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Diabetes: डबल डायबिटीज क्या है? डॉक्टर से जानें टाइप 1 और टाइप 2 से कैसे अलग है ये बीमारी

डायबिटीज बहुत ही कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम है और सबसे ज्यादा नजरअंदाज किए जाने वाली कंडीशन भी. ज्यादातर लोग इसके इसके दो टाइप के बारे में ही जानते हैं- टाइप 1 और टाइप 2. टाइप 1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनना बहुत कम हो जाता है या लगभग बंद हो जाता है, जबकि टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता.लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों में टाइप 1 डायबिटीज के साथ टाइप 2 से जुड़ी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं?

साकेत स्थित मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अंशु आलोक बताते हैं कि इस स्थिति को डबल डायबिटीज कहा जाता है. इसमें शरीर को इंसुलिन की कमी के साथ-साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या का भी सामना करना पड़ता है. ऐसे में ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है और इंसुलिन की अधिक जरूरत पड़ सकती है. आइए जानते हैं कि डबल डायबिटीज क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इसका इलाज कैसे किया जाता है.

टाइप 1-2 से कैसे अलग है डबल डायबिटीजएक्सपर्ट बताते हैं कि टाइप 1 डायबिटीज में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज की उन कोशिकाओं पर हमला करता है, जो इंसुलिन बनाती हैं. ऐसे लोगों को ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से इंसुलिन लेना जरूरी होता है. वहीं, टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाता है. इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं. लेकिन डबल डायबिटीज में टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी विकसित हो जाता है. यानी शरीर को इंसुलिन की जरूरत बनी रहती है, लेकिन उसका असर कम हो सकता है.

किन लोगों को है इसका खतरा?टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में पेट के आसपास ज्यादा फैट जमा होना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खान-पान और परिवार में टाइप 2 डायबिटीज का इतिहास जोखिम बढ़ा सकते हैं. हालांकि, यह समस्या केवल अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है.

किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?डॉक्टर की सलाह के अनुसार इंसुलिन लेने के बावजूद ब्लड शुगर लगातार बढ़ा रहना एक संकेत हो सकता है. इसके अलावा कमर का घेरा बढ़ना, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना या गर्दन के आसपास की त्वचा का काला पड़ना भी इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है. हालांकि, केवल इन संकेतों के आधार पर डबल डायबिटीज की पुष्टि नहीं की जा सकती. जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

कैसे किया जाता है इलाज?एक्सपर्ट बताते हैं कि डबल डायबिटीज में इंसुलिन लेना बंद नहीं किया जा सकता. डॉक्टर ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार इंसुलिन की खुराक और भोजन के साथ उसके इस्तेमाल का दोबारा आकलन कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर इंसुलिन पंप या लगातार ब्लड शुगर की निगरानी करने वाले उपकरण भी मददगार हो सकते हैं.संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और जरूरत के अनुसार वजन नियंत्रित रखना भी फायदेमंद हो सकता है.

जल्दी पहचान क्यों है जरूरी?डबल डायबिटीज में ब्लड शुगर कंट्रोल करना कठिन हो सकता है. इससे हृदय संबंधी बीमारियों और डायबिटीज से जुड़ी अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और किडनी की नियमित जांच जरूरी है.

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