Animal Husbandry: बकरी के मुंह में छाले दिखे तो हो जाएं सावधान, इंसानों को भी हो सकता है संक्रमण, ऐसे करें बचाव

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बकरी के मुंह में छाले दिखे तो हो जाएं सावधान, जानें लक्षण और रोकथाम के उपाय
Last Updated:August 16, 2026, 06:20 IST
Goats Orf Disease Symptoms: बरसात के मौसम में बकरियों में मुंह और होंठों के आसपास छाले, घाव और पपड़ी की समस्या बढ़ सकती है. नमी और संक्रमण के कारण ऐसी परेशानी सामने आ सकती है. ओर्फ़ जैसी बीमारी में मुंह के आसपास घाव बन सकते हैं और यह संक्रमित पशु से दूसरे पशुओं में फैल सकती है. पशुपालकों को लक्षण दिखने पर बकरी को अलग रखना चाहिए और साफ पानी, सूखा शेड व नरम चारे की व्यवस्था करनी चाहिए. बिना पशु चिकित्सक की सलाह के घाव पर नमक, चूना या कोई तेज घरेलू पदार्थ नहीं लगाना चाहिए.
बरसात का मौसम आपने परवान हे. इस मौसम में खासतौर पर पशुपालकों की चिंता बढ़ जाती है. बारिश के मौसम में बकरियों के मुंह में छाले , घाव या होंठों के आसपास पपड़ी की समस्या दिखाई दे सकती है. इसका कारण केवल बारिश नहीं है बल्कि इस मौसम में नमी और संक्रमण का खतरा बढ़ने से ऐसी समस्याएं सामने आ सकती है. इसलिए पशुपालकों को बकरियों के मुंह और खान-पान पर नियमित नजर रखनी चाहिए.
मुंह या होंठ के आसपास पपड़ी और घाव दिखाई दे तो बकरी को बाकी पशुओं से अलग रखना बेहतर है. ओर्फ जैसी बीमारी में ऐसे घाव हो सकते हैं और यह संक्रमित पशु से दूसरे पशुओं में फैल सकती है. यह बीमारी इंसानों में भी फैल सकती है, इसलिए बीमार बकरी को संभालते समय दस्ताने पहनना और हाथ अच्छी तरह धोना जरूरी है.
घरेलू देखभाल के तौर पर बकरी को नरम और आसानी से खाने वाला चारा दिया जा सकता है ताकि मुंह में दर्द होने पर भी वह कुछ खा सके. साफ पानी हमेशा उपलब्ध रखें और चारे को नमी व फफूंद से बचाकर रखें. मुंह के घाव को साफ रखने और बकरी के आराम का ध्यान रखना सहायक हो सकता है, लेकिन बिना पशु चिकित्सक की सलाह के घाव पर नमक , चूना, तेज रसायन या कोई घरेलू लेप सीधे न लगाएं.
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पशुपालक शेड को साफ और सूखा रखें तथा गीली मिट्टी और कीचड़ में बकरी को लंबे समय तक खड़ा न रहने दें. अगर घाव में मवाद आने लगे, बदबू हो, बकरी खाना-पीना छोड़ दे या कमजोरी बढ़ने लगे तो यह द्वितीयक संक्रमण का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में पशु चिकित्सक की सलाह जरूरी है, क्योंकि ओर्फ़ का कोई खास इलाज नहीं है और जरूरत पड़ने पर द्वितीयक संक्रमण का उपचार किया जाता है.
अगर मुंह के छालों के साथ बहुत ज्यादा लार आना, बुखार, पैरों में छाले या लंगड़ापन भी दिखाई दे तो इसे सामान्य छाला समझकर घरेलू उपचार न करें. मुंह और पैरों में छाले मुंह-खुर रोग जैसी संक्रामक बीमारी में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए ऐसे लक्षणों में पशु चिकित्सक से तुरंत जांच करवाना जरूरी है.
मानसून में पशुपालक साफ पानी, सूखा शेड, अच्छी गुणवत्ता का चारा और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. मुंह में छाले दिखने पर बकरी को अलग रखें और बीमारी का कारण पता करवाएं. देसी उपायों का इस्तेमाल केवल सहायक देखभाल तक सीमित रखें. बीमारी का इलाज समझकर कोई घरेलू पदार्थ सीधे घाव पर न लगाएं. समय पर पहचान और पशु चिकित्सक की सलाह से बकरी को गंभीर परेशानी से बचाया जा सकता है.
First Published :
August 16, 2026, 06:20 IST



