Rajasthan

Amla Juice Innovation by Dausa Farmer for Better Health

Last Updated:October 30, 2025, 12:13 IST

Amla Juice Innovation: दौसा जिले के सिकराय के किसान बच्चू सिंह मीणा ने आंवले के जूस से सेहत का नया फॉर्मूला पेश किया है. उनके बनाए जूस से बीपी, शुगर और रक्तसंचार संबंधी लाभ मिल रहे हैं. यह जूस अब दिल्ली-जयपुर सहित कई जिलों में बिक रहा है और किसान जैविक मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए दूसरों के लिए मिसाल बन गए हैं.

दौसा: राजस्थान के सिकराय क्षेत्र के किसान बच्चू सिंह मीणा ने आंवले से सेहतमंद जीवन का एक नया फॉर्मूला खोज निकाला है. प्राकृतिक औषधीय गुणों से भरपूर आंवले का जूस अब न केवल स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हो रहा है, बल्कि लोगों की सेहत में भी सुधार ला रहा है. यह सफलता दर्शाती है कि मूल्यवर्धित कृषि उत्पाद (Value-Added Agricultural Products) ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कितने लाभकारी हो सकते हैं.

किसान बच्चू सिंह मीणा ने बताया कि वे अपने खेत से पूरी तरह जैविक रूप से उगाए गए ताज़े आंवले तोड़ते हैं. जूस बनाने की प्रक्रिया भी प्राकृतिक और सरल है:
सबसे पहले, आंवलों को दो भागों में बांटकर बीच की गुठली अलग की जाती है.
फिर गूदे को वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस कर जूस तैयार किया जाता है.
वे दो तरह के जूस बनाते हैं:
मीठा स्वाद वाला जूस: इसे हर उम्र के लोग पसंद करते हैं और यह एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक का काम करता है.
खट्टा-प्राकृतिक जूस: इसमें आंवले का असली, तीखा स्वाद बरकरार रहता है, जिसे औषधीय गुणों के लिए ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है.

सेहत के लिए अमृत समानमीणा के अनुसार, आयुर्वेद में आंवले को अमृत माना गया है. उनके जूस में करीब 16 से अधिक औषधीय तत्व पाए जाते हैं.

यह जूस नसों को मज़बूत बनाता है.
रक्त संचार को संतुलित रखता है.
बीपी (Blood Pressure) को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है.

यह जूस शुगर के मरीजों के लिए भी बेहद उपयोगी है, क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. हालांकि, वे सलाह देते हैं कि लो बीपी वाले लोग इसे सीमित मात्रा में लें, क्योंकि यह रक्तचाप को और कम कर सकता है.

बढ़ती मांग और प्रेरणा का स्रोतबच्चू मीणा का आंवला जूस अब दिल्ली, जयपुर, अलवर और दौसा सहित कई जिलों में बेचा जा रहा है.

लगभग 900 ग्राम की बोतल ₹200 में मिलती है.
जूस की मांग दिन-ब-दिन बढ़ रही है, क्योंकि लोगों का रुझान रासायनिक मुक्त, प्राकृतिक उत्पादों की ओर बढ़ा है.

इस सफलता को देखते हुए, स्थानीय किसान अब इस मॉडल को अपनाने और आंवले की खेती को बढ़ावा देने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं.

जैविक खेती से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदमबच्चू सिंह मीणा का कहना है कि वे रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं करते. वे पूरी तरह जैविक खेती और प्राकृतिक प्रसंस्करण पर भरोसा करते हैं. इससे न केवल उत्पाद शुद्ध रहता है बल्कि उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ता है, जो किसी भी उत्पाद की सफलता के लिए सबसे जरूरी है. उनकी सफलता किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है कि कैसे कम लागत और सही नवाचार से आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है.

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Dausa,Dausa,Rajasthan

First Published :

October 30, 2025, 12:06 IST

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बीपी और ब्लड क्लॉट पर भारी…. सिकराय के किसान का ये हेल्थ सीक्रेट बन गया….

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