Animal Husbandry : बारिश में एक गलती से दूध देने वाले पशु हो सकते हैं बीमार, डॉक्टर ने दी जरूरी सलाह

Last Updated:August 04, 2026, 16:22 IST
Monsoon Me Pashuo Ko Bimari Se Bachane Ka Tips : मानसून में पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ता है. पशु चिकित्सक विनोद चौधरी ने भीगे चारे, परजीवियों और आफरा से बचाव के उपाय बताए. उन्होंने कहा कि कुछ बीमारियां लापरवाही की देन होती हैं. ऐसे में भैंसों के मद चक्र व खुरों की देखभाल करना और उनपर ध्यान रखना बहुत जरूरी है.
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Animal Husbandry News: मानसून का मौसम किसानों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन पशुपालकों के लिए यह कई चुनौतियां भी साथ लाता है. इस मौसम में पशुओं में बीमारियों का खतरा सबसे अधिक रहता है. लगातार बारिश और बढ़ी हुई नमी के कारण परजीवी संक्रमण, बैक्टीरिया जनित बीमारियां और खुर संबंधी रोग तेजी से फैलने लगते हैं. यदि इस दौरान पशुओं की देखभाल में थोड़ी भी लापरवाही बरती जाए तो दूध उत्पादन घटने के साथ-साथ पशुओं की जान पर भी खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में पशुपालकों को मानसून के दौरान पशुओं के आहार, पानी, आवास और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.
पशु चिकित्सक विनोद चौधरी ने बताया कि बारिश के मौसम में सबसे बड़ा खतरा भीगे हुए चारे से होता है. अधिक नमी के कारण दाना और चारा जल्दी फफूंदग्रस्त हो जाता है. इससे एफ्लैटॉक्सिन जैसे जहरीले तत्व बनने लगते हैं. ऐसा चारा खिलाने से पशुओं में विषाक्तता और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इससे उनकी उत्पादन क्षमता में भी भारी गिरावट आती है. उन्होंने सलाह दी कि हरे चारे को सीधे खिलाने के बजाय काटकर सूखे भूसे के साथ मिलाकर दें. साथ ही पशुओं को हमेशा साफ और स्वच्छ पानी ही पिलाएं, ताकि परजीवी संक्रमण का खतरा कम रहे.
मच्छर, मक्खी और चीचड़ों से करें बचाव
पशु चिकित्सक ने बताया कि मानसून में मच्छर, मक्खी और चीचड़ों का प्रकोप कई गुना बढ़ जाता है. यही परजीवी कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं. ऐसे में पशुपालकों को पशुशाला की नियमित सफाई करनी चाहिए. इसके अलावा कीटनाशक या चीचड़नाशक दवाओं का छिड़काव भी समय-समय पर करना चाहिए. पशुशाला के आसपास जलभराव नहीं होने दें. साथ ही पशुओं को समय-समय पर कृमिनाशक दवा भी दें, ताकि आंतरिक परजीवियों पर नियंत्रण रखा जा सके.
आफरा की समस्या में अपनाएं यह उपायबारिश के बाद खेतों और मेड़ों पर कई प्रकार की जहरीली घास उग आती है. चराई के दौरान यदि पशु इन्हें खा लें तो उनकी तबीयत बिगड़ सकती है. इसलिए चराई के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. वहीं, यदि अधिक मात्रा में फलीदार हरा चारा खाने से पशु में आफरा की समस्या हो जाए तो घरेलू उपाय के रूप में 500 मिली सरसों के तेल में 50 मिली तारपीन का तेल मिलाकर पिलाया जा सकता है.
भैंसों के मद चक्र और खुरों की देखभाल पर रखें नजरपशु चिकित्सक विनोद चौधरी के अनुसार मानसून शुरू होते ही भैंसों में मद चक्र सक्रिय हो जाता है. ऐसे में पशुपालकों को ताव के लक्षणों पर नजर रखकर समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराना चाहिए. उन्होंने बताया कि लगातार गीले फर्श पर रहने से खुरों की त्वचा फट जाती है और बैक्टीरिया अंदर प्रवेश कर फुट रॉट जैसी गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं. इससे बचाव के लिए पशुशाला का फर्श हमेशा सूखा रखें. चूना या राख का छिड़काव करें. साथ ही 5 प्रतिशत कॉपर सल्फेट या लाल दवा के घोल से नियमित फुट बाथ कराना भी फायदेमंद रहता है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
August 04, 2026, 15:26 IST



