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1200 साल पुराने तनोट माता मंदिर में गूंजे जयकारे, पहले दिन 20 हजार से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन

Last Updated:October 11, 2026, 20:26 IST

Tanot Mata Mandir News: जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित प्रसिद्ध तनोट राय मंदिर में घट स्थापना के साथ नवरात्र मेले का शुभारंभ हुआ. पहले दिन 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने तनोट माता के दर्शन किए. मंदिर में शोभायात्रा, हवन और आरती का आयोजन हुआ. बीएसएफ की 26वीं बटालियन ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन, चिकित्सा और दर्शन की व्यवस्थाएं कीं. सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए.

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Amazon Prime DayTop Deals Inside1200 साल पुराने तनोट माता मंदिर में गूंजे जयकारे, BSF जवानों ने संभाली दर्शनZoomतनोट माता मंदिर में नवरात्र मेले का आगाज

जैसलमेर:  सीमावर्ती जैसलमेर से लगती भारत पाकिस्तान की सीमा के निकट स्थित 1200 वर्ष पुराने विश्व प्रसिद्ध तनोट राय मंदिर में रविवार को घट स्थापना के साथ 10 दिवसीय नवरात्र मेले का शुभारंभ हुआ. नवरात्र के अवसर पर चमत्कारी मंदिर के नाम से विख्यात तनोट माता मंदिर में पहले दिन घट कलश की स्थापना ढोल धमाके से के साथ कि गयी, इस दौरान बाकयदा एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन माता मंदिर तक किया गया, इसके बाद में मंदिर प्रांगण में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया. इस दौरान बीएसएफ की 26वीं बटालियन के कमांडेंट लिन्जकाई सितलऊ सहित कई अधिकारियों और जवानो ने इसमे हिस्सा लिया व आहुतियां दी. हवन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया.

इस अवसर BSF 26 वी वाहनी के 2IC मदन गोयल, 2IC दीपांकर शर्मा, डिप्टी कमांडेंट, अनमोल भगत व सुशील कुमार सहित BSF के कई अधिकारी जवान मौजूद थे. आज नवरात्रि के पहले दिन देश के कोने कोने से हजारों की तादात में श्रद्धालु उमड़े हुए थे, रविवार को प्रथम दिन तनोट माता की 3 आरतियों का आयोजन किया गया, नवरात्रि के सभी दिनों में 3 आरतियों का आयोजन किया जायेगा तथा प्रतिदिन माता के प्रसाद के रूप में सुबह से शाम तक भंडारे का आयोजन किया जा रहा है.

माता के दर्शन कर सुख शान्ति की कामना कीबीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के आईजी के मार्गदर्शन और बीएसएफ सेक्टर नॉर्थ के डीआईजी जितेंद्रसिंह बिंजी के निर्देशन में BSF 26वीं वाहिनी द्वारा तनोट नवरात्रि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर दर्शन व अन्य सभी व्यस्थाये की जा रही हैं. असल में जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर तनोट क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है है आज भी प्रथम दिन करीब 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने तनोट माता के दर्शन कर सुख शान्ति की कामना की.

मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया नवरात्र के अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और रोशनी से जगमग किया गया है. मंदिर के बाहर एक बड़ी LCD स्क्रीन भी लगाई गई है ताकि भारी भीड़ होने पर श्रद्धालु माता के दर्शन व आरती के दर्शन कर सके. BSF जवान ही मंदिर की पुजारी है तथा मंदिर की देखरेख करने के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी कर रहे हैं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा व्यवस्थाएं भी की गई हैं. बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि नौ दिवसीय मेले की शुरुआत हो चुकी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है. सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक इंतजाम किए गए हैं. देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और माता के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है.

बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा अधिकारियों के अनुसार, मंदिर के प्रति बढ़ती आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर के आसपास दुकानें भी लगाई गई हैं सीमावर्ती क्षेत्र होने और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. बीएसएफ के जवानों के साथ पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है. इसी क्रम में घंटियाली माता मंदिर में भी घट स्थापना की गई, जहां श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां अर्पित की श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है.

पाकिस्तान की ओर से मंदिर क्षेत्र में सैकड़ों बम दागे गौरतलब है तनोट माता मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं और सुरक्षा बलों की गहरी आस्था का कारण वर्ष 1965 और 1971 के युद्धों से जुड़ी मान्यताएं हैं मान्यता है कि युद्ध के दौरान पाकिस्तान की ओर से मंदिर क्षेत्र में सैकड़ों बम दागे गए थे, लेकिन इनमें से कोई भी मंदिर परिसर में नहीं फटा. इससे सीमा क्षेत्र के ग्रामीणों और जवानों की आस्था माता के प्रति और मजबूत हो गई वर्ष 1965 के युद्ध के बाद सेना और बीएसएफ के जवानों ने मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा विकसित की और मंदिर का निर्माण एवं विकास करवाया.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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Jaisalmer,Rajasthan

First Published :

October 11, 2026, 20:26 IST

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