Opinion on Nana Patekar Death: न सुंदर चेहरा, न सिक्स पैक, न डांस का जलवा… अपने तेवरों से हीरो थे नाना पाटेकर

Last Updated:October 08, 2026, 11:20 IST
Nana Patekar Death: नाना पाटेकर सिर्फ अदाकार नहीं बल्कि कलाकार थे. बॉलीवुड के साथ-साथ मराठी फिल्म इंडस्ट्री के भी बड़े नाम थे. शानदार पेंटर थे. समाजसेवक थे. देशभक्त और कट्टर राष्ट्रवादी थे. अपनी संस्थाओं से उन्होंने आम आदमी की मदद की और अपनी सेहत का ध्यान रखते थे. 75 साल की उम्र में आठ अक्टूबर को आए कार्डियक अरेस्ट से उनकी अचानक मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है.नाना पाटेकर की कार्डियक अरेस्ट के चलते 75 साल की उम्र में गोवा में निधनआज सुबह-सुबह जब ऑफिस पहुंचा तो किसी साथी ने बताया नाना पाटेकर नहीं रहे. दो सेकंड तो समझने में लगे कि क्या मैंने सही सुना! खबर सही थी, आधी रात में उन्हें थोड़ी घबराहट हुई. दोस्त को मैसेज किया. तबीयत ज्यादा खराब हुई तो उनके गोवा वाले घर के नीचे एम्बुलेंस आई. मगर जिनका वक्त आ जाता है, उन्हें तो जाना ही होता है. नाना अब हमारे बीच नहीं हैं. मेरी उनसे कभी कोई मुलाकात तो नहीं हुई, लेकिन फिर भी वह ‘अपने’ से लगते थे. जाने-पहचाने लगते थे. लग रहा है कि जैसे हमारे किसी पारिवारिक सदस्य का देहांत हो गया.
रील नहीं रियल लाइफ के हीरो थे नानान सुंदर चेहरा, न मंझे हुए डांसर और न ही टाइट बॉडीबिल्डर सरीखा शरीर. वह तथाकथित ‘हीरो’ वाले किसी पैरामीटर में फिट नहीं बैठते थे. इसके बावजूद अकेले अपने दम पर हॉल तक दर्शक खींचकर लाने की क्षमता रखते थे. हर आम आदमी नाना पाटेकर से कनेक्ट करता था और यही उनकी एक्टिंग की सबसे बड़ी ताकत थी. वह बेधड़क सच बोलते थे. किसी से नहीं डरते थे. नाना पाटेकर के फिल्मों में भी उनकी असल जिंदगी की यही झलक दिखती थी.
वह गुस्सैल पुलिसवाले भी और क्यूट उदय शेट्टी भी‘अंकुश’ के गुस्सैल युवा से लेकर ‘क्रांतिवीर’ के बागी प्रताप और अर्ध सत्य के बेखौफ पुलिस अफसर से लेकर तिरंगा के इंस्पेक्टर शिवाजीराव वागले तक, नाना ने पर्दे पर बार-बार उस आदमी को जिया जो सिस्टम के आगे झुकने को तैयार नहीं था. सत्ता से लड़ जाना मानो उनका शगल था. उन्होंने कई फिल्मों में ईमानदार पुलिस वाले का रोल निभाया. जो भ्रष्ट नेता और पुलिस प्रशासन को उखाड़कर फेंकना चाहता था. करियर के उत्तरार्ध में ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों से अपनी कॉमिक टाइमिंग भी दिखाई और बताया कि वह हंसाना भी जानते हैं.
नाना पाटेकर कारगिल युद्ध के दौरान 60 दिन तक सेना में तैनात रहे थे. (फोटो-सोशल मीडिया)
मराठी फिल्मों के पहले सुपरस्टारनाना पाटेकर मराठी फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार थे. माधुरी दीक्षित, स्मिता पाटिल जैसी मराठी एक्ट्रेसेज को तो पूरा बॉलीवुड जानता है, लेकिन मेल एक्टर्स में नाना के इर्द-गिर्द कोई दूसरा मराठी एक्टर नजर नहीं आता. वह रंगमंच के मंझे हुए कलाकार थे. थिएटर बैकग्राउंड से आते थे. नाना पाटेकर की संजीदा भाव-भंगिमा और जोशीली डायलॉग डिलिवरी से पूरा टॉकीज सीटी-तालियों से गूंज उठता था.
रुपहले पर्दे पर वह अक्सर बागी शख्स का रोल अदा किया करते.
विश्वनाथ पाटेकर कैसे बने नानाकिसी ने नहीं सोचा था कि 1 जनवरी को महाराष्ट्र के रायगढ़ में पैदा हुए विश्वनाथ पाटेकर आगे चलकर बॉलीवुड के प्यारे ‘नाना’ हो जाएंगे. अपने करियर में नाना ने 100 से ज्यादा फिल्में की. नेशनल अवॉर्ड से नवाजे गए. फिल्म फेयर पुरस्कार मिला. मगर वह सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी हीरो ही थे. समाजसेवा करते. किसानों की मदद करते. अनाथ लड़कियों की शादी करवाते. 2013 में उन्हें पद्मश्री मिला. चाहे पक्ष हो या विपक्ष हर राजनैतिक पार्टी में उनके दोस्त थे. शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे उन्हें बेहद पसंद करते थे.
आज सिर्फ एक बॉलीवुड एक्टर का निधन नहीं हुआ बल्कि देश ने अपना ऐसा बेटा खो दिया, जो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझता और अभी बहुत कुछ लौटाना चाहता था.
About the AuthorAnshul TalmaleDeputy News Editor
अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रे…
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New Delhi,Delhi
First Published :
October 08, 2026, 11:20 IST



