सबसे तेजी से बढ़ रहा ये कैंसर, 84% भारतीय लोगों को पता ही नहीं जांच हुई या नहीं, सर्वे में खुलासा

Last Updated:October 16, 2026, 15:37 IST
हाल ही में हुए एक नए सर्वे में खुलासा हुआ है कि तेजी से बढ़ रहे प्रोस्टेट कैंसर को लेकर 84 प्रतिशत भारतीयों को यह पता ही नहीं है कि उनकी जांच हुई है या नहीं. डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता की भारी कमी के कारण यह बीमारी खतरनाक रूप ले रही है. सबसे तेजी से बढ़ रहा ये कैंसर, 84% भारतीय लोगों को पता ही नहीं जांच हुई या नहीं, सर्वे में खुलासा.
कैंसर की बीमारियां आजकल तेजी से बढ़ रही हैं. एक कैंसर ऐसा भी है जो बेहद तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अचंभे की बात ये है कि 84 फीसदी लोगों को यह पता ही नहीं है कि कभी उनकी जांच हुई है या नहीं. हाल ही में हुए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर का इलाज तो तब होगा जब लोगों की स्क्रीनिंग होगी और लोगों को इस बीमारी का पता होगा.
हाल ही में 45 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के 1,036 पुरुषों पर किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि 10 में से 6 पुरुषों को यह पता नहीं है कि उनकी कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच हुई है या नहीं, जबकि 84% या तो ऐसे हैं जिनकी जांच नहीं हुई है, या वे अपनी जांच की स्थिति को लेकर ही अनिश्चित हैं. या फिर उन्हें लगता है कि जांच की जरूरत नहीं है. यही वजह है कि यह कैंसर लगातार खतरनाक बनता जा रहा है.
हील फाउंडेशन और साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग के मिलकर किए गए सर्वे में दिल्ली एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 45 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के पुरुषों को शामिल किया गया. सर्वेक्षण में पाया गया कि 68.9% पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के एक भी रिस्क कारक का नाम नहीं बता सके, जबकि केवल 13.2% ने पारिवारिक इतिहास को एक जोखिम कारक के रूप में पहचाना. वहीं लगभग 75% का मानना था कि प्रोस्टेट कैंसर की निगरानी केवल 50 वर्ष या उसके बाद शुरू होनी चाहिए.
इस बारे में मैक्स हेल्थकेयर, दिल्ली के मेडिकल ऑन्कोलॉजी वाइस प्रेसिडेंट डॉ देवव्रत आर्या ने कहा कि ये निष्कर्ष प्रोस्टेट कैंसर के संबंध में जागरूकता की एक बुनियादी कमी की ओर संकेत करते हैं. जब लगभग 10 में से 7 पुरुष एक भी जोखिम कारक की पहचान नहीं कर सकते हैं, और 10 में से 6 पुरुषों को यह पता नहीं है कि उनकी कभी जांच हुई है या नहीं, तो यह स्पष्ट है कि 45 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों के लिए प्रोस्टेट स्वास्थ्य को नियमित स्वास्थ्य संबंधी बातचीत का प्रमुख हिस्सा बनाने की जरूरत है. जोखिम, जांच और डॉक्टर से कब बात करनी चाहिए, इसके बारे में जागरूकता सूचित, व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल संबंधी निर्णयों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है.
सर्वे में ये बातें आईं सामने
. जांच में यह अंतर विशेष रूप से चिंताजनक है. लगभग दो-तिहाई उत्तरदाताओं ने बताया कि वे हर वर्ष सामान्य स्वास्थ्य जांच करवाते हैं.
. 60.8% को अपनी प्रोस्टेट कैंसर जांच की स्थिति के बारे में पता नहीं था और केवल लगभग छह में से एक पुरुष ने बताया कि उसकी कभी जांच हुई है.
. PSA (प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन) रक्त जांच के बारे में जागरूकता भी सीमित थी, जिसमें केवल 31% ने इस जांच के बारे में सुना था और केवल 14% ने कभी विशेष रूप से इसकी मांग की थी.
. सर्वेक्षण एक चिंताजनक स्थिति को सामने लाता है कि पुरुष सामान्य स्वास्थ्य जांच में भाग ले रहे हैं, लेकिन प्रोस्टेट स्वास्थ्य अभी भी नियमित रूप से उस बातचीत का हिस्सा नहीं है. यही वजह है कि 84% उत्तरदाता या तो जांच से वंचित हैं, अपनी जांच की स्थिति को लेकर अनिश्चित हैं या यह नहीं मानते कि जांच की जरूरत है.
. यह बताता है कि पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम और शुरुआती मूल्यांकन की भूमिका को समझाने के लिए अभी कितना काम किया जाना बाकी है. ये बातचीत सक्रिय रूप से शुरू की जानी चाहिए और व्यक्तिगत जोखिम तथा चिकित्सकीय सलाह के आधार पर निर्देशित होनी चाहिए.
. 67% लोगों ने डॉक्टरों पर सबसे अधिक भरोसा जताया, फिर भी केवल 36% लोग ही सही रूप से यह पहचान पाए कि प्रोस्टेट कैंसर के लिए यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) उपयुक्त विशेषज्ञ हैं.
. 44% लोगों ने कहा कि वे उपचार शुरू करने से पहले दूसरी राय लेना चाहेंगे, जो सूचित निर्णय लेने की इच्छा के साथ-साथ उपचार की प्रक्रिया को समझने में मौजूद कमियों को भी दर्शाता है.
. सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि प्रोस्टेट स्वास्थ्य के बारे में चर्चा करना अभी भी कई पुरुषों के लिए कठिन है.
. राष्ट्रीय स्तर पर, 59.5% ने कहा कि वे डॉक्टर के साथ प्रोस्टेट स्क्रीनिंग या उपचार के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं, जबकि केवल लगभग 18% ने कहा कि वे स्वयं पहल करके ऐसी बातचीत शुरू करेंगे.
. वहीं, 84% ने कहा कि वे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए ऑनलाइन खोज करते हैं, जबकि 48% ने कहा कि परिवार या मित्रों ने प्रोस्टेट कैंसर के बारे में उनकी पहली बातचीत को प्रभावित किया.
. कई पुरुष वार्षिक स्वास्थ्य जांच करा रहे हैं, फिर भी उन्हें यह पता नहीं हो सकता कि प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के बारे में चर्चा की गई थी या उन्होंने कभी PSA टेस्ट कराया है या नहीं.
About the Authorप्रिया गौतमSenior Correspondent
Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi..com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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October 16, 2026, 15:37 IST



