Agriculture : मानसून में केंचुआ खाद बनाने वाले किसान सावधान! ये गलती हुई तो मर जाएंगे केंचुए, होगा बड़ा नुकसान

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मानसून में केंचुआ खाद बनाने वाले किसान सावधान! ये गलती हुई तो मर जाएंगे केंचुए
Last Updated:July 07, 2026, 11:54 IST
Agriculture In rainy Season : केंचुआ खाद के लिए मानसून जितना फायदेमंद माना जाता है उतना ही नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. किसान यदि इस मामले में जरा सी भी लापरवाही करते हैं तो मोटा नुकसान उठाना पड़ सकता है. केंचुआ खाद रखने वाले किसानों को समय-समय पर वर्मी कम्पोस्ट बेड का निरीक्षण भी करते रहना चाहिए. यदि बेड से तेज बदबू आने लगे, पानी जमा दिखाई दे या केंचुए ऊपर की सतह पर आने लगें, तो यह समस्या का संकेत हो सकता है.
भीलवाड़ा – बारिश का मौसम केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनाने के लिए अनुकूल माना जाता है, लेकिन इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही किसानों को नुकसान भी पहुंचा सकती है. अधिक बारिश से वर्मी कम्पोस्ट बेड में पानी भरने , केंचुओं के मरने और खाद की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को बेड को बारिश से सुरक्षित रखने, अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने और नमी का संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए. यदि समय रहते इन जरूरी बातों का पालन किया जाए तो केंचुआ खाद की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है, केंचुए सुरक्षित रहते हैं और किसानों को अधिक लाभ मिलता है.
सबसे पहले किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वर्मी कम्पोस्ट बेड खुले स्थान पर न हो. बेड के ऊपर टीन, पॉलीथीन शीट या घास-फूस की मजबूत छत बनाकर बारिश के पानी को सीधे बेड में जाने से रोकें. साथ ही बेड को जमीन से थोड़ा ऊंचा बनाएं ताकि आसपास का पानी उसमें जमा न हो. यदि बेड में पानी भर जाता है तो केंचुओं को ऑक्सीजन नहीं मिलती और वे मरने लगते हैं. इसलिए अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए नालियां बनाना भी जरूरी है.
बारिश के दौरान नमी का संतुलन बनाए रखना भी बेहद आवश्यक है. वर्मी कम्पोस्ट के लिए लगभग 60 से 70 प्रतिशत नमी पर्याप्त होती है. यदि बेड बहुत ज्यादा गीला हो जाए तो उसमें सूखी पत्तियां, भूसा या कटा हुआ सूखा जैविक पदार्थ मिलाया जा सकता है, जिससे अतिरिक्त नमी कम हो जाती है. वहीं, सड़ी-गली या बदबूदार सामग्री बेड में डालने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे हानिकारक जीवाणु बढ़ सकते हैं और केंचुओं पर बुरा असर पड़ता है.
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केंचुआ खाद रखने वाले किसानों को समय-समय पर वर्मी कम्पोस्ट बेड का निरीक्षण भी करते रहना चाहिए. यदि बेड से तेज बदबू आने लगे, पानी जमा दिखाई दे या केंचुए ऊपर की सतह पर आने लगें, तो यह समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत अतिरिक्त पानी निकालें, बेड को हल्का ढीला करें और हवा का पर्याप्त आवागमन सुनिश्चित करें. साथ ही चींटियों, मेढ़कों, छिपकलियों और अन्य प्राकृतिक शत्रुओं से केंचुओं की सुरक्षा के लिए भी उचित व्यवस्था रखें.
बारिश के मौसम में थोड़ी सी सावधानी वर्मी कम्पोस्ट की गुणवत्ता को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है. यदि किसान बेड को बारिश से सुरक्षित रखें, पानी की निकासी का उचित प्रबंध करें, नमी का संतुलन बनाए रखें और नियमित निगरानी करते रहें, तो केंचुए स्वस्थ रहेंगे और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार होगी. इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आर्थिक लाभ भी मिलेगा.



