बाल झड़ने से लेकर लिवर की देखभाल तक, भृंगराज के हैं कई संभावित फायदे, जानें कैसे करें उपयोग

Last Updated:July 08, 2026, 13:00 IST
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में बरसात के मौसम में खेतों के आसपास उगने वाला भृंगराज एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. आयुर्वेद में इसे “केशराज” कहा जाता है और इसका उपयोग बालों की देखभाल के साथ-साथ पाचन, त्वचा, लिवर, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक पौधे के बारे में बता रहे हैं, जो बरसात के मौसम में अक्सर खेतों के आसपास दिखाई देता है. इन्हीं औषधीय पौधों में भृंगराज (Eclipta alba) का विशेष स्थान है. आयुर्वेद में इसे “केशराज” यानी बालों का राजा कहा जाता है. हालांकि, भृंगराज केवल बालों के लिए ही नहीं, बल्कि पाचन, त्वचा, यकृत (लिवर) और शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है.
भृंगराज का सबसे अधिक उपयोग बालों की देखभाल में किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, इसका तेल सिर की त्वचा को पोषण देता है और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है. नियमित रूप से भृंगराज तेल की मालिश करने से बाल झड़ने की समस्या कम हो सकती है, समय से पहले बाल सफेद होने की गति धीमी पड़ सकती है और बालों की चमक बढ़ाने में भी सहायता मिलती है. यही कारण है कि कई आयुर्वेदिक हेयर ऑयल और हेयर केयर उत्पादों में भृंगराज को प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया जाता है.
भृंगराज को पाचन के लिए भी लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार, यह भूख बढ़ाने, अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाने में सहायक हो सकता है. साथ ही, यह पाचन क्रिया को संतुलित रखने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में भी मददगार माना जाता है.
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भृंगराज में मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माने जाते हैं. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, इसके प्रयोग से त्वचा की सूजन कम करने, छोटे-मोटे घाव भरने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायता मिल सकती है. यही वजह है कि कई आयुर्वेदिक लेप और त्वचा संबंधी उत्पादों में भी इसका उपयोग किया जाता है.
आयुर्वेद में भृंगराज को लिवर (यकृत) के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जड़ी-बूटी माना जाता है. पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को समर्थन देने के लिए किया जाता रहा है. वहीं, कुछ प्रारंभिक वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके यकृत-सुरक्षात्मक (हेपेटोप्रोटेक्टिव) गुणों की संभावना भी बताई गई है.
अगर आप भी तनाव और नींद की समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं, तो राहत पाने के लिए भृंगराज का तेल उपयोगी माना जाता है. सिर पर भृंगराज तेल लगाने से मानसिक शांति मिल सकती है. नियमित रूप से इसकी मालिश करने से तनाव कम करने, सिरदर्द में आराम देने और अच्छी नींद लाने में सहायता मिल सकती है.
भृंगराज का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. आयुर्वेद में इसका सबसे अधिक इस्तेमाल चूर्ण के रूप में किया जाता है, जिसे दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है. इसके अलावा, इसका लेप बनाकर शरीर या सिर पर भी लगाया जाता है. कई लोग इसका जूस या काढ़ा बनाकर भी सेवन करते हैं. हालांकि, भृंगराज एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है.
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