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Agricultural Mobile Lab: खेत की चौखट पर लैब! अब शहरों के चक्कर नहीं काटेंगे किसान, मौके पर ही होगी मिट्टी और पानी की जांच

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जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय की नई पहल: किसानों के खेतों पर ही होगी मिट्टी जांच

Last Updated:May 14, 2026, 09:47 IST

Agricultural Mobile Lab Jodhpur University: कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए ‘मोबाइल लैब वैन’ सेवा शुरू की है. यह वैन सीधे गांवों और खेतों तक पहुंचकर मिट्टी व पानी की जांच करती है और मौके पर ही रिपोर्ट प्रदान करती है. कुलगुरु वीरेन्द्र सिंह जैतावत के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य खेती की लागत कम करना और फसलों की पैदावार बढ़ाना है. आठ कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से संचालित यह अभियान किसानों को सही खाद और उर्वरक के चुनाव में मदद कर रहा है, जिससे खेती अधिक लाभदायक बन रही है.

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Agricultural Mobile Lab: आज के दौर में खेती में बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरता किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है. कई बार जानकारी के अभाव में किसान अपनी फसलों में अनावश्यक उर्वरकों और रसायनों का उपयोग करते हैं, जिससे न केवल मिट्टी खराब होती है बल्कि खेती का खर्च भी बढ़ जाता है. इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने एक क्रांतिकारी पहल शुरू की है. अब किसानों को मिट्टी और पानी की जांच के लिए शहरों की प्रयोगशालाओं के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी; बल्कि प्रयोगशाला खुद उनके खेत तक पहुंचेगी.

विश्वविद्यालय के कुलगुरु वीरेन्द्र सिंह जैतावत ने बताया कि कृषि विज्ञान को सीधे खेतों से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष मोबाइल लैब वैन को इस अभियान में शामिल किया गया है. इस वैन में मिट्टी और पानी के परीक्षण के लिए सभी आधुनिक और वैज्ञानिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. यह वैन सीधे गांवों में जाकर किसानों के खेतों तक पहुंचती है, जिससे किसानों का समय और पैसा दोनों बच रहा है. विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले आठ कृषि विज्ञान केंद्र इस अभियान को सफल बनाने में जुटे हुए हैं.

मौके पर जांच और हाथों-हाथ रिपोर्टइस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसकी कार्यप्रणाली है. मोबाइल वैन को बारी-बारी से सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को एक-एक सप्ताह के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है. केंद्रों के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों के खेतों से मिट्टी और पानी के नमूने (Samples) ले रहे हैं. वैन के भीतर ही वैज्ञानिक रूप से नमूनों का परीक्षण किया जाता है और किसानों को तुरंत रिपोर्ट सौंप दी जाती है. इस रिपोर्ट के आधार पर किसान यह समझ पा रहे हैं कि उनकी जमीन में किन पोषक तत्वों की कमी है और उन्हें कौन सी खाद या फसल का चुनाव करना चाहिए.

लागत में कमी और बेहतर उत्पादन का लक्ष्यविश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल से वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा. जब किसानों को अपनी मिट्टी की सही सेहत पता होगी, तो वे अनावश्यक खाद और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को कम कर सकेंगे. इससे न केवल फसलों की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित हो रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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