पंचायत चुनाव से पहले गहलोत का बड़ा सियासी वार, बोले- गांव वाले देंगे जवाब, सरकार को सिखाएंगे सबक

जयपुर. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरमाने लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंचायत चुनाव से पहले भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. गहलोत ने नगर निकाय चुनाव में पुलिस और प्रशासन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान के इतिहास में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं बनी. उन्होंने दावा किया कि नगर निकाय चुनाव को लेकर लोगों में आक्रोश है और इसका असर अब पंचायत चुनाव में दिखाई देगा. गहलोत ने कहा कि गांवों में कांग्रेस के कार्यकर्ता मजबूत हैं और ग्रामीण मतदाता सरकार के कामकाज का जवाब पंचायत चुनाव में देंगे.
गहलोत ने कहा कि नगर निकाय चुनाव के अनुभव से ग्रामीण मतदाता भी काफी कुछ सीख चुके हैं. कांग्रेस कार्यकर्ता गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर लगातार लोगों के बीच काम कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि पिछले ढाई साल में कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका निभाते हुए सरकार की नाकामियों और लोगों की समस्याओं को सामने रखने में कोई कमी नहीं छोड़ी है. अब पंचायत चुनाव में इन्हीं मुद्दों के आधार पर कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी में है.
किसानों के बयान पर भी सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री के किसानों के 20-25 दिन काम करने वाले कथित बयान को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. गहलोत ने कहा कि इस बयान का गांवों और किसानों के बीच रिएक्शन है. ग्रामीण सवाल कर रहे हैं कि अगर किसान सिर्फ 20-25 दिन काम करते हैं तो बाकी समय वे क्या करते हैं. उन्होंने दावा किया कि किसानों और ग्रामीणों के बीच इस तरह के बयानों को लेकर नाराजगी है और पंचायत चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा.
योजनाएं बंद करने का लगाया आरोप
गहलोत ने अपनी सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए शुरू की गई योजनाएं गांव-गांव में लोकप्रिय थीं. गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने कई योजनाओं को बंद कर दिया. उन्होंने कहा कि किसी योजना का नाम बदलना अलग बात है, लेकिन योजनाओं को खत्म क्यों किया गया, यह समझ से परे है.
चार चरण में पंचायत चुनाव पर उठाए सवाल
पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने के फैसले पर भी गहलोत ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने सोच-समझकर यह फैसला किया होगा, लेकिन अगर यह सरकार की सलाह पर हुआ है तो इसके पीछे कोई और उद्देश्य हो सकता है. गहलोत ने आशंका जताई कि पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव जीतने वाले सदस्यों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है. उन्होंने कहा कि अगर पंचायत चुनाव के बाद निर्वाचित पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों की खरीद-फरोख्त या अपहरण जैसा कोई षड्यंत्र होता है तो वह सामने आ जाएगा. गहलोत ने कहा कि पिछले 60-70 वर्षों में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने पंचायत और निकाय चुनाव जीते हैं, लेकिन इस तरह की शिकायतें पहले कभी नहीं सुनी गईं.
‘विपक्ष मुक्त राजनीति’ का लगाया आरोप
गहलोत ने केंद्र और राज्य सरकार पर ‘विपक्ष मुक्त राजनीति’ की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर लोकतंत्र में विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश होगी तो लोकतंत्र के सामने सवाल खड़े होंगे. गहलोत ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं और दोनों की अपनी भूमिका है.
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का किया जिक्र
गहलोत ने राहुल गांधी की ओर से निर्वाचन आयोग को लेकर उठाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कई बार लिखित चेतावनी दी थी. गहलोत के मुताबिक, इन चेतावनियों की जानकारी कैबिनेट सचिव को भी भेजी गई थी. उन्होंने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को 14 बार लिखित चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है. गहलोत ने राहुल गांधी की दूरदृष्टि का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी कई मुद्दों पर सरकार को पहले ही आगाह करते हैं और बाद में उनकी बातें सामने आती हैं.
पंचायत चुनाव में ग्रामीण मतदाता सरकार के कामकाज का जवाब देंगे
उन्होंने कहा कि सरकार अगर राहुल गांधी की बातों को सकारात्मक तरीके से ले तो इसका फायदा देश और सरकार दोनों को हो सकता है. गहलोत ने दावा किया कि वोट चोरी के मुद्दे पर अब कई बातें सामने आ रही हैं और राहुल गांधी इस मामले को लेकर कई प्रस्तुतियां भी दे चुके हैं. गहलोत ने कहा कि इन मुद्दों का असर युवाओं में भी दिखाई दे रहा है और नौजवानों के सड़कों पर आने के पीछे भी ऐसे ही सवालों की भूमिका है. उन्होंने भरोसा जताया कि पंचायत चुनाव में ग्रामीण मतदाता सरकार के कामकाज का जवाब देंगे और कांग्रेस को बड़ी सफलता मिलेगी.



