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North Korea News: दुश्मन को भनक तक नहीं लगेगी, उत्तर कोरिया ने बनाई AI वाली टॉरपीडो, पानी के अंदर करेगी शिकार

Agency:एजेंसियां

Last Updated:October 17, 2026, 14:49 IST

North Korea Navy News: उत्तर कोरिया ने एआई तकनीक से लैस नई ‘जैम-2.0’ टॉरपीडो प्रणाली का पानी के भीतर परीक्षण किया है. सरकारी मीडिया के मुताबिक, गुरुवार को हुए परीक्षण में हथियार की तकनीक और प्रदर्शन से जुड़ी क्षमताओं की जांच की गई. दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहुत तेज गति से चलने वाली सुपरकैविटेटिंग टॉरपीडो हो सकती है.दुश्मन को भनक तक नहीं लगेगी, उत्तर कोरिया ने बनाई AI वाली टॉरपीडोZoomउत्तर कोरिया की पनडुब्बी ने टॉरपीडो लॉन्च किया. (Reuters)

उत्तर कोरिया अपनी नौसेना को मजबूत करने में जुटा है. इसी कड़ी में उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाली नई टॉरपीडो का पानी के भीतर परीक्षण किया है. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने शनिवार को यह जानकारी दी. देश ने इसे अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ी कामयाबी बताया है. सरकारी मीडिया कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने गुरुवार को ‘जैम-2.0’ नाम की टॉरपीडो का परीक्षण किया. इसका मकसद यह चेक करना था कि हथियार में किए गए नए बदलाव कितने कारगर हैं. हालांकि, उत्तर कोरिया ने यह नहीं बताया कि यह टॉरपीडो कितनी दूर तक मार कर सकती है और इसकी रफ्तार कितनी है.

AI की मदद से खुद टार्गेट पहचान सकेगी टॉरपीडो?

KCNA के मुताबिक, इस नई टॉरपीडो में AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसकी मदद से यह लक्ष्य को पहचानने और उस पर निशाना लगाने में मदद पा सकती है. टेस्ट में यह भी जांचा गया कि टॉरपीडो को पानी के भीतर आगे बढ़ाने वाला सिस्टम कितना बेहतर काम करता है और इसकी रफ्तार बढ़ाने वाली तकनीक में कितना सुधार हुआ है. उत्तर कोरिया का दावा है कि पिछले पांच साल में इस टॉरपीडो प्रणाली से जुड़े 180 से ज्यादा टेस्ट किए गए हैं. टेस्ट पर नजर रखने वाले देश के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने इसे नौसेना के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि असल हालात में यह हथियार कितना असरदार साबित होगा. इसकी रफ्तार, मार करने की दूरी और दूसरी खूबियों के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.

क्या पानी के अंदर बहुत तेज दौड़ेगी यह टॉरपीडो?

दक्षिण कोरिया के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह टॉरपीडो खास तकनीक से लैस हो सकती है, जिसे ‘सुपरकैविटेटिंग’ कहा जाता है. इस तकनीक में टॉरपीडो के अगले हिस्से के आसपास हवा जैसा एक बुलबुला बनाया जाता है. इससे पानी का खिंचाव कम होता है और हथियार पानी के भीतर सामान्य टॉरपीडो से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ सकता है. लेकिन तेज रफ्तार के साथ एक बड़ी मुश्किल भी आती है. पानी के अंदर तेजी से चलते हुए टॉरपीडो की दिशा बदलना और उसे सही लक्ष्य तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है. इसलिए केवल टेस्ट के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि यह हथियार युद्ध के दौरान कितना सफल होगा.

दक्षिण कोरिया के युद्धपोतों के लिए खतरा?

योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, क्यूंगनाम विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम यूल-चुल का मानना है कि इस परीक्षण के जरिए उत्तर कोरिया अपनी ऐसी टॉरपीडो की ताकत दिखाना चाहता हो सकता है, जो दक्षिण कोरिया के बड़े युद्धपोतों को निशाना बना सके. कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के महासचिव शिन जोंग-वू ने कहा कि उत्तर कोरिया अपनी पनडुब्बियों की ताकत बढ़ाने के साथ नई टॉरपीडो भी बना रहा है. उनके मुताबिक, उत्तर कोरिया ऐसा करके दक्षिण कोरिया की नौसेना और अपनी नौसेना के बीच सैन्य ताकत के अंतर को कम करना चाहता है. ये विशेषज्ञों के आकलन हैं. उत्तर कोरिया ने अब तक इस हथियार की असली ताकत और उसकी मारक क्षमता के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है.

पनडुब्बी से मिसाइलें दागीं, दो नए युद्धपोत भी बेड़े में शामिल

उत्तर कोरिया हाल के दिनों में अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए लगातार हथियारों के परीक्षण कर रहा है. बुधवार को उसने पूर्वी सागर में करीब 3,000 टन की पनडुब्बी से दो तरह की रणनीतिक क्रूज मिसाइलें दागी थीं. इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने हाल ही में 5,000 टन के दो विध्वंसक युद्धपोत ‘चोए ह्योन’ और ‘कांग कोन’ को भी अपने नौसैनिक बेड़े में शामिल किया है. नई टॉरपीडो का टेस्ट, पनडुब्बी से मिसाइलें दागना और नए युद्धपोतों को बेड़े में शामिल करना दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपनी समुद्री सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

About the AuthorYogendra Mishra

Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…

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October 17, 2026, 14:49 IST

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