SGPT और SGOT बढ़ने पर शरीर में क्या होता है? जानें सामान्य स्तर, कारण और खतरे

सेहत की निगरानी के लिए रूटीन चेकअप करवाना जरूरी होता है. इसमें किडनी से लेकर लिवर के फंक्शन की एक मोटा-माटी तस्वीर सामने आते है. लेकिन रिपोर्ट में कई ऐसे मेडिकल टर्म होते हैं, जिसे एक आम इंसान समझ ही नहीं पाता है, और फिर डॉक्टर के पास जाना प़़ड़ता है. SGPT और SGOT भी ऐसा ही एक टर्म है.ये दोनों एंजाइम शरीर में कई जरूरी काम करते हैं और खासतौर पर लिवर की सेहत का पता लगाने में मदद करते हैं.
पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर, डॉ. विभू मित्तल बताते हैं कि SGPT और SGOT का बढ़ा स्तर लिवर में सूजन, फैटी लिवर या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है. SGPT को ALT और SGOT को AST भी कहा जाता है. इनकी जांच आमतौर पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के अंतर्गत की जाती है. हालाँकि, इन एंजाइम का बढ़ना हमेशा लिवर की गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता.
SGPT और SGOT का सामान्य स्तर कितना है?आमतौर पर SGPT (ALT) का सामान्य स्तर 7–56 U/L और SGOT (AST) का 10–40 U/L माना जाता है. हालांकि, अलग-अलग लैब में सामान्य सीमा थोड़ी अलग हो सकती है. इसलिए अपनी रिपोर्ट में दी गई सामान्य सीमा को ध्यान में रखना चाहिए.
SGPT और SGOT बढ़ने के कारणइन एंजाइम का स्तर बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें फैटी लिवर, शराब का अधिक सेवन, वायरल हेपेटाइटिस और कुछ दवाओं का असर प्रमुख हैं. मोटापा, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और शारीरिक गतिविधि की कमी भी फैटी लिवर का खतरा बढ़ाते हैं. इसके अलावा, मांसपेशियों में चोट या बहुत अधिक व्यायाम करने से भी SGOT बढ़ सकता है.
शरीर में दिखाई देने वाले लक्षणकई लोगों में एंजाइम बढ़ने के बावजूद कोई लक्षण नहीं दिखते. कुछ लोगों को थकान, कमजोरी, भूख कम लगना, मतली या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है. आँखों और त्वचा का पीला पड़ना तथा पेशाब का रंग गहरा होना भी लिवर से जुड़ी समस्या के संकेत हो सकते हैं.
SGPT और SGOT बढ़ने से क्या खतरा है?इनका बढ़ा हुआ स्तर कितना गंभीर है, ये इसके कारण और अन्य जांचों पर निर्भर करता है. लंबे समय तक लिवर में सूजन रहने से घाव, सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि, केवल एंजाइम के स्तर से बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती.
बचाव और इलाजSGPT या SGOT बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह लें. जरूरत के अनुसार दोबारा LFT, हेपेटाइटिस की जांच या अल्ट्रासाउंड कराया जा सकता है. शराब से दूर रहें, संतुलित भोजन करें, नियमित व्यायाम करें और वजन कंट्रोल रखें. डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा बंद न करें.



