राजस्थान में 11 प्रसूताओं की मौत! अब तक क्या हुई कार्रवाई? स्वास्थ्य मंत्री ने बताया एक-एक डिटेल

जयपुर. राजस्थान में हाल के दिनों में प्रसूताओं की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कोटा, अजमेर और भीलवाड़ा समेत प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है. शुरुआती जांच में कुछ मामलों में दवाओं की गुणवत्ता, गंभीर अवस्था में रेफरल और इलाज के दौरान जटिलताओं जैसे पहलू सामने आए हैं. इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने जांच तेज कर दी है और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा शुरू कर दी है.
इसी बीच न्यूज18 इंडिया से विशेष बातचीत में प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि ये घटनाएं बेहद चौंकाने वाली हैं और सरकार पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
कोटा, बीकानेर और भीलवाड़ा में 11 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जे.के. लोन अस्पताल में प्रसव के बाद कुछ दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की दर्दनाक मौत हो गई थी. इसके बाद बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में गंभीर संक्रमण और किडनी फेल होने के कारण 6 महिलाओं की तबीयत खराब हुई थी, जिनमें से 2 महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई. वहीं ताजा मामला भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल की है, जहां महज 6 दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की जान चली गई. शुरुआती जांच में सामने आया कि इनमें अधिकांश महिलाएं अन्य जिलों से गंभीर अवस्था में रेफर होकर आई थीं और कई मामलों में संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव तथा प्रसव संबंधी जटिलताएं मौत का कारण बनीं. वहीं कुछ मामलों में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई.
राजस्थान में मातृ मृत्यु दर देश के कई राज्यों से काफी कम है
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राजस्थान में मातृ मृत्यु दर देश के कई राज्यों की तुलना में काफी कम है, लेकिन इसके बावजूद हाल में सामने आई घटनाएं चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर प्रसूता को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है और इसी दिशा में लगातार काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए सोमवार को जयपुर में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में प्रदेशभर के वरिष्ठ गायनेकोलॉजिस्ट, विशेषज्ञ चिकित्सक, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे. बैठक में सभी मामलों की मेडिकल ऑडिट रिपोर्ट, उपचार व्यवस्था और रेफरल सिस्टम की समीक्षा की जाएगी.
बड़े सरकारी अस्पतालों में रेफरल और गंभीर मरीज पहुंचते हैं
गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि बड़े सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में रेफरल और गंभीर मरीज पहुंचते हैं. जिन महिलाओं की मौत हुई है, उनमें अधिकांश रेफरल और क्रिटिकल केस थे. सरकार ने सभी मामलों के मेडिकल पैरामीटर्स की जांच करवाई है. उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है और किसी भी मरीज को इलाज देने से मना नहीं किया जा सकता. कोटा में सामने आए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन विवाद पर मंत्री ने कहा कि जांच में पाया गया कि संबंधित बैच की कुछ शीशियों में दवा के स्थान पर केवल फ्लूइड था. इसके बाद संबंधित दवा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई. केंद्र सरकार ने भी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर उसकी फैक्ट्री को सील कर दिया है.
सरकार ने अब तक कई सख्त कदम उठाए हैं
सरकार की ओर से अब तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. संदिग्ध दवा बैच को तत्काल उपयोग से हटाया गया, दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, उच्चस्तरीय जांच कमेटियां गठित की गईं, अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की समीक्षा शुरू की गई और सभी मेडिकल कॉलेजों व जिला अस्पतालों को उपचार प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, चिकित्सक या दवा आपूर्तिकर्ता की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाना है.



