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भीलवाड़ा मटका रबड़ी स्टार्टअप | Two Brothers Success Story Matka Rabri Bhilwara

Last Updated:April 27, 2026, 06:01 IST

Success story of Matka Rabri startup: भीलवाड़ा में शिवराज सिंह और उनके भाई ने मिलकर ‘मटका रबड़ी’ का एक सफल स्टार्टअप शुरू किया है, जो शहर में काफी लोकप्रिय हो रहा है. यह रबड़ी शुद्ध दूध और शक्कर से बनाई जाती है और इसे मिट्टी के कुल्लड़ में परोसा जाता है. भाइयों ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक डिस्पोजल की जगह इको-फ्रेंडली मटकों का चुनाव किया है, जिससे रबड़ी का स्वाद और बढ़ जाता है. पिछले दो वर्षों में इस स्टार्टअप ने भीलवाड़ा और उदयपुर में अपनी पहचान बनाई है. शुद्धता और अनोखे कॉन्सेप्ट के कारण आज इनकी कई ब्रांचेज खुल चुकी हैं और यह स्टार्टअप युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.

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Success story of Matka Rabri startup in Bhilwara: भीलवाड़ा की तपती धूप और भीषण गर्मी के इस सीजन में हर कोई अपने गले को तर करने के लिए शीतल पदार्थों का सहारा ले रहा है. ऐसे में आइसक्रीम और कुल्फी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. भीलवाड़ा शहर में इन दिनों ‘मटका रबड़ी’ आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है, जो न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी कर रही है. दो भाइयों द्वारा शुरू किया गया यह स्टार्टअप शहरभर में अपनी खास पहचान बना चुका है. इस रबड़ी को खाने के लिए लोग दूर-दूर से भीलवाड़ा पहुँच रहे हैं, जहाँ इसे पारंपरिक कुल्लड़ में परोसा जा रहा है.

स्टार्टअप के सह-संस्थापक शिवराज सिंह ने बताया कि गर्मी के सीजन में आइसक्रीम की भारी मांग को देखते हुए उन्होंने कुछ नया करने का सोचा. वे उदयपुर का खास कॉन्सेप्ट लेकर भीलवाड़ा आए और दोनों भाइयों ने मिलकर मटका रबड़ी बनाना शुरू किया. पिछले दो सालों से वे भीलवाड़ा वासियों को यह खास स्वाद दे रहे हैं. लोगों की पसंद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज उनकी भीलवाड़ा में दो और उदयपुर में भी एक ब्रांच संचालित हो रही है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता है, क्योंकि यह बिना किसी मिलावट के केवल शुद्ध दूध और शक्कर से तैयार की जाती है.

मटके का जादू और सेहत का ख्यालशिवराज सिंह के अनुसार, उन्होंने प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया है. उनका मानना है कि प्लास्टिक न केवल शरीर के लिए हानिकारक है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुँचाता है. इसी सोच के साथ उन्होंने मिट्टी के कुल्लड़ और मटकों का चुनाव किया. मिट्टी के संपर्क में आने से रबड़ी का स्वाद दोगुना हो जाता है और यह ‘नेचर फ्रेंडली’ भी है. कुल्लड़ में रबड़ी परोसने से ग्राहकों को एक देसी और शुद्ध अनुभव मिलता है, जो आजकल के प्लास्टिक कल्चर में दुर्लभ होता जा रहा है.

स्टार्टअप से मिली नई पहचानदो भाइयों द्वारा मिलकर शुरू किया गया यह छोटा सा प्रयास आज एक सफल बिजनेस मॉडल बन चुका है. शुद्धता, परंपरा और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता ने उन्हें पूरे शहर में एक नई पहचान दिलाई है. मटका रबड़ी न केवल लोगों को गर्मी से राहत दे रही है, बल्कि एक छोटे स्टार्टअप के जरिए सफल करियर बनाने की प्रेरणा भी दे रही है. प्रशासन और स्थानीय लोग भी उनके इस इको-फ्रेंडली कदम की सराहना कर रहे हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Location :

Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan

First Published :

April 27, 2026, 06:01 IST

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