घर के बाहर दिखा 8 फीट का मगरमच्छ, गांव में मच गया हड़कंप, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू

पाली. पाली जिले के बाली उपखंड क्षेत्र में आए दिन जलाशयों से निकलकर मगरमच्छों के इंसानी बस्तियों और गांवों की ओर रुख करने के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. हाल ही में बाली के लालपुरा गांव से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई, जहां तड़के एक मकान के मुख्य दरवाजे पर 8 फीट लंबा और करीब 70 किलो वजनी विशालकाय मगरमच्छ पहुंच गया. गनीमत यह रही कि समय रहते रेस्क्यू टीम ने इसे सुरक्षित पकड़कर जवाई बांध क्षेत्र में छोड़ दिया, लेकिन इस घटना ने ग्रामीणों के मन में खौफ पैदा कर दिया है.
मगर सवाल उठता है कि आखिरकार मगरमच्छ इस तरह से निकलकर आबादी क्षेत्र में क्यो पहुंच रहे है तो कई बार यह सामने भी आया है कि मगरमच्छ खाने की तलाश में ऐसे निकल जाते है और कई बार गाय के गोबर खाते हुए भी उनको गांवो में देखा गया है.
तड़के खटखटाया दरवाजा, बाहर देखा तो उड़ गए होशलालपुरा गांव के निवासी मगनाराम मीणा ने बताया कि वे अपने घर में पत्नी और बच्चों के साथ सो रहे थे. तड़के करीब 3 बजे अचानक मुख्य दरवाजे से जोर-जोर से टकराने की आवाज आई. मगनाराम जब बाहर देखने के लिए निकले और दरवाजा खोला, तो ठीक सामने विशालकाय मगरमच्छ को देखकर उनके होश उड़ गए.
इस तरह किया रेस्क्यूमगनाराम ने तुरंत संयम बरतते हुए ग्रामीणों और वन विभाग को इसकी सूचना दी. वनपाल प्रकाश मीणा की सूचना पर वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू टीम तड़के ही मौके पर पहुंची. रेंजर महेंद्र पाल सिंह के निर्देशन में कांतिलाल प्रजापत, गोविंद प्रजापत और दिलीप सेन की टीम ने मोर्चा संभाला. पहले ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर किया गया और फिर करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ का मुंह और पैर रस्सी से बांधकर उसे काबू में किया गया. बाद में इसे जवाई बांध के सुरक्षित क्षेत्र में छोड़ दिया गया.
आखिर क्यों गांवों में आ रहे हैं मगरमच्छ? सामने आ रहे चौंकाने वाले कारणस्थानीय लोगों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, पानी के प्राकृतिक स्रोतों से निकलकर मगरमच्छों के गांवों और घरों तक पहुंचने के पीछे कई अहम वजहें सामने आ रही हैं:
पानी का घटता स्तर: जलाशयों और जवाई बांध के आसपास जल स्तर कम होने से मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है. पानी कम होने से वे नया ठिकाना और नमी ढूंढते हुए आबादी वाले इलाकों का रुख कर रहे हैं.
भोजन की भारी किल्लत: पानी में पर्याप्त शिकार न मिलने के कारण मगरमच्छ भोजन की तलाश में भटकते हुए बस्तियों तक पहुंच रहे हैं.
गोबर खाते दिखे मगरमच्छ! स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि कई मौकों पर मगरमच्छों को गायों का गोबर खाते हुए भी देखा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पेट भरने के लिए भोजन की कमी के चलते यह जलीय जीव इस तरह के असामान्य व्यवहार और भोजन के विकल्पों की ओर मजबूर हो रहा है.
आए दिन गांवों में मगरमच्छों की इस तरह की दस्तक से ग्रामीणों में भारी दहशत है. लोगों ने मांग की है कि वन विभाग वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों में पानी और भोजन



