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Health Tips : घबराहट से लेकर ब्लोटिंग तक…मेनोपॉज के दौरान क्यों बढ़ जाती हैं ये दिक्कतें? अंबाला की डॉक्टर से जानें बचाव

अंबाला. महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) एक ऐसा पड़ाव है, जब शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं. आमतौर पर मेनोपॉज 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है. हालांकि कुछ महिलाओं में इसके लक्षण इससे पहले भी दिखाई दे सकते हैं. इस दौरान केवल पीरियड्स का बंद होना ही बदलाव नहीं है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है. यही वजह है कि इस उम्र में महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है. मेनोपॉज की प्रक्रिया में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव होता है. आखिरी पीरियड्स के आसपास और उसके बाद कुछ महिलाओं को लक्षणों में तेजी से बदलाव महसूस हो सकता है. हालांकि, हर महिला का अनुभव अलग होता है और सभी में लक्षण एक जैसे नहीं होते.

होता क्या-क्या है

लोकल 18 से अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता बताती हैं कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह की समस्याएं हो सकती हैं. इस दौरान घबराहट, चिड़चिड़ापन, पेट में भारीपन, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं. कुछ महिलाओं को ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं, जिनकी स्थिति के अनुसार जांच और उपचार जरूरी है.

क्या खाना जरूरी

डॉ. रजिता के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान जीवनशैली और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है. महिलाओं को अपनी डाइट में प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए. हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और सलाद का सेवन भी फायदेमंद हो सकता है. शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना जरूरी है. महिलाएं अपनी जरूरत और स्वास्थ्य के अनुसार पानी के साथ नारियल पानी, नींबू पानी और लस्सी जैसे पेय पदार्थ भी ले सकती हैं. संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या से सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

डॉ. रजिता बताती हैं कि मेनोपॉज के दौरान मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन महसूस होने पर योग, ध्यान और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश भी जरूरी है. हालांकि, लगातार घबराहट, नींद की परेशानी या दूसरे गंभीर लक्षणों को केवल मेनोपॉज का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. रजिता के मुताबिक होम्योपैथिक ओपीडी में मेनोपॉज से संबंधित समस्याओं वाली महिलाएं भी पहुंचती हैं और लक्षणों के आधार पर उन्हें उपचार दिया जाता है. कुछ महिलाओं में लक्षणों की गंभीरता के अनुसार डॉक्टर हार्मोन थेरेपी या अन्य उपचार पर विचार कर सकते हैं. हालांकि हार्मोन थेरेपी हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं होती. इसके फायदे और जोखिम का आकलन डॉक्टर की सलाह से किया जाना चाहिए.

ये कोई कोई बीमारी नहीं

डॉ. रजिता बताती हैं कि होम्योपैथिक दवाओं से मेनोपॉज के लक्षणों का प्रभावी उपचार होने के पर्याप्त उच्च-गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए किसी भी उपचार के लिए प्रमाण-आधारित चिकित्सा सलाह लेना जरूरी है. मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का प्राकृतिक पड़ाव है, कोई बीमारी नहीं. सही जानकारी, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सकीय सलाह के जरिए इस दौर में भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जिया जा सकता है.

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