1000 साल पुराना मंदिर, औरंगजेब का आक्रमण और भंवरों का चमत्कार… जानिए जीणमाता धाम की अनोखी दास्तान

Last Updated:October 12, 2026, 10:31 IST
Jeen Mata Sikar History: सीकर की अरावली पहाड़ियों में स्थित जीणमाता धाम आस्था और इतिहास का प्रमुख केंद्र है. नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला शुरू हो चुका है. लोककथा के अनुसार, औरंगजेब की सेना जब मंदिर तोड़ने आई थी, तब असंख्य भंवरों ने आक्रमण कर सेना को खदेड़ दिया था, जिससे मां को ‘भंवरों की देवी’ कहा जाने लगा. मंदिर के शिलालेख इसका प्राचीन इतिहास बयां करते हैं.
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Sikar: राजस्थान के सीकर जिले में अरावली की सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित जीणमाता धाम भारतीय धर्म, भक्ति और अद्भुत लोककथाओं का केंद्र है. यह पावन स्थल सदियों से श्रद्धालुओं के विश्वास और अटूट आस्था का प्रतीक रहा है. जीणमाता मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां हैं जो इसे अन्य धार्मिक स्थलों से अलग बनाती हैं. इनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा मुगल बादशाह औरंगजेब के आक्रमण और माता द्वारा अपने भक्तों की रक्षा करने से जुड़ी हुई है. इस चमत्कारिक घटना के कारण ही जीणमाता को ‘भंवरों की देवी’ के नाम से भी जाना जाता है. लोकगाथा और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान जब देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था, तब उसकी सेना सीकर के जीणमाता मंदिर को नष्ट करने के उद्देश्य से आगे बढ़ी. जब मुगल सैनिक मंदिर परिसर के करीब पहुंचे और उन्होंने मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया, तो मंदिर के पुजारियों और वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भय फैल गया.
संकट की इस घड़ी में सभी ने मिलकर जगदम्बा मां जीणमाता से रक्षा के लिए प्रार्थना की. कहते हैं कि भक्तों की पुकार सुनते ही मंदिर परिसर और आसपास की अरावली पहाड़ियों की गुफाओं से अचानक असंख्य भंवरों (मधुमक्खियों) का झुंड निकल आया. इन भंवरों ने पूरी ताकत के साथ औरंगजेब के सैनिकों पर धावा बोल दिया. भंवरों के इस भयानक हमले से सैनिकों में हड़कंप मच गया और वे दर्द से तड़पते हुए जान बचाकर भागने लगे. इस अद्भुत चमत्कार को देखकर औरंगजेब की पूरी सेना को पीछे हटना पड़ा. इस ऐतिहासिक घटना के बाद से ही माता को ‘भंवरों की देवी’ कहा जाने लगा. एक अन्य प्रचलित प्रसंग के अनुसार इस चमत्कार से प्रभावित होकर बाद में औरंगजेब ने मंदिर की अखंड ज्योति के लिए नियमित तेल भिजवाने की व्यवस्था की थी.
शिलालेखों में दर्ज जीणमाता मंदिर का प्राचीन इतिहासजीणमाता मंदिर केवल मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इतिहास अत्यंत प्राचीन और प्रामाणिक है. मंदिर परिसर में कई ऐतिहासिक शिलालेख मौजूद हैं जो इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं. अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मंदिर परिसर में करीब आठ प्रमुख शिलालेख मिले हैं. इनमें सबसे प्राचीन शिलालेख विक्रम संवत 1029 यानी लगभग 972 ईस्वी का माना जाता है. इसके अतिरिक्त मंदिर में संवत 1132 और संवत 1162 के शिलालेख भी देखने को मिलते हैं. संवत 1162 (1105 ईस्वी) के अभिलेख में प्रसिद्ध चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम के शासनकाल का उल्लेख मिलता है. कुछ अन्य ऐतिहासिक विवरणों में यह भी बताया जाता है कि मोहिल वंश से संबंधित हट्टड़ या हन्ड नामक व्यक्ति ने इस विशाल मंदिर का पुनर्निर्माण या निर्माण करवाया था. यह शिलालेख इस बात को साबित करते हैं कि यह धाम एक हजार साल से भी अधिक पुराना है.
शारदीय नवरात्र मेला और मैया का दिव्य श्रृंगारवर्तमान में जीणमाता धाम में शारदीय नवरात्र का नौ दिवसीय भव्य मेला बड़ी धूमधाम के साथ चल रहा है. नवरात्र के पावन अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने और अपनी मन्नतें मांगने सीकर पहुंचते हैं. मेले के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी के रूप में मैया का भव्य श्रृंगार किया गया है. मंदिर के मुख्य पुजारी भवानी शंकर शर्मा ने बताया कि मैया का यह स्वरूप भक्तों को तपस्या, संयम, नियम और आत्मबल की प्रेरणा देता है. इस बार नवरात्र उत्सव को खास बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के कन्नौज से विशेष रूप से मंगाए गए केसरिया इत्र का उपयोग मैया के श्रृंगार में किया गया है. इसके साथ ही कन्नौज के प्राकृतिक सुगंधित फूलों और पांच अलग-अलग सुंदर पोशाकों से माता का दरबार भव्य रूप से सजाया गया है. मंदिर प्रबंधन द्वारा मैया को ताजे फलों और मेवों का भोग अर्पित किया गया है. पूरा मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज रहा है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
October 12, 2026, 10:31 IST



