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राजस्थान का अनोखा धाम, जहां भगवान की मूर्ति नहीं पूजे जाते हैं संतों के पगल्या, 12 अक्टूबर को लगेगा मेला

Last Updated:October 04, 2026, 10:41 IST

Paglya Wale Baba Dham Sambhar Lake: राजस्थान की सांभर झील किनारे मारिसर में स्थित पगल्या वाले बाबा धाम में 12 अक्टूबर को वार्षिक मेला लगेगा. यहां किसी देवी-देवता की मूर्ति की नहीं, बल्कि संतों के पदचिह्नों यानी ‘पगल्या’ की पूजा होती है. यह स्थान दादू दयाल संत परंपरा से जुड़ा है. यहां लकवा ग्रस्त मरीजों की विशेष आस्था है. मान्यता है कि मंदिर के धूणे की सात बार परिक्रमा कर भभूत लगाने से लकवा मरीजों को लाभ मिलता है. मेले में भजन संध्या और भामाशाहों द्वारा सेवा कार्य होंगे. मंदिर में गौशाला और ठहरने की भी व्यवस्था है.

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Jaipur: राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध सांभर झील के किनारे एक ऐसा अनूठा धार्मिक स्थल मौजूद है, जहां आस्था का एक अलग ही स्वरूप देखने को मिलता है. नमक की सफेद चादर के बीच बसे इस धाम में किसी देवी-देवता की मूर्ति या प्रतिमा की पूजा नहीं होती है. यहां संतों के पवित्र पदचिह्नों यानी पगल्या की पूजा की जाती है. नावा क्षेत्र के मारिसर में स्थित पगल्या वाले बाबा धाम में आगामी 12 अक्टूबर को विशाल वार्षिक मेले का आयोजन होने जा रहा है. इस भव्य मेले को लेकर मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां सेवा और समर्पण की अनूठी परंपरा भी देखने को मिलती है. मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्षेत्र के भामाशाहों ने अलग-अलग सेवा कार्यों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है.

वार्षिक मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी, भोजन, ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर भामाशाह आगे आए हैं. सेवा कार्यों के जरिए मेले में आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है. पगल्या वाले बाबा धाम का यह मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आसपास के गांवों और पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए सामूहिक सेवा का एक बड़ा अवसर भी बनता है. यहां दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोग भी व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर अपना पूर्ण सहयोग करते हैं.

देर रात तक गूंजेंगे भक्ति के मधुर सुरमेले के शुभ अवसर पर धाम में एक भव्य भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा. सांभर झील के किनारे स्थित बाबा के इस पावन धाम में दिनभर दर्शन और पूजा-अर्चना का दौर चलेगा. इसके बाद शाम होते ही पूरा माहौल भक्ति संगीत के रस में डूब जाएगा. भजन संध्या में नामी गायक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे और देर रात तक श्रद्धालु भजनों का आनंद लेंगे. मंदिर समिति की ओर से इस भव्य आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियां लगातार की जा रही हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव मिल सके.

संतों के पवित्र पगल्या की पूजा का महत्वपगल्या वाले बाबा धाम की सबसे खास बात यहां की प्राचीन पूजा परंपरा है. मान्यताओं के अनुसार, यह राजस्थान का एक ऐसा अनूठा धार्मिक स्थल है, जहां किसी भी देवी या देवता की मूर्ति स्थापित नहीं है. इसके बजाय यहां संतों के पवित्र पदचिह्नों की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है. इसी अनूठी परंपरा के कारण ही इस पवित्र स्थान को पगल्या वाले बाबा के नाम से जाना जाता है. नमक की इस विशाल झील के किनारे स्थित यह स्थल प्राचीन संत परंपरा से जुड़ा माना जाता है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह स्थान दादू दयाल परंपरा से जुड़े सिद्ध संतों की तपोभूमि रहा है. मंदिर में सुरक्षित रखे गए संतों के इन पवित्र पदचिह्नों को श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ पूजते हैं और मन्नत मांगते हैं.

लकवा मरीजों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्रपगल्या वाले बाबा धाम की पहचान लकवा यानी पैरालिसिस से पीड़ित मरीजों की गहरी आस्था से भी जुड़ी हुई है. मंदिर परिसर में बने एक विशाल धूणे की परिक्रमा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष मान्यता है. ऐसा माना जाता है कि भक्त धूणे की पवित्र भभूत लेकर सात बार परिक्रमा करते हैं और उसे रोगी के शरीर पर लगाते हैं, तो उन्हें इस गंभीर बीमारी से राहत मिलती है. कई श्रद्धालुओं का दावा है कि इस धार्मिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया से मरीजों को बहुत लाभ मिला है. दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने के लिए मंदिर परिसर में एक विशाल धर्मशाला भी बनी हुई है. इसके साथ ही मंदिर में एक बड़ी गौशाला भी संचालित है, जहां सैकड़ों गायों की देखभाल की जाती है. इस गौशाला से होने वाली आय को मंदिर के विकास और गौसेवा के महान कार्यों में लगाया जाता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

October 04, 2026, 10:37 IST

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