आजमगढ़ में पीपीपी मॉडल पर बने चौराहों के फव्वारे व ढांचे देखरेख के अभाव में बनें शोपीस, देखरेख करने वाली संस्था को दी जाएगी नोटिस

आजमगढ़: शहर को आधुनिक और खूबसूरत रूप देने के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत शहर के मुख्य चौराहों और तिराहों के सौंदर्यीकरण करने के मकसद से बड़े-बड़े फव्वारों और सुंदर ढांचों का निर्माण कराया था. लेकिन आज की जमीनी हकीकत यह है कि खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाए गए ये फव्वारे महज एक शोपीस बनकर रह गए हैं. इन फव्वारों से पानी का फव्वारे तो नहीं छूटते, लेकिन इनमें गंदे पानी और कूड़े का अंबार जरूर नजर आता है.
चौराहे के फव्वारे बनें शोपीस
शहर के सबसे प्रमुख चौराहों में से एक बावली मोड़ की हालत देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि देखरेख का क्या स्तर है. यहां पीपीपी मॉडल पर बना फव्वारा और ढांचा धूल की मोटी परतों से पटा पड़ा है. इसके चारों ओर प्रचार के पोस्टर और बैनर चिपका दिए गए हैं, जिससे यह सिर्फ एक विज्ञापन बोर्ड बनकर रह गया है. कुछ ऐसी ही दुर्दशा शहर के करतालपुर तिराहे की भी है. यहां सौंदर्यीकरण के लिए बनाए गए मॉडल और फव्वारे के गड्ढे में गंदा और बदबूदार पानी जमा है. यह गंदा पानी न सिर्फ गंदगी का कारण बन हुआ है, बल्कि मच्छरों के पनपने से संक्रामक बीमारियों को भी खुला न्योता दे रहा है.
शहर के बाकी चौराहों और तिराहों की भी कमोबेश यही तस्वीर है. मेंटेनेंस के अभाव में कहीं चारदीवारी टूटकर बिखर रही है, कहीं टाइल्स उखड़ गई हैं, तो कहीं लाइटें गायब हैं. सुंदर चौराहे अब पोस्टरों और होर्डिंग्स के पीछे पूरी तरह गुम हो चुके हैं.
तैयार की जा रही है निर्माण के लिए सूची
जब इस बदहाली और गंदगी को लेकर नगर पालिका प्रशासन से बात की गई, तो इस विषय पर अधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार का कहना है कि चौराहों की स्थिति वाकई खस्ता हो चुकी है. उन्होंने बताया कि शहर के ज्यादातर चौराहे पीपीपी मॉडल पर किसी न किसी संस्था, व्यक्ति या समूह को दिए गए थे और उन्हीं के जरिए इनका निर्माण हुआ था. लेकिन समय पर मेंटेनेंस न होने के चलते इनकी स्थिति बद से बदतर होती चली गई.
अधिशासी अधिकारी ने इस मामले में कदम उठाते हुए बताया कि उन्होंने नगर पालिका क्षेत्र के दोनों जेई (जूनियर इंजीनियर) को इस पर काम करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं. दोनों जेई को कहा गया है कि वे शहर के ऐसे सभी चौराहों का मौके पर जाकर विस्तृत सर्वे करें. सर्वे में यह देखा जाएगा कि चौराहों पर लाइट खराब है, चारदीवारी टूटी है, टाइल्स उखड़ी हैं या कोई गड्ढा हो गया है. निर्माण के समय जो भी चीजें लगाई गई थीं, उनमें क्या-क्या नुकसान हुआ है, इसकी पूरी सूची बनाई जाएगी.
चौराहों को फिर से किया जाएगा दुरुस्त
उन्होंने साफ कहा कि जैसे ही सर्वे पूरा होगा, संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों को लिखित नोटिस जारी कर मेंटेनेंस कराने के लिए कहा जाएगा. चूंकि चौराहों का निर्माण उन संस्थाओं ने कराया था, इसलिए उनकी देखरेख की नैतिक और व्यावहारिक जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है. चौराहे दुरुस्त रहेंगे तो शहर के साथ-साथ उन संस्थाओं और उनके पूर्वजों का मान-सम्मान भी बढ़ेगा. अधिकारी ने संस्थाओं से खुद आकर इन चौराहों का मुआयना करने और उन्हें दोबारा पुरानी स्थिति में लौटाने की अपील की है. अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका के इस सर्वे और नोटिस के बाद इन चौराहों की सूरत कब तक बदलती है, या फिर यह फव्वारे यूं ही धूल, कचरे और पोस्टरों में दबे रहेंगे.



