मेवात की गौशालाओं में गाय के गोबर, मूत्र और दूध से बन रहे घरेलू उत्पाद, भरतपुर से दिल्ली तक बढ़ रही मांग

Last Updated:October 16, 2026, 19:16 IST
Bharatpur News: भरतपुर के डीग जिले के मेवात क्षेत्र की गौशालाएं गायों के संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. यहां गोबर और गौमूत्र से धूपबत्ती, अगरबत्ती व फिनाइल, जबकि दूध से घी और पनीर तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों की मांग भरतपुर से लेकर दिल्ली तक पहुंच रही है, जिससे स्थानीय रोजगार और गौशालाओं की आय बढ़ाने के नए अवसर बन रहे हैं.
भरतपुर. डीग जिले के मेवात क्षेत्र में गौशालाएं अब गायों के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. यहां गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध से कई तरह के उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों में धूपबत्ती, अगरबत्ती, फिनाइल, पनीर, घी सहित घरों में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं शामिल हैं. खास बात यह है कि इन उत्पादों की मांग अब भरतपुर से लेकर दिल्ली तक पहुंच रही है, जिससे गौशालाओं की गतिविधियों को नई पहचान मिल रही है. मेवात क्षेत्र की इन गौशालाओं में गायों से प्राप्त होने वाले संसाधनों का उपयोग करके अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाते हैं. जहां गाय के दूध से घी और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं. वहीं गोबर और गौमूत्र से धूपबत्ती, अगरबत्ती तथा फिनाइल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
इन वस्तुओं को घरेलू जरूरतों के साथ-साथ पूजा-पाठ और साफ-सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. गौशालाओं में इस तरह की गतिविधियों से गायों के संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो रहा है. इसके अलावा, उत्पादों के निर्माण और बिक्री से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं. स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली इन वस्तुओं को बाजार तक पहुंचाने से गौशालाओं को अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है. इन उत्पादों की मांग भरतपुर और आसपास के क्षेत्रों के अलावा दिल्ली तक होने की बात सामने आ रही है.
इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली वस्तुओं को व्यापक बाजार मिल रहा है. हालांकि मांग को लगातार बनाए रखने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता, उचित पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है. डीग के मेवात क्षेत्र की गौशालाएं पारंपरिक संसाधनों के उपयोग के जरिए एक नई दिशा में आगे बढ़ रही हैं. यहां गायों की देखभाल और संरक्षण के साथ उनसे प्राप्त होने वाले संसाधनों को उपयोगी उत्पादों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है. यह पहल गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
October 16, 2026, 19:16 IST



