National

Neha Bora and Rahul Gandhi News: कन्हैया कुमार का कांग्रेस में खेल खत्म, अब नेहा बोरा बनेंगी राहुल-प्रियंका गांधी की टीम में वामपंथ का नया चेहरा?

कांग्रेस में कन्हैया कुमार का खेल खत्म हो चुका है. अब राहुल गांधी को उनमें खास भरोसा नहीं रहा है. अब कांग्रेस नेहा वोरा के रूप में वामपंथ के नये युवा चेहरे को लाने की तैयारी कर चुकी है. ये तमाम बातें 12 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली की सड़कों पर दिखी तस्वीर के बाद होने लगी है. दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 6 अक्टूबर से ही एसआईआर में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन में लगे हैं. 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को छोड़ दें तो हरेक दिन राहुल गांधी ही दिल्ली में धरना और मार्च का नेतृत्व करते हुए देखे जा रहे हैं.

चेन्नई में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए दो दिन का ब्रेक लेकर एक बार फिर से दिल्ली लौटे राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को एक बार फिर से कथित वोट चोरी के खिलाफ भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को याचिका सौंपने के नाम पर पैदल मार्च करने निकले. हालांकि पूरे मार्च के दौरान राहुल गांधी बमुश्किल थोड़ी दूर चले होंगे. मार्च में ज्यादातर समय वह वयोवृद्ध कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ लग्जरी बस में ही बैठे दिखे.

राहुल ने नेहा को विपक्षी नेताओं के बराबर दी इज्जत

लेकिन राहुल गांधी बहन प्रियंका के साथ जितनी दूर भी पैदल मार्च करते दिखे उस दौरान उनके सबसे नजदीक AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा नजर आईं. मार्च के दौरान कभी प्रियंका तो कभी राहुल गांधी नेहा के कंधों पर हाथ रखकर उन्हें प्रोत्साहित करते दिखे. राहुल गांधी जब मार्च में खुली ट्रक में सवार हुए तब उनके साथ अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत, प्रियंका गांधी, डीके शिवकुमार, धर्मेंद्र यादव सरीखे बड़े-बड़े नेता साथ खड़े दिखे. इन सबके साथ नेहा वोरा भी उसी ट्रक पर वामपंथ का प्रतिनिधित्व करती दिखीं. पूरे मार्च के दौरान नेहा वोरा पूरे उत्साह के साथ अकेली AISA का झंडा बुलंद करती दिखीं.

कांग्रेस के एक नेता से जब इस तस्वीर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा- ‘राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया था कि यह मार्च भगवान शंकर बारात की तरह है, इसमें जो चाहे वो हिस्सा ले सकता है. किसी के आने पर कोई बाध्यता नहीं है. ऐसे में वहां नेहा वोरा की मौजूदगी को लेकर सवाल पूछना ही गलत है.’

कन्हैया लापता और नेहा बनीं राहुल के आंखों का तारा

एसआईआर और सीईसी के खिलाफ राहुल गांधी के लगातार प्रदर्शन से युवा नेता कन्हैया कुमार पूरी तरह लापता हैं. जबकि राहुल गांधी के तमाम प्रदर्शनों में यूथ कांग्रेस (NSUI) के झंडे प्रमुखता से लहरात हुए देखे जा रहे हैं. 12 अक्टूबर के मार्च में भी काफी संख्या में यूथ कांग्रेस के झंडे देखे गए, लेकिन कन्हैया कुमार पूरी गायब दिखे. जानकारी के लिए बता दूं कि कन्हैया कुमार इस वक्त कांग्रेस में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) के राष्ट्रीय प्रभारी (AICC In-charge) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कन्हैया से क्यों उठा राहुल का भरोसा?

कांग्रेस से जुड़े लोग बताते हैं कि कन्हैया कुमार के प्रति राहुल गांधी का भरोसा पहले ही घटता जा रहा था. रही सही कसर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में निकल गई. एक तरफ राहुल गांधी देशभर में घूमघूमकर युवाओं को कांग्रेस के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, दूसरी तरफी डूसू चुनाव में NSUI की बुरी तरह हार हुई. केंद्रीय पैनल के 4 में से 3 मुख्य पदों पर बीजेपी की छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कब्जा जमाया. एक पद पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन NSUI को इन चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा और वह कोई भी सीट नहीं जीत पाई। इस हार के बाद बताया जाता है कि कन्हैया कुमार से राहुल गांधी खासे आशाविहीन हो गए हैं. इसलिए राहुल गांधी के हालिया धरना प्रदर्शनों से वह पूरी तरह गायब दिखे हैं.

राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा में कन्हैया कुमार कई मौकों पर प्रमुखता से नजर आते रहे

हर भरोसे पर फेल होते रहे हैं कन्हैया कुमार

याद करा दें कि साल 2016 में 2001 के संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरू की फांसी की बरसी पर जेएनयू में देशविरोधी नारे लगे थे. उस दौरान कन्हैया कुमार JNU छात्र संघ (JNUSU) के अध्यक्ष थे. वह जेल भी गए, खूब सुर्खियों में रहे. कन्हैया वामपंथियों छात्र विंग अखिल भारतीय छात्र महासंघ (AISF) से जुड़े रहे. जेएनयू प्रकरण के बाद मिली प्रसिद्धि को भुनाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने उन्हें उनके गृह जिले बेगूसराय से 2019 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा दिया. हालांकि वह हार गए, जिसके कुछ दिन बाद ही वह वामपंथ का झंडा छोड़ कांग्रेस में आ गए. शुरुआत में राहुल गांधी उन्हें पार्टी की सबसे बड़ी ईकाई कांग्रेस कार्य समिति में भी ले आए. लेकिन कन्हैया टीवी चैनलों के इंटरव्यू में सुर्खियां बंटोरने के अलावा कुछ ज्यादा कर नहीं पाए. बिहार के चुनाव में उन्हें आरजेडी की वजह से ज्यादा कुछ करने का मौका ही नहीं दिया गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के मनोज तिवारी के खिलाफ मैदान में उतारा गया, वहां भी वह हार गए.

नेहा वोरा वामपंथ से ज्याद राहुल गांधी के करीब दिख रहीं

दूसरी तरफ नेहा वोरा उभरती हुई नेता हैं. सीजेपी का प्रोटेस्ट हो या अकेले 2 अक्टूबर को सीईसी के खिलाफ जंतर मंतर पर लोगों को जुटाने की बात, नेहा हर मोर्चे पर खड़ी दिखीं. सोशल मीडिया पर उनकी तमाम ऐसे वीडियो वायरल हैं जिसमें नेहा पुलिस प्रशासन के सामने संघर्ष करती दिख रही हैं. सबसे पहले नेहा वोरा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आई थीं. पिछले दिनों वह छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी के साथ हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी दिखीं थीं.

नेहा वोरा भले ही वामपंथ के छात्र विंग ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी हैं और इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वह भी जेएनयू से रिसर्च कर रही हैं. लेकिन हालिया दिनों की तस्वीरों को देखें तो वह राहुल गांधी के ज्यादा करीब देखी जाती रही हैं. नेहा मूलरूप से उत्तराखंड के खटीमा से हैं. जिस तरह कन्हैया भूमिहार समाज से आते हैं, वहीं नेहा वोरा भी सवर्णों में राजपूत जाति से हैं. पिता फौजी रहे, इसलिए भले ही नेहा के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला, लेकिन उनकी शिक्षा कन्हैया कुमार के मुकाबले कहीं रिफाइंड नजर आती है. कन्हैया की लगभग पूरी शिक्षा सरकारी तंत्र के भरोसे रही है. नेहा वोरा अब तक किसी बड़े विवाद में नहीं फंसी हैं, वहीं कन्हैया आज भी टीवी स्टूडियो में जब भी बहस के लिए बैठते हैं तो बीजेपी के लोग उन्हें देशद्रोही नारे लगाने वाला कह ही देते हैं.

इन तमाम बातों को देखते हुए चर्चा शुरू हो गई है कि अभी तो नेहा वोरा छात्र संगठन की राजनीति कर रही हैं. जब वह मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में आना चाहेंगी तो क्या वह भी कन्हैया कुमार की तरह कांग्रेस का दामन थामेंगी. खासकर वह जिस तरह से राहुल गांधी से नजदीकी दर्शाने की कोशिश में दिखती हैं उसे देखकर यह अटकलें तेज है.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj