिवार है, मेरी दो छोटी बेटियां हैं. मुझे पूरा यकीन है कि अपनी जिंदगी की आखिरी सांसों तक उनके जेहन में सिर्फ हमारा ही ख्याल था. वह हर हाल में बस हमारे पास वापस लौटना चाहते थे. पिता के जाने के बाद निम्रत, उनकी मां और बहन कश्मीर छोड़कर नोएडा शिफ्ट हो गए, जहां उनके नाना-नानी रहते थे.
About the AuthorKamta PrasadSenior Sub Editor
कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
October 01, 2026, 22:43 IST



