Rajasthan

राजसमंद का 800 साल पुराना सीम माता मंदिर, जहां साल में एक दिन सोने सी चमकती है पहाड़ी, मुगलकाल के इतिहास से जुड़ा है रहस्य

Last Updated:October 20, 2026, 10:27 IST

Rajsamand Seem Mata Temple History: राजसमंद के देवगढ़-आमेट सीमा पर 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सीम माता का 800 साल पुराना मंदिर मेवाड़ की प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. सात पहाड़ियों को पार कर यहां पहुंचा जाता है. मुगलकाल में ठाकुर प्रताप सिंह की रक्षा करने वाली माता को समर्पित इस मंदिर में वह ऐतिहासिक तलवार आज भी मौजूद है. साल में एक दिन पूरी पहाड़ी सोने जैसी चमकती है. पुजारी भगवान लाल गुर्जर की दसवीं पीढ़ी यहां सेवा कर रही है, जहां आज भी हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

ख़बरें फटाफट

800 साल पुराना सीम माता मंदिर, जहां साल में एक दिन सोने सी चमकती है पहाड़ZoomRajsamand Seem Mata Temple: 800 साल पुराना सीम माता मंदिर, जहां साल में एक दिन सोने सी चमकती है पहाड़ी

राजसमंद: राजस्थान का राजसमंद जिला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के लिए पूरे देश में विशेष स्थान रखता है. यहां देवगढ़ और आमेट की सीमा पर अरावली की वादियों के बीच स्थित सीम माता का मंदिर लगभग 800 साल पुराना है. जमीन से करीब 1000 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ियों की चोटी पर विराजमान यह मंदिर मेवाड़ की प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. पांच गांवों की सीमाओं पर स्थित होने के कारण ही इस देवी का नाम सीम माता पड़ा है. इस पवित्र धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कुल सात कठिन पहाड़ियों को पार करना पड़ता है, जो माता के प्रति गहरी आस्था और भक्ति का प्रतीक है.

स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, मुगलकाल के दौरान जब रियासतों और हिंदू राजाओं पर लगातार आक्रमण हो रहे थे, तब यह मंदिर वीरता और चमत्कार का गवाह बना था. कहा जाता है कि कमेरी गांव के ठाकुर प्रताप सिंह चुण्डावत को माता ने साक्षात दर्शन दिए थे और संकट के समय उनकी रक्षा की थी. युद्ध के दौरान माता द्वारा ठाकुरों को भेंट की गई ऐतिहासिक तलवार आज भी मंदिर के भीतर सुरक्षित मौजूद है, जो इस प्राचीन मंदिर के गौरवशाली अतीत की गवाही देती है. युद्ध के दौर में ठाकुर परिवारों ने सीम माता की आराधना कर अपनी रियासत की रक्षा की थी.

सोने जैसी चमकती पहाड़ी और अनूठी मान्यताएंसीम माता मंदिर से जुड़ी कई ऐसी रहस्यमयी और अनोखी मान्यताएं हैं जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. ऐसा माना जाता है कि पूरे वर्ष में एक ऐसा दिन आता है जब यह पूरी पहाड़ी सूर्य की रोशनी में सोने जैसे सुनहरे रंग की दिखाई देती है. इस अद्भुत और दुर्लभ प्राकृतिक दृश्य को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं. इसके अलावा, मंदिर के पुजारी भगवान लाल गुर्जर बताते हैं कि उनके परिवार की दसवीं पीढ़ी इस पावन धाम में माता की पूजा-अर्चना और सेवा की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है, जो पीढ़ियों के समर्पण का अनूठा उदाहरण है.

अटूट आस्था का केंद्र और श्रद्धालुओं का आगमनआज भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु कठिन रास्तों और सात पहाड़ियों को पार करके सीम माता के दरबार में पहुंचते हैं. नवरात्र और विशेष अवसरों पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है. लोग माता के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. अरावली की गोद में बसा यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्किोण से बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी मेवाड़ की अमूल्य धरोहर है, जिसे आज भी ग्रामीण पूरी शिद्दत से संजोए हुए हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

और पढ़ेंLocation :

Rajsamand,Rajsamand,Rajasthan

First Published :

October 20, 2026, 10:27 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj