3 साल से टंकी तैयार, फिर भी प्यासे ग्रामीण, सवाई माधोपुर के शेरपुर में इन मुद्दों पर होगा पंचायत चुनाव

सवाई माधोपुर. राजस्थान में आगामी पंचायत राज चुनाव को लेकर गांवों में सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं. सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख के चुनावों को लेकर संभावित दावेदारों ने जनसंपर्क शुरू कर दिया है. गांवों की चौपालों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक चुनावी चर्चाओं का दौर चल रहा है. ग्रामीण भी अपनी पसंद के जनप्रतिनिधि चुनने और गांव के विकास को लेकर उम्मीदें लगाए बैठे हैं. इस बीच पंचायतों में पिछले कार्यकाल के विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चर्चा का विषय बन रही है. ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कितने गंभीर रहते हैं.
सवाई माधोपुर जिले की शेरपुर ग्राम पंचायत में भी चुनावी माहौल के बीच विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की राय सामने आ रही है. यहां कुछ ग्रामीण पूर्व सरपंच के कार्यकाल से संतुष्ट नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क, नाली और पेयजल जैसी समस्याएं अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं. खासकर रामसिंहपुरा गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी से अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं होने का मुद्दा ग्रामीणों के बीच चर्चा में है. ऐसे में आगामी चुनाव में विकास और बुनियादी सुविधाएं मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकती हैं.
परिसीमन के बाद तीन गांवों को मिली पंचायत में जगह
शेरपुर ग्राम पंचायत को पहले खिलचीपुर के नाम से पहचाना जाता था. परिसीमन के बाद रामसिंहपुरा और कुतलपुरा गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है. वर्तमान में पंचायत में करीब 3600 मतदाता हैं. आगामी पंचायत राज चुनाव में इन मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है. गांवों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं और दावेदार मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं.
पूर्व सरपंच के काम से ग्रामीण संतुष्ट
शेरपुर ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच ओमप्रकाश सैनी के कार्यकाल को लेकर कई ग्रामीण संतुष्टि जताते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव की समस्याओं को लेकर सरपंच के स्तर पर सुनवाई होती रही है. हालांकि, उनका यह भी कहना है कि प्रधान, जिला प्रमुख और अन्य जनप्रतिनिधियों की गांव में मौजूदगी कम दिखाई देती है. ग्रामीणों की अपेक्षा है कि चुनाव के बाद चुने जाने वाले जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में गांव की समस्याओं पर ध्यान दें. सवाई माधोपुर पंचायत समिति में पूर्व में कांग्रेस की निरमा मीणा प्रधान रह चुकी हैं, जबकि जिला प्रमुख का पद भी कांग्रेस की सुदामा मीणा संभाल चुकी हैं. अब आगामी चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं.
सड़कें बनीं, लेकिन नालियों के अभाव में गंदगी
रामसिंहपुरा गांव में विकास कार्यों के साथ बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं. ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सड़कों का निर्माण हुआ है, लेकिन कई जगह नालियों की व्यवस्था नहीं होने से गंदा पानी जमा हो जाता है. इससे आसपास गंदगी फैलती है और बीमारियों का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण के साथ नालियों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि जलभराव और गंदगी की समस्या से राहत मिल सके.
तीन साल से बनी पानी की टंकी, अब तक शुरू नहीं हुई सप्लाई
रामसिंहपुरा गांव में जल जीवन मिशन के तहत करीब तीन साल पहले पानी की टंकी बनाई गई थी, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, अब तक इससे जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है. गांव में पानी के कनेक्शन भी नहीं दिए गए हैं. ऐसे में लाखों रुपये की लागत से बनी टंकी उपयोग में नहीं आ रही है. ग्रामीणों के मन में सवाल है कि जब टंकी का निर्माण हो चुका है, तो पेयजल आपूर्ति शुरू करने में देरी क्यों हो रही है. अब आगामी पंचायत राज चुनाव में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेरपुर ग्राम पंचायत के मतदाता किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं. क्या पेयजल, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल चुनावी चर्चा के केंद्र में रहेंगे या मतदाता किसी नए नेतृत्व पर भरोसा जताएंगे, इसका फैसला आने वाला चुनाव करेगा.



