Rajasthan

Agriculture: खरीफ सीजन में नकली DAP का खेल! जानिए असली खाद पहचानने के 3 आसान तरीके

Last Updated:July 12, 2026, 07:37 IST

How to Identify DAP Fertilizer: मानसून की शुरुआत के साथ राजस्थान में खरीफ फसलों की बुवाई तेज हो गई है, जिससे डीएपी खाद की मांग बढ़ गई है. बढ़ती मांग का फायदा उठाकर बाजार में नकली डीएपी भी बेची जा रही है. सिरोही जिले में हाल ही में नकली खाद का बड़ा खेप पकड़ा गया था. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें. असली डीएपी के दाने सख्त, भूरे या बादामी रंग के होते हैं, चूना मिलाने पर तीखी गंध आती है और गर्म करने पर दाने फूल जाते हैं. नकली खाद फसल और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक है.

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सिरोही: मानसून की शुरुआत के साथ ही किसानों ने करीब सीजन की बुवाई शुरू कर दी है. ऐसे में किसानों को दुबई के साथ ही डीएपी खाद की भी जरूरत पड़ रही है. डीएपी खाद की डिमांड बढ़ने से बाजार में नकली खाद की सप्लाई भी होने लगी है. पिछले दिनों जिले के डाक क्षेत्र से संदीप खाद की बड़ी खेत पकड़ी गई थी. खरीफ सीजन में डीएपी की अधिक डिमांड का फायदा उठाकर नकली खाद को असली खाद के दाम पर बेचा जाता है.

राज्य के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आ चुके है. ऐसे में असली और नकली खाद की पहचान करना किसान के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. कृषि विभाग के आबूरोड सहायक कृषि अधिकारी विभा सक्सेना ने नकली और असली खाद की पहचान की जानकारी देते हुए बताया कि किसान अपने स्तर पर भी खाद की जांच कर असली और नकली डीएपी खाद की पहचान कर सकता है.

इन बातों का रखें ध्यान

किसान को अधिकारिक सरकारी खाद बीज गोदाम या सरकार से अधिकृत विक्रेता से ही खाद खरीदना चाहिए. कई बार गांव में अनाधिकृत लोग वाहन में खाद के कट्टों को सीधे बेचने आते है और किसान इसे असली समझ कर ख़रीद लेते है. असली डीएपी को पहचानने का एक तरीका ये है कि इसके दाने बहुत सख्त होते हैं, इनका रंग भूरा, काला या बादामी होता है और ये नाखून से आसानी से नहीं टूटते हैं. दूसरा तरीका ये है कि खाद के कुछ दानों को हथेली पर डीएपी के कुछ दाने लें और थोड़ा सा चूना मिलाकर रगड़ने पर इसमें से तीखी गंध आने लगती है. ये असली डीएपी खाद की पहचान है. तीसरा तरीका है भी है कि खाद के कुछ दानों को तवे पर गर्म करें. असली डीएपी के दाने फूलकर बड़े हो जाते हैं.

नकली खाद से फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान

उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. हेमराज मीणा के अनुसार अगर किसान खेत में नकली या मानकविहीन खाद का उपयोग करते है, तो पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचेगा और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी बुरा असर पड़ता है. नकली खाद से फसल को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और इससे उत्पादन भी कम होता है. जिससे किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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