Pali News: बाली दुर्ग की जर्जर दीवार बनी खतरा, शीतला माता मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं पर मंडरा रहा हादसे का खतरा

Last Updated:August 16, 2026, 11:55 IST
पाली जिले के बाली शहर में ऐतिहासिक दुर्ग की जर्जर पिछली दीवार बारिश के बीच कभी भी ढहने का खतरा बनी हुई है. दीवार के पास स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है. स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन व पुरातत्व विभाग से तत्काल निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजाम और मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है.
पाली. ऐतिहासिक धरोहरें किसी भी शहर की पहचान और उसकी संस्कृति का प्रतीक होती हैं, लेकिन जब प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यही धरोहरें आम जनता के लिए खतरे का सबब बनने लगें, तो सवाल उठना लाजमी है. पाली जिले के बाली शहर में स्थित ऐतिहासिक दुर्ग इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी और बदहाली की दोहरी मार झेल रहा है. दुर्ग के पिछले हिस्से की दीवार लंबे समय से जर्जर स्थिति में है और जारी बारिश के मौसम में इसके ढहने की प्रबल आशंका बनी हुई है. इस जर्जर दीवार के ठीक पास स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में रोजाना और पर्वों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण अब स्थानीय निवासियों को चिंता सताने लगी है कि कही कोई बडा हादसा उनके साथ न हो जाए.
स्थानीय निवासियों के अनुसार, बाली दुर्ग की पिछली दीवार लंबे समय से खस्ताहाल पड़ी है. रखरखाव के अभाव में इसका एक बड़ा हिस्सा पहले ही टूटकर गिर चुका है. लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण बची हुई दीवार की नींव में पानी रिस रहा है, जिससे इसकी संरचना बेहद कमजोर हो चुकी है. बारिश के इस दौर में यदि दीवार को तुरंत सहारा या मरम्मत नहीं दी गई, तो यह पूरी दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है.
शीतला माता मंदिर, आस्था के केंद्र पर मंडराया संकटदुर्ग परिसर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यहां पौराणिक शीतला माता मंदिर स्थापित है. शीतला सप्तमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर बाली शहर सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा, सामान्य दिनों में भी मंदिर में भक्तों और स्थानीय लोगों की नियमित आवाजाही बनी रहती है. क्षतिग्रस्त दीवार ठीक उसी रास्ते और परिसर के करीब है जहां से लोग गुजरते हैं. ऐसे में यदि कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
प्रशासन की लापरवाही पड़ न जाए भारीइस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों ने आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है. श्री वैष्णोदेवी माता मंडल मुंबई (बाली) एवं श्री महावीर जैन नवयुवक मंडल संस्थान अध्यक्ष नरेंद्र परमार ने कहा, “बाली का यह दुर्ग हमारी ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहर है. दुर्ग परिसर में शीतला माता का मंदिर होने के कारण यहां हर समय श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. प्रशासन और पुरातत्व विभाग को बिना किसी देरी के इस जर्जर दीवार का तत्काल निरीक्षण करना चाहिए और सुरक्षा के मद्देनजर इसका पुननिर्माण कार्य शुरू कराना चाहिए.”
पुरातत्व विभाग को जल्द करना चाहिए इसपर कामबाली क्रांति मंच के संयोजक प्रवीण प्रजापति ने प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, “शीतला सप्तमी जैसे बड़े पर्वों पर यहां भारी जनसैलाब उमड़ता है. दुर्ग के पीछे की दीवार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है. क्या प्रशासन किसी बड़े अप्रिय हादसे का इंतजार कर रहा है? किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन को तुरंत मौके का मुआयना कर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने चाहिए.”
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
August 16, 2026, 11:55 IST



