आंसुओं के बीच बेबसी! शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिल रही, अंतिम सफर के लिए लोडिंग गाड़ी बनी मजबूरी

Last Updated:June 30, 2026, 11:44 IST
Jodhpur Ambulance Workers Strike: जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के बाहर निजी एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल का असर अब आम लोगों पर साफ दिखाई देने लगा है. सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके परिजन का निधन हो चुका है. एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने से शवों को घर या अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाना मुश्किल हो गया है. कई परिवार मजबूरी में लोडिंग टैक्सी और अन्य निजी वाहनों का सहारा ले रहे हैं. परिजनों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि दुख की घड़ी में लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े.
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जाेधपुर में एम्बुलेंस कर्मियों के हड़ताल के चलते शव ले जाने के लिए नहीं मिल रहे मोर्चरी वैन
जोधपुर. ब्लू सिटी जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के बाहर निजी एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल का असर अब सीधे आम लोगों पर पड़ने लगा है. सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को झेलनी पड़ रही है, जिन्होंने अभी-अभी अपने किसी प्रियजन को खोया है. अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को शव घर ले जाने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई परिवार मजबूरी में शव को लोडिंग टैक्सी और अन्य निजी वाहनों से ले जाने को विवश हैं.
अस्पताल के बाहर मंगलवार को कई ऐसे भावुक दृश्य देखने को मिले, जहां परिजन अपने मृत परिजनों के शव को लेकर घंटों वाहन की तलाश करते रहे. एम्बुलेंस नहीं मिलने पर कुछ परिवारों ने किराए की लोडिंग गाड़ियों का सहारा लिया. इस दौरान परिजनों की आंखों में अपने प्रियजन को खोने का दर्द तो था ही, साथ ही व्यवस्था के प्रति नाराजगी भी साफ नजर आई.
अस्पताल में शवों को ले जाने के लिए नहीं मिल रहे एम्बुलेंस
हड़ताल के चलते अस्पताल से शवों को अंतिम संस्कार स्थल या गृह जिले तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है. परिजनों का कहना है कि दुख की इस घड़ी में उन्हें राहत मिलने के बजाय अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उनका सवाल है कि यदि एम्बुलेंस सेवा ठप है, तो प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई. मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल के बीच मानवता भी कहीं पीछे छूट गई है. जिन परिवारों पर पहले से दुखों का पहाड़ टूटा है, उन्हें अब शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई और जल्द समाधान की मांग की.
निजी एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी
फिलहाल निजी एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी है. प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन अस्पताल आने वाले मरीजों और मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत मिलती नजर नहीं आ रही. ऐसे में लोगों की मांग है कि हड़ताल के समाधान के साथ-साथ आपात और शव परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिवार को अपने सबसे कठिन समय में इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Jodhpur,Rajasthan



