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उंगलियों के जादू से दुनिया को बनाया दीवाना, 12 की उम्र में किया पहला सोलो शो, अमजद अली खान बन बैठे ‘सरोद सम्राट’

Last Updated:October 09, 2026, 05:02 IST

भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनियाभर में नई पहचान दिलाने वाले उस्ताद अमजद अली खान सरोद सम्राट कहा जाता है. ग्वालियर के मशहूर संगीत घराने में जन्मे अमजद अली खान ने महज 12 साल की उम्र में अपना पहला सोलो परफॉर्मेंस देकर संगीत जगत को हैरान कर दिया था. पिता उस्ताद हाफिज अली खान से विरासत में मिली इस विद्या को उन्होंने न सिर्फ संवारा, बल्कि सरोद वादन में नई तकनीक जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया.

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नई दिल्ली. भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में कुछ नाम ऐसे दर्ज हैं, जिन्होंने अपनी कला से न केवल एक युग को परिभाषित किया, बल्कि भारतीय संगीत को वैश्विक पटल पर भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. इन्हीं दिग्गजों में से एक हैं उस्ताद अमजद अली खान. सरोद के तारों को जब भी उनकी उंगलियां छूती हैं, तो उससे केवल सुर नहीं निकलते, बल्कि एक अटूट मिठास का अहसास होता है. अपनी अनूठी और असाधारण वादन शैली के बल पर ही उन्हें संगीत जगत में ‘सरोद सम्राट’ की उपाधि से नवाजा गया.

9 अक्टूबर 1945 को मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी ग्वालियर में जन्मे अमजद अली खान को संगीत की विरासत विरासत में मिली थी. वह ग्वालियर राजघराने के मशहूर दरबारी संगीतकार उस्ताद हाफिज अली खान के सबसे छोटे बेटे हैं. घर का माहौल शुरू से ही संगीत से सराबोर रहता था, जिसके चलते अमजद अली खान के हाथ में बहुत ही छोटी उम्र में सरोद आ गया.

पिता से सीखीं सरोद वादन की बारीकियां

पिता की देखरेख में उन्होंने सरोद वादन की बारीकियों को सीखना शुरू किया. उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 12 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला सोलो परफॉर्मेंस देकर सबको हैरान कर दिया था.

उस्ताद अमजद अली खान .

देश-विदेश में गूंजा उस्ताद अमजद अली खान का नाम

जैसे-जैसे समय बीता, उस्ताद अमजद अली खान ने पारंपरिक बंदिशों को बरकरार रखते हुए सरोद वादन में अपनी एक नई तकनीक विकसित की. उनका संगीत देश के अलग-अलग हिस्सों में गूंजा. इसके अलावा उन्होंने दुनिया के कई मंचों पर भारतीय शास्त्रीय संगीत को प्रस्तुत किया. विदेशी लोगों के बीच भी उन्होंने सरोद को पहचान दिलाया है. उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों को भी संगीत की शिक्षा दी और अलग-अलग विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम किया.

अमजद अली खान को मिले कई सम्मान

संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने उन्हें सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा है. उन्हें 1970 में यूनेस्को अवार्ड, 1975 में पद्म श्री, 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1991 में पद्म भूषण और 2001 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और कई नामी विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधियां भी प्रदान की गईं.

About the AuthorKamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …

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October 09, 2026, 05:02 IST

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