भोलेनाथ की कसम…मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, अब 5 साल उनका एक भी काम नहीं करूंगा…BJP के किस विधायक ने दिया ये बयान तो बंगाल में मचा बवाल

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मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, उनका 1 काम नहीं करूंगा…बंगाल में किसने ये कहा?
Last Updated:May 14, 2026, 09:49 IST
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है. कोलकाता की काशीपुर-बेलगाछिया सीट से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक रितेश तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. इस वीडियो में विधायक 5 साल तक मुसलमानों का कोई भी काम नहीं करेंगे. उन्होंने भगवान भोलेनाथ की कसम खाते हुए कहा कि चूंकि मुस्लिम इलाकों से उन्हें एक भी वोट नहीं मिला, इसलिए वह उनके प्रति जवाबदेह नहीं हैं. तिवारी ने पीएम मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे में ‘सबका हिसाब’ शब्द भी जोड़ दिया है. देखें वीडियो.भगवान भोलेनाथ की कसम… मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, अब 5 साल उनका एक भी काम नहीं करूंगा, भाजपा विधायक रितेश तिवारी के बयान ने मचाया भारी बवाल.
पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी बयानबाजियों का दौर थमा नहीं है, बल्कि अब इसने एक बेहद आक्रामक और विवादित मोड़ ले लिया है. कोलकाता की काशीपुर-बेलगाछिया विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले भाजपा विधायक रितेश तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है. इस वीडियो में विधायक अपनी जीत का जश्न मनाने के साथ-साथ एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा कि वह आने वाले पांच सालों में मुस्लिम समुदाय का कोई काम नहीं करेंगे. विधायक का तर्क है कि जब उन्हें इस समुदाय का एक भी वोट नहीं मिला, तो वह उनके काम क्यों करें? उन्होंने बाकायदा भगवान भोलेनाथ की सौगंध खाकर यह बात कही है. विधायक ने न सिर्फ काम करने से मना किया बल्कि सर्टिफिकेट तक जारी न करने की बात दोहराई है.
भोलेनाथ की कसम और विधायक की दो-टूक
काशीपुर-बेलगाछिया से भाजपा विधायक रितेश तिवारी के इस बयान ने सबको चौंका दिया है. वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें अपनी जीत का विश्लेषण करते हुए देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र के करीब 74 साल के चुनावी इतिहास में वह पहले ऐसे प्रत्याशी हैं जिन्हें मुस्लिम समुदाय का एक भी वोट नसीब नहीं हुआ. तिवारी ने मंच से दहाड़ते हुए कहा, “मैं आज भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर कसम खाता हूं कि अगले पांच साल तक मैं उनका (मुसलमानों का) एक भी काम नहीं करूंगा. जिन्होंने मुझे वोट दिया है, उन्हीं का मुझ पर अधिकार है.” विधायक ने यहां तक कह दिया कि वह उनके लिए एक भी सरकारी सर्टिफिकेट तक साइन नहीं करेंगे, जो एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के कर्तव्यों पर बड़े सवाल खड़े करता है.
सबका साथ की जगह अब होगा सबका हिसाब
भाजपा अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को अपनी ढाल बनाती है, लेकिन रितेश तिवारी ने इस नारे में एक नया और विवादित मोड़ दे दिया है. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि मोदी जी का नारा सही है, लेकिन इस बार चुनाव में ‘सबका हिसाब’ भी शामिल हो गया है. विधायक के मुताबिक, लोकतंत्र में वोट ही सब कुछ है और अगर किसी खास वर्ग ने उन्हें पूरी तरह नकारा है, तो वह भी उन्हें सुविधाएं देने के लिए बाध्य नहीं हैं. उन्होंने साफ किया कि वह किसी के साथ मारपीट नहीं करेंगे या किसी का पैसा नहीं छीनेंगे, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से वह अपना ‘हिसाब’ जरूर बराबर करेंगे.
टीएमसी के बड़े चेहरे को हराकर बढ़े हौसले
रितेश तिवारी की इस नाराजगी और आक्रामकता के पीछे एक बड़ी जीत भी छिपी है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और कोलकाता के डिप्टी मेयर अतीन घोष को बेहद करीबी मुकाबले में हराया है. रितेश तिवारी को 68,368 वोट मिले, जबकि अतीन घोष 66,717 वोटों पर सिमट गए. इतनी कड़ी टक्कर के बाद मिली जीत ने तिवारी के तेवरों को और भी तीखा कर दिया है. जब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने उनके इस बयान पर उनसे प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय सीना ठोक कर अपनी बात दोहराई. उन्होंने कहा कि उनके पास जो भी संसाधन हैं, वह उन पर पहला हक अपने उन वोटर्स का मानते हैं जिन्होंने उन पर भरोसा जताया और उन्हें विधानसभा तक पहुंचाया.
मुस्लिम बूथों पर एकतरफा वोटिंग से भड़के विधायक
अपनी बात को सही ठहराने के लिए रितेश तिवारी ने चुनावी आंकड़ों का सहारा लिया है. उनका दावा है कि हिंदू बहुल इलाकों में तो वोटों का बंटवारा हुआ और उन्हें भी समर्थन मिला, लेकिन मुस्लिम बहुल बूथों पर स्थिति इसके उलट थी. वहां एकतरफा वोटिंग हुई और सारा वोट बैंक टीएमसी की झोली में चला गया. विधायक का कहना है कि यह एक संगठित वोटिंग थी जिसे ‘ब्लॉक वोटिंग’ कहा जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी समुदाय ने सामूहिक रूप से उन्हें हराने की कोशिश की, तो अब जीत के बाद वह उनके लिए काम क्यों करें? रितेश तिवारी का मानना है कि उनकी पहली प्राथमिकता उन लोगों की सेवा करना है जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव में खड़े थे.
सोशल मीडिया और वायरल वीडियो का असर
यह पूरी घटना तब सामने आई जब विधायक की सभा का वीडियो वायरल हुआ. डिजिटल युग में अब कुछ भी छिपा रहना मुमकिन नहीं है. रितेश तिवारी जानते थे कि उनकी बात रिकॉर्ड हो रही है और लाइव टेलीकास्ट भी हो रही है, फिर भी उन्होंने अपनी बात रखी. इससे यह संकेत मिलता है कि वह एक खास वर्ग को यह संदेश देना चाहते हैं कि अब राजनीति का तरीका बदल गया है. उनके इस ‘हिसाब-किताब’ वाले बयान ने आने वाले पांच सालों के लिए काशीपुर-बेलगाछिया की राजनीतिक दिशा तय कर दी है. अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा आलाकमान इस पर कोई संज्ञान लेता है या फिर बंगाल में इसी ‘नई राजनीति’ का आगाज़ होगा.
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