Pushkar Mela: कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर सरोवर में स्नान क्यों है खास? जानिए ब्रह्माजी के यज्ञ और 33 करोड़ देवी-देवताओं से जुड़ी पौराणिक मान्यता

Last Updated:October 11, 2026, 10:55 IST
Pushkar Mela 2026: राजस्थान के अजमेर स्थित तीर्थराज पुष्कर में देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक 5 दिनों का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पांच दिनों में ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ किया था और 33 करोड़ देवी-देवता पुष्कर सरोवर में स्नान करने आते हैं. इसी आस्था के चलते देशभर से श्रद्धालु पुष्कर पहुंचकर पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते हैं. यह मेला न केवल राजस्थान की लोक संस्कृति का अनूठा संगम है, बल्कि आध्यात्मिक शांति और पुण्य प्राप्ति का एक बहुत बड़ा अवसर भी माना जाता है.
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अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित तीर्थराज पुष्कर अपनी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक इतिहास के लिए पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है. इसे सभी तीर्थों का गुरु या तीर्थराज कहा जाता है. यहां हर साल कार्तिक महीने में आयोजित होने वाला विशाल पुष्कर मेला न केवल देश बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र रहता है. लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के मेले का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू पुष्कर सरोवर से जुड़ी धार्मिक आस्था है. हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने में देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक के पांच दिनों की अवधि को अत्यधिक पवित्र और विशेष पुण्यदायी माना गया है. आइए जानते हैं कि आखिर इन पांच दिनों में पुष्कर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु क्यों उमड़ते हैं.
पुष्कर मेले की इस प्राचीन और धार्मिक परंपरा के पीछे सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा से जुड़ी एक बहुत ही महत्वपूर्ण पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है. पुष्कर के जाने-माने पुजारी जयंत राजगुरु बताते हैं कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने इसी पवित्र स्थान पर सृष्टि की भलाई के लिए एक महान यज्ञ का आयोजन किया था. यह महायज्ञ देवउठनी एकादशी के दिन शुरू हुआ था और ठीक पांच दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन इसका समापन हुआ था. इसी वजह से देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक के इन पांच दिनों का विशेष धार्मिक महत्व है. यही कारण है कि इन पांच दिनों के दौरान पुष्कर में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अचानक कई गुना बढ़ जाती है और पूरा का पूरा तीर्थ क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों, मंत्रोच्चारण और भजनों की गूंज से पूरी तरह गुलजार हो उठता है.
33 करोड़ देवी-देवताओं के पुष्कर सरोवर में स्नान की मान्यतापुष्कर आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र यहां का पवित्र पुष्कर सरोवर है. पुजारी जयंत राजगुरु ने आगे बताया कि ऐसी गहरी धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक के इन पांच दिनों में स्वर्ग से 33 करोड़ देवी-देवता भी धरती पर उतरते हैं. ये सभी देवी-देवता इन विशेष दिनों में स्वयं पुष्कर सरोवर में स्नान करने और ब्रह्माजी के यज्ञ में शामिल होने के लिए पुष्कर पधारते हैं. सदियों से चली आ रही इसी अटूट आस्था और विश्वास के चलते आम श्रद्धालु भी इन पांच दिनों में पुष्कर सरोवर के 52 अलग-अलग घाटों पर पहुंचते हैं. वे पवित्र सरोवर के जल में आस्था की डुबकी लगाते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इन दिनों पुष्कर सरोवर में स्नान करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
आध्यात्म और लोक संस्कृति का एक अनूठा संगमपुष्कर स्नान और यहां का यह पांच दिवसीय मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है. यह पुण्य और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का एक बहुत ही विशेष और पवित्र अवसर माना जाता है. दूसरी ओर, पुष्कर का यह मेला धार्मिक मान्यताओं, प्राचीन परंपराओं और रंग-बिरंगी राजस्थानी लोक संस्कृति का एक बेहद अनूठा और खूबसूरत संगम भी प्रस्तुत करता है. जहां एक तरफ विदेशी और देसी पर्यटक यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पशु मेले, ऊंट दौड़ और राजस्थानी लोक कलाओं की रौनक देखने पहुंचते हैं. वहीं दूसरी तरफ आम श्रद्धालुओं के लिए इसका सबसे बड़ा महत्व पुष्कर सरोवर में स्नान और भगवान ब्रह्मा के दर्शन से जुड़ी गहरी आस्था से है. यही वह अद्भुत धार्मिक परंपरा है, जो पुष्कर मेले को दुनिया के बाकी सभी मेलों से एकदम अलग और एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Ajmer,Ajmer,Rajasthan
First Published :
October 11, 2026, 10:53 IST



