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FIITJEE PMLA Case: – हिंदी

FIITJEE PMLA Case: केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने कोचिंग संस्थान FIITJEE लिमिटेड और उसके निदेशकों दिनेश कुमार गोयल एवं मोनिला गोयल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ईडी ने 15 अक्टूबर को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है. एजेंसी ने आरोपियों को दोषी ठहराने और जांच के दौरान जब्त व अस्थायी रूप से अटैच की गई 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है.

क्या है पूरा मामला?जांच एजेंसी ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश के नोएडा (Noida) और ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) तथा मध्य प्रदेश के भोपाल ( Bhopal, Madhya Pradesh) में दर्ज चार FIR के आधार पर शुरू की थी. दरअसल FIR में आरोप है कि FIITJEE ने JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दो से चार साल के कोचिंग प्रोग्राम के नाम पर प्रति छात्र 2.8 लाख रुपए 3.5 लाख रुपए तक की फीस अग्रिम रूप से ली थी. इसके साथ ही छात्रों को भरोसा दिया गया था कि उन्हें पूरे निर्धारित समय तक कोचिंग दी जाएगी, लेकिन शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के कारण फैकल्टी ने संस्थान छोड़ दिया और कई सेंटर बिना पूर्व सूचना के अचानक बंद कर दिए गए.

आरोप है कि फैकल्टी के संस्थान छोड़ने के बाद भी प्रबंधन नए छात्रों से फीस वसूलता रहा, जबकि उसे पता था कि कोचिंग कार्यक्रम पूरा कराना संभव नहीं होगा. नोएडा पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. इसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया गया है. पुलिस की चार्जशीट में करीब 300 पीड़ितों के बयान, कोचिंग सेंटर संचालकों और अन्य गवाहों के बयान, फीस की रसीदें तथा जांच के दौरान जुटाए गए अन्य साक्ष्य शामिल हैं.

32 सेंटर बंद, 14411 छात्रों की पढ़ाई प्रभावितजांच एजेंसी के मुताबिक ईडी की PMLA जांच में सामने आया कि FIITJEE ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच देशभर में 32 सेंटर अचानक बंद कर दिए. इससे संस्थान में नामांकित 14,411 छात्र प्रभावित हुए, जिन्हें फीस देने के बावजूद पूरी कोचिंग नहीं मिल सकी. जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी मार्च 2029 तक चलने वाले कोचिंग कार्यक्रमों के लिए भी छात्रों का दाखिला लेती रही, जबकि उसे पता था कि वह इन कार्यक्रमों को पूरा नहीं करा पाएगी. ED का आरोप है कि छात्रों से वसूली गई फीस का इस्तेमाल ऐसे समय में किया गया, जब कंपनी लगातार घाटे में चल रही थी. एजेंसी ने फीस के उस हिस्से को, जिसे कंपनी ने अपने पास रखते हुए कथित तौर पर दुरुपयोग किया, 85.79 करोड़ रुपये आंका है. ED के अनुसार, यह रकम इस मामले में अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) है.

निदेशकों ने वेतन के नाम पर लिए 24.92 करोड़ रुपएED की जांच में कंपनी के निदेशक दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को लेकर भी अहम जानकारी सामने आने का दावा किया गया है. जांच के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से आगे की अवधि में दोनों निदेशकों ने वेतन के रूप में कुल 24.92 करोड़ रुपये लिए ,ED के मुताबिक, गोयल परिवार के पास कंपनी की 86.31% हिस्सेदारी है. इस कारण निदेशकों ने बिना किसी स्वतंत्र निगरानी के अपने वेतन को मंजूरी दी.एजेंसी का आरोप है कि दूसरे कर्मचारियों के वेतन में देरी हो रही थी या उन्हें वेतन नहीं मिल रहा था, लेकिन निदेशकों ने पहले खुद को भुगतान किया.

जांच में दिनेश कुमार गोयल का मासिक वेतन करीब 56 लाख रुपए बताया गया है. वहीं, मोनिला गोयल का मासिक वेतन 25 लाख रुपए अधिक बताया गया है. ED के मुताबिक, उन्होंने स्वीकार किया था कि वह नियमित रूप से कार्यालय नहीं आती थीं और घर से ही चेक पर हस्ताक्षर करती थीं. एजेंसी का दावा है कि कोचिंग सेंटर बंद होने के दौरान भी मोनिला गोयल को भुगतान जारी रहा.

पहले भी ED ने की थी छापेमारीजांच एजेंसी ने इस मामले में 24 अप्रैल 2025 को सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान ₹10 लाख नकद और 4.86 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण जब्त किए गए थे.इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को एजेंसी ने PMLA के प्रावधानों के तहत 66.92 करोड़ रूपये संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं. अब 15 अक्टूबर 2026 को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर ईडी ने आरोपियों को दोषी ठहराने और 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है.

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