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Agriculture: बारिश के साथ खेतों में लौटी रौनक, पौध तैयार करने में जुटे भरतपुर के किसान

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बारिश के साथ खेतों में लौटी रौनक, पौध तैयार करने में जुटे भरतपुर के किसान

Last Updated:July 05, 2026, 14:03 IST

Agriculture News: मानसून की बारिश ने भरतपुर के किसानों के चेहरों पर नई उम्मीद जगा दी है. खरीफ फसलों के लिए पौध तैयार करने का काम गांव-गांव में शुरू हो गया है. किसान आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक कृषि पद्धतियों का भी उपयोग कर रहे हैं, ताकि पौध स्वस्थ और मजबूत बन सके. हालांकि अत्यधिक बारिश, कीटों और बीमारियों जैसी चुनौतियां भी सामने हैं, लेकिन किसान पूरी मेहनत से फसलों की तैयारी में जुटे हैं. उनका मानना है कि शुरुआती मेहनत और सही देखभाल ही अच्छी पैदावार और बेहतर आर्थिक लाभ का आधार बनती है.

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भरतपुर. बरसात की शुरुआत के साथ ही भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में खेतों की रौनक लौट आई है. मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद किसान खरीफ सीजन की तैयारियों में पूरी तरह जुट गए हैं. खेतों में पौध तैयार करने का काम तेज गति से शुरू हो गया है. किसानों के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान तैयार की गई पौध आगे चलकर फसल की गुणवत्ता, उत्पादन और आमदनी तय करती है. अच्छी और स्वस्थ पौध ही बेहतर पैदावार की नींव मानी जाती है.

खरीफ फसलों की तैयारी के तहत किसान सबसे पहले खेतों की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ बनाते हैं. इसके बाद खेतों में गोबर की खाद या अन्य जैविक खाद डालकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाती है. फिर अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन कर उन्हें सावधानीपूर्वक बोया जाता है. कई किसान आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ पारंपरिक तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि पौध मजबूत और रोगमुक्त तैयार हो सके.

बीज बाेने के बाद फसल की ऐसे करें देखभाल

बीज बोने के बाद नियमित सिंचाई, निराई-गुड़ाई और समय-समय पर पौध की देखभाल की जाती है. किसानों का कहना है कि पौध तैयार होने में सामान्यतः एक से दो महीने का समय लगता है. इस दौरान मौसम की अनुकूलता, पर्याप्त पानी की उपलब्धता और पौध को मिलने वाला पोषण बेहद महत्वपूर्ण होता है. यदि शुरुआती चरण में पौध को सही देखभाल और सुरक्षा मिल जाए तो वह मजबूत बनती है और बाद में मुख्य खेत में रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है.

कई चुनौतियों का भी करना पड़ता है सामना

पौध तैयार होने के बाद किसान इन्हें बड़े खेतों में रोपते हैं, जहां धीरे-धीरे इनका विकास होकर फसल तैयार होती है. यही पौधे आगे चलकर सब्जियों, अनाज और अन्य फसलों का रूप लेते हैं, जो किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बनते हैं. हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसानों को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है. अत्यधिक बारिश, कीटों का प्रकोप, फफूंदजनित रोग और मौसम में अचानक बदलाव कई बार मेहनत पर पानी फेर देते हैं. इसके बावजूद किसान पूरे उत्साह और लगन के साथ खेती में जुटे हुए हैं. उनके लिए मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं, बल्कि नई उम्मीदों, बेहतर पैदावार और समृद्ध भविष्य की शुरुआत का प्रतीक है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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