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50 साल का बसेरा, 20 मिनट में मलबा…12 लाख का नया घर हुआ जमींदोज, परिवार बोला- पूरे गांव में कार्रवाई क्यों नहीं?

Last Updated:June 27, 2026, 12:20 IST

फरीदाबाद के डीग गांव में पंचायती जमीन पर बने होने का दावा करते हुए प्रशासन ने एक मकान पर बुलडोजर कार्रवाई की. प्रभावित परिवार का आरोप है कि पूरे गांव में ऐसे कई मकान होने के बावजूद कार्रवाई केवल उनके घर पर की गई, जिससे 30 सदस्य बेघर हो गए और वर्षों की मेहनत मलबे में बदल गई.

फरीदाबाद: फरीदाबाद के डीग गांव में प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एक मकान को पंचायती जमीन पर बना बताकर तोड़ दिया गया. कार्रवाई के बाद पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया. परिवार का कहना है कि यह मकान करीब दो महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ था और कई वर्षों की मेहनत की कमाई से तैयार किया गया था. परिवार ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पूरे गांव में पंचायती जमीन पर कई मकान बने हुए हैं लेकिन कार्रवाई केवल एक ही मकान पर की गई.

क्या है पूरा मामला

रवि बताते हैं Local18 से बातचीत में मैं हूं डीग गांव का रहने वाला हूं और यह टूटा हुआ मकान मेरा ही है. करीब 25 साल से यहां बिजली का सरकारी मीटर लगा हुआ है और 50 साल से मेरे दादा-परदादा इसी जगह पर रहते चले आ रहे हैं. प्रशासन की तरफ से कोई नोटिस नहीं मिला. करीब 10-15 साल पहले इतना जरूर सुनने में आया था कि यह पंचायती जमीन है. शाम को निशान लगाकर चले गए और अगले दिन सुबह करीब 10 बजे जेसीबी लेकर पहुंच गए. जब कारण पूछा तो सिर्फ इतना कहा गया कि यह सरकारी जमीन है और यहां से खाली करना पड़ेगा.

यह सरकारी जमीन है तो फिर पूरे गांव में कार्रवाई होनी चाहिए

रवि बताते हैं अगर यह सरकारी जमीन है तो फिर पूरे गांव में कार्रवाई होनी चाहिए. आधे से ज्यादा गांव में पंचायती जमीन पर मकान बने हुए हैं. पूरे डीग गांव में सिर्फ एक मकान तोड़ा गया और वह मेरा था. गांव के सरपंच से पुरानी रंजिश चल रही है. वोट नहीं देने की वजह से मेरा मकान तुड़वाया गया. बाकी किसी दूसरे मकान को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया. कार्रवाई सिर्फ मेरे परिवार को निशाना बनाकर की गई.

25 साल तक एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाया था

रवि बताते हैं पशुपालन और छोटी-मोटी खेती करके परिवार चलाता हूं. मकान करीब 20 दिन पहले ही पूरी तरह बनकर तैयार हुआ था. मकान बनाने में करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए. 25 साल तक एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाया था लेकिन सिर्फ 20 मिनट में सारी मेहनत मलबे में बदल गई. मकान के साथ घर का सामान भी दब गया. दादा की उम्र करीब 100 साल है और आज भी परिवार के साथ यहीं रहते हैं. इतने वर्षों की मेहनत इस तरह खत्म हो जाएगी…कभी सोचा नहीं था.

रवि बताते हैं इतना जानता हूं कि दादा के समय जमीन खरीदने की व्यवस्था ऐसी नहीं थी. उस समय जमीन ज्यादा होती थी और लोग कम होते थे इसलिए रहने के लिए जगह दे दी जाती थी. धीरे-धीरे लोग मकान बनाकर बस गए. मेरे घर से लेकर आधे गांव तक पंचायती जमीन पर मकान बने हुए हैं, लेकिन किसी और के मकान पर कार्रवाई नहीं हुई. परिवार में सात भाई हैं पिता तीन भाई हैं और करीब 30 लोग इसी घर में रहते थे. करीब ढाई सौ गज में बना मकान और पशुओं के रहने की जगह भी पूरी तरह तोड़ दी गई. यहां कोई रास्ता नहीं निकलना है और न कोई दूसरा काम होना है सिर्फ नुकसान हुआ है.

गरीब परिवार के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए

रवि बताते हैं सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि पशुओं को बाहर निकालने का भी समय नहीं मिला. तोड़फोड़ के दौरान एक गाय घायल हो गई. पुलिस बल की मौजूदगी में घर, सामान और पशुओं के रहने की जगह सब तहस-नहस हो गई. अब मलबे के नीचे दबा सामान निकालने की कोशिश चल रही है, ताकि जो कुछ बच सके वही परिवार के काम आ सके. गरीब परिवार के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए.

About the AuthorVivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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