ayurvedic benefits and side effects of datura

Last Updated:August 26, 2026, 18:09 IST
Ayurvedic benefits of Datura: कर्नाटक ने Amazon, Swiggy, Instamart पर धतूरे की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाई, क्योंकि यह इंसानों के लिए घातक है. आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, धतूरा खाने पर विष है, पर सही आयुर्वेदिक विधि से (तेल में मिलाकर) लगाने पर यह गठिया, सायटिका जैसे रोगों में औषधि का काम करता है.
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पश्चिम चम्पारण: कर्नाटक में धतूरे की ऑनलाइन खरीद बिक्री पर सरकारी रोक लगा दी गई है. कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने Amazon, Swiggy और Instamart जैसी साइट्स पर धतूरे के फल और बीजों की ऑनलाइन बिक्री पर कार्रवाई करते हुए जारी फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक रद्द कर दिया है. विभाग का कहना है कि धतूरे के फल और बीज इंसानों के लिए घातक हैं. ऐसे में उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खाद्य पदार्थ के रूप में बेचना बेहद घातक है.
विष या औषधिगौर करने वाली बात यह है कि पश्चिम चम्पारण जिले के वन वर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में धतूरे की भरमार है. यहां इसकी एक या दो नहीं, बल्कि चार किस्में पाई जाती हैं. जिनका उपयोग स्थानीय लोगों द्वारा औषधि के रूप में किया जाता है. लेकिन कर्नाटक सरकार द्वारा इसे विषाक्त बताकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बैन किए जाने के बाद लोगों के मन में डर बैठने लगा है. वो इसके इस्तेमाल से कतरा रहे हैं और घर के आस पास मौजूद धतूरे के पौधों को उखाड़ कर फेंक रहे हैं.
न करें खाने की गलतीस्थिति को देखते हुए लोकल 18 की टीम ने करीब 20 वर्षों से जड़ी बूटियों पर काम कर रहे बेतिया के वैद्य वासुदेव मुखिया और करीब 40 वर्षों से आयुर्वेदाचार्य के रूप में कार्य कर रहे आयुर्वेदाचार्य भुवनेश पांडे से बात की. उनका कहना है कि धतूरा वास्तव में एक विषैला फल है. इसके कांटेदार फल ही नहीं, बल्कि हर भाग अत्यधिक विषैले होते हैं. गलती से भी यदि कोई इंसान इसे निगल ले तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है.
विषैले तत्वधतूरे के पौधे में एट्रोपीन, हायोसिन और हायोसायमाइन जैसे कई विषैले तत्व पाए जाते हैं, जो इंसानों में मतिभ्रम, स्मृति हानि, उल्टी, हृदय गति बढ़ना और मुंह सूखने जैसी अनगिनत समस्याएं पैदा कर सकते हैं. लेकिन यदि इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक पद्धति से किया जाए, तो यह शरीर के लिए अमृत जैसे प्रभाव प्रदान कर सकते हैं.
इन समस्याओं में कारगरआयुर्वेदाचार्य भुवनेश बताते हैं कि आयुर्वेद में धतूरे को सीधे या किसी भी अन्य तरीके से खाने की सलाह नहीं दी गई है, बल्कि इसके बीज, फूल या पत्तियों के रस को सरसों और तिल के तेल में मिलाकर एक नई औषधि को तैयार करने के उपाय बताए गए हैं. जिसके उपयोग से गठिया, सायटिका कान का दर्द, पैरों के सूजन या भारीपन और सर्दियों में होने वाले बदन दर्द इत्यादि जैसी समस्याओं का निवारण होता है.
औषधि बनाने का तरीकाकुछ इसी प्रकार वैद्य वासुदेव का भी कहना है.उन्होंने धतूरे की बीज, पत्तियों और फूल से नई आयुर्वेदिक औषधि बनाने की विधि बताई है.उनका कहना है कि सबसे पहले इसके फलों से बीज को निकाल लेना चाहिए. अब उसे सरसों के तेल में लहसुन, हींग और काली हल्दी मिलाकर खूब पका लेना चाहिए. जब बीज और अन्य चीजों का अर्क तेल में मिल जाए तब इसे इस्तेमाल में लाना चाहिए.
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About the AuthorAmit Ranjan
अमित रंजन वर्तमान में में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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Bettiah,Pashchim Champaran,Bihar
First Published :
August 26, 2026, 18:09 IST
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