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तेज बुखार के बाद निकल रहे हैं छाले? हो सकता है चिकनपॉक्स, तुरंत करें ये काम

बहराइच: ​चिकनपॉक्स बीमारी से किसी भी उम्र का व्यक्ति ग्रस्त हो सकता है, लेकिन बच्चों में यह आमतौर पर ज़्यादा देखा जाता है. कई बार लोग शुरुआत में ध्यान नहीं देते हैं, जिसके कारण उन्हें और खासकर छोटे बच्चों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है. हालांकि, इसका इलाज पूरी तरह संभव है. जिले में स्थित मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल में जाकर शुरुआत में ही मात्र तीन दिन के कोर्स से इस संक्रामक रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है. आइए जानते हैं कि इस बीमारी से कैसे सुरक्षा करें, किन बातों का ध्यान रखें और यह हो जाए तो क्या इलाज अपनाएं.​

साफ-सफाई की कमी और बदलता मौसम मुख्य कारण

बहराइच मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अरविंद शुक्ला ने बातचीत में चिकनपॉक्स को लेकर बताया, चिकनपॉक्स का इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में निश्चित तौर पर संभव है, बस इसमें लोगों को जागरूक होने की जरूरत है. अक्सर लोग तब अस्पताल पहुंचते हैं जब काफी देर हो चुकी होती है. जब चिकनपॉक्स पूरे शरीर पर हावी हो जाता है और लोग बाकी सारे जतन करके हार जाते हैं, तब वे मेडिकल कॉलेज आते हैं. ऐसी स्थिति में मरीज को ठीक करने में हमें काफी समय लग जाता है. जबकि, अगर शरीर पर चिकनपॉक्स का एक भी छाला निकलने पर लोग तुरंत हमसे संपर्क करें, तो हम मात्र तीन दिन के कोर्स में इसे पूरी तरह कंट्रोल कर लेते हैं. और आगे कोई दिक्कत नहीं होती.

​ऐसे करें चिकनपॉक्स की पहचान​

डॉक्टर के मुताबिक, चिकनपॉक्स होने पर शरीर में जो छाले निकलते हैं,उनमें पानी जैसा लिक्विड भरा होता है. अगर ऐसा लक्षण दिखाई दे तो यह चिकनपॉक्स हो सकता है. कई बार या बच्चों में तेज बुखार के बाद भी हो जाता है. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे लेकर तरह-तरह के अंधविश्वास या भ्रमित उपाय अपनाने लगते हैं, जिससे बचना चाहिए.​ यह तेजी से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है, जो एक व्यक्ति से दूसरे में और फिर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता है.

शुरुआती दौर में इलाज मिलने पर यह पूरी तरह कंट्रोल हो जाता है, लेकिन जब यह पूरे शरीर में फैल जाता है तो ठीक होने में समय लगता है. इसके अलावा, देर से इलाज होने पर ठीक होने के बाद भी शरीर पर दाग-धब्बे रह जाते हैं, जो बहुत मुश्किल से जाते हैं और कई बार तो हमेशा के लिए रह जाते हैं.​

इन बातों का रखें ध्यान

चिकन पॉक्स हो जाने के बाद मरीज का कपड़ा, तौलिया और बर्तन बिल्कुल अलग कर देना चाइए. उन्हें गर्म पानी और सैनिटाइजर से साफ कर सकते है. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न दें. दानों या छालों पर खुद से कोई घरेलू लेप लगाने से बचें.​ बच्चों को समय पर चिकनपॉक्स का टीका अवश्य लगवाएं और अगर हो जाये तो तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें.

डॉक्टरों का कहना है कि यदि घर में किसी को भी इसके लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल से संपर्क करें.​ इसके अलावा मरीज के खान-पान में हल्का और सुपाच्य आसानी से पचने वाला भोजन दें और शरीर में पानी की कमी न होने दें. इन बातों का ध्यान रखें काफी हद तक चिकन पॉक्स से बचा जा सकता है.

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