Agriculture : विदेशी खजूर की किस्में जालोर की मिट्टी में कैसे हो रहीं तैयार? जानिए खेती का तरीका

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विदेशी खजूर की किस्में जालोर की मिट्टी में कैसे हो रहीं तैयार? जानिए तरीका
Last Updated:October 28, 2026, 19:40 IST
Jalore Agriculture News: जालोर के किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर खजूर की खेती अपनाई है. भीनमाल उपखंड में सऊदी अरब और साउथ अफ्रीका की बरही, खलासा और मेजूल जैसी विदेशी किस्में उगाई जा रही हैं. पौधों के बीच पर्याप्त जगह होने से धूप और हवा अच्छी तरह मिलती है. आगे चलकर पेड़ों की बढ़वार के साथ फलों के गुच्छों की देखभाल भी आसानी से की जा सकती है.
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जालोर. पारंपरिक खेती से हटकर अब जालोर के किसान खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं. कम पानी में बेहतर आमदनी देने वाली फसलों की तलाश के बीच खजूर की खेती किसानों के लिए एक नया विकल्प बनकर सामने आई है. जालोर की गर्म और शुष्क जलवायु में अब विदेशी किस्मों के खजूर के पौधे भी अच्छी तरह तैयार हो रहे हैं.
भीनमाल उपखंड के भालणी और दाता गांव में किसानों ने खजूर की खेती को अपनाया है. यहां सऊदी अरब और साउथ अफ्रीका की उन्नत किस्मों की खेती की जा रही है. इनमें बरही, खलासा और मेजूल जैसी किस्में शामिल हैं. इन किस्मों की खासियत यह है कि उचित देखभाल और अनुकूल वातावरण मिलने पर इनसे अच्छी गुणवत्ता के फल तैयार किए जा सकते हैं.
कम पानी में अच्छी आमदनी की उम्मीदकिसान हनीफ मेहर ने लोकल 18 को बताया कि पहले हम पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन खजूर की खेती के बारे में जानकारी मिली तो इसे भी आजमाया. जालोर का मौसम खजूर के लिए अच्छा है. इसमें पानी की जरूरत भी दूसरी कई फसलों के मुकाबले कम रहती है. सही तरीके से पौधों की देखभाल की जाए तो इससे अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है.
खजूर की खेती में पौधों का सही चयन जरूरीखजूर की खेती में सबसे महत्वपूर्ण काम पौधों का सही चयन करना और उन्हें खेत में उचित दूरी पर लगाना होता है. पौधों के बीच पर्याप्त जगह होने से धूप और हवा अच्छी तरह मिलती है. आगे चलकर पेड़ों की बढ़वार के साथ फलों के गुच्छों की देखभाल भी आसानी से की जा सकती है. खेत में पानी रुकने से बचाने और जरूरत के अनुसार सिंचाई करने पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है.
नर्मदा नहर से बढ़ी बागवानी की संभावनाएंजालोर में खजूर की खेती को बढ़ावा मिलने के पीछे यहां की जलवायु के साथ सिंचाई की सुविधा भी एक महत्वपूर्ण वजह है. नर्मदा नहर से जुड़े क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता से बागवानी फसलों की संभावनाएं बढ़ी हैं. यही वजह है कि अब दूसरे किसान भी खजूर की खेती को कमाई के नए साधन के तौर पर देख रहे हैं. विदेशी किस्मों को जालोर की जलवायु में उगाने का यह प्रयोग खेती में हो रहे बदलाव को दिखाता है. बरही, खलासा और मेजूल जैसी किस्मों के साथ किसान अब पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी को भी कमाई का अच्छा जरिया मान रहे हैं. अगर आने वाले समय में खजूर की खेती का रकबा बढ़ता है तो इससे जालोर की खेती को एक नई पहचान मिल सकती है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
October 28, 2026, 19:40 IST



