Agriculture News: कम पानी, ज्यादा मुनाफा! नागौर में यह बैंगनी फल बनी किसानों की नई कमाई का जरिया

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कम पानी, ज्यादा मुनाफा! नागौर में यह बैंगनी फल बनी किसानों की नई कमाई का जरिया
Last Updated:July 07, 2026, 07:18 IST
Jamun Cultivation: पारंपरिक खेती में लगातार बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और पानी की किल्लत से परेशान मेड़ता क्षेत्र के किसानों ने एक नई मिसाल पेश की है. यहां किसानों ने पारंपरिक फसलों को त्याग दिया है. यहां के किसान बागवानी पर फोकस कर रहे हैं. खासकर जामुन की बागवानी किसानों के लिए नई कमाई का जरिया बन गया है. बाजार में 100 से 200 रूपए तक रेट रहने के चलते किसानों को अच्छी कमाई भी हो रही है. किसान भरत सिंह खंडियास जैसे किसान बड़े पैमाने पर जामुन की बागवानी कर रहे हैं और सीजन में अच्छा मुनाफा भी ले रहे हैं. किसानों के बीच यह बदलाव अब उनके लिए बेहतर आमदनी और स्थायी आय का जरिया बन रहा है.
पारंपरिक खेती में लगातार बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और पानी की किल्लत से परेशान मेड़ता के खोखरिया, मानपुरा और रघुनाथपुरा गांव के किसानों ने एक नई मिसाल पेश की है. यहां किसानों ने गेहूं, बाजरा और अन्य पारंपरिक फसलों के बजाय जामुन की बागवानी को अपनाया है. यह बदलाव अब उनके लिए बेहतर आमदनी और स्थायी आय का जरिया बन रहा है. कम पानी में अच्छी पैदावार और बाजार में बढ़ती मांग ने किसानों का रुझान इस फल की खेती की ओर तेजी से बढ़ाया है.
इस समय क्षेत्र में जामुन की बंपर पैदावार हो रही है और बागों में तैयार फसल किसानों के चेहरे पर खुशी ला रही है. यहां का रसीला, मीठा औरअच्छी क्वालिटी के जामुन पुष्कर तथा नागौर की प्रमुख फल मंडियों में हाथों-हाथ बिक रहा है. मांग इतनी अधिक है कि कई व्यापारी सीधे बागों तक पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही और उन्हें समय पर नकद भुगतान भी मिल रहा है.
किसान भरत सिंह खंडियास ने बताया कि इस बार जामुन की गुणवत्ता पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर रही है. अच्छी पैदावार और बेहतर स्वाद के कारण व्यापारी खुद खेतों तक पहुंच रहे हैं. किसानों ने भी बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे मंडियों और खरीदारों से संपर्क बढ़ाया है. इससे उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और खेती से होने वाला मुनाफा भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है.
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पुष्कर मंडी में वर्तमान समय में जामुन के भाव 100 से 200 रुपये प्रति किलो तक मिल रहे हैं. वहीं, बगीचे से सीधे तोड़े गए ताजे और प्रीमियम गुणवत्ता वाले पैक्ड जामुन की कीमत 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है.स्थानीय बाजारों में भी फुटकर बिक्री 40 से 50 रुपये प्रति पाव के हिसाब से हो रही है. अच्छे दाम मिलने से किसानों में जामुन की बागवानी का उत्साह लगातार बढ़ रहा है और वे इसे भविष्य की लाभदायक खेती मान रहे हैं.
बाजार में जामुन की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण इसके स्वास्थ्यवर्धक गुण हैं. आयुर्वेद के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसे बेहद लाभकारी फल मानता है. यही वजह है कि गर्मियों के मौसम में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे अपने दैनिक आहार में शामिल कर रहे हैं, जिससे बाजार में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है और किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है.
हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. अंजू वर्मा ने बताया कि जामुन और इसके बीजों का चूर्ण मधुमेह रोगियों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है. इसके नियमित सेवन से रक्त शर्करा नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है. इसके अलावा यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है तथा अपच, कब्ज और पेट से जुड़ी अन्य समस्याओं में भी राहत देता है. यही कारण है कि औषधीय गुणों के चलते इसकी मांग हर वर्ष लगातार बढ़ती जा रही है.
उन्होंने बताया कि जामुन में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट्स, आयरन और कई आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. कम पानी में सफल उत्पादन, बेहतर बाजार, ऊंचे दाम और स्वास्थ्य लाभ जैसे कई कारणों से जामुन की बागवानी किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है. मेड़ता क्षेत्र के किसानों की यह पहल अब प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है.



