Brics Summit : पुतिन ने ब्रिक्स के मंच से बांधे महिंद्रा की तारीफ में पुल, आखिर क्यों भारत की इसी कंपनी नाम लिया

Last Updated:September 11, 2026, 23:45 IST
Putin on Mahindra : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स के मंच से भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की तारीफ की. उन्होंने पश्चिमी देशों को संदेश देते हुए कहा कि ब्रिक्स की कंपनियां भी ग्लोबल मार्केट की बड़ी खिलाड़ी बन गई हैं. उनमें भी पश्चिमी देशों की कंपनियों जितनी ही क्षमता है. साथ ही उन्होंने सहयोग के लिए एनबीडी मॉडल अपनाने का भी समर्थन किया.महिंद्रा कंपनी ने ब्रिक्स के कई देशों में निवेश किया है.
नई दिल्ली. भारत की अगुवाई में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. करीब एक साल बाद दुनिया ने फिर चीन, भारत और रूस की जुगलबंदी देखी तो इस बार सबसे खास बात रही पुतिन का बेबाक अंदाज. ब्रिक्स के मंच से पहले तो उन्होंने पश्चिमी देशों के संगठन जी-7 पर निशाना साधा और फिर भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की तारीफों के पुल भी बांधे. पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने एक-दूसरे के साथ जो सहयोग किया है, उसी का नतीजा है कि आज इन देशों की कंपनियां एक-दूसरे के बाजार में फल-फूल रही हैं. उन्होंने खासतौर पर महिंद्रा समूह का नाम लिया और आईटी व एआई सेक्टर में उसकी भागीदारी को सराहा.
पुतिन ने ब्रिक्स के कॉरपोरेट सक्सेस के तौर पर महिंद्रा का नाम लिया और कहा कि इस कंपनी के आईटी और एआई जैसे सेक्टर में योगदान ने समूह के अन्य देशों को काफी सहयोग किया है. इसके साथ ही उन्होंने चीन की कंपनी हुवावे, ब्राजील की एम्ब्रेयर, यूएई की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम का भी नाम लिया. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में राष्ट्रीय कंपनियों की यह सफलता इस समूह के बड़े घरेलू बाजारों और तेजी से हो रहे शहरीकरण के साथ बढ़ती तकनीकी क्षमताओं का अनूठा उदाहरण है.
पुतिन के इस बयान के क्या मायने हैंब्रिक्स के मंच से पुतिन का महिंद्रा कंपनी का नाम लेना काफी दिलचस्प रहा है. हालांकि, इसके बाद ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल उठ रहे कि आखिर उन्होंने महिंद्रा का ही नाम क्यों लिया. इसकी वजह ये है कि महिंद्रा ने ब्रिक्स देशों में खुद को सिर्फ ऑटोमोबाइक कंपनी के तौर पर ही नहीं, बल्कि एआई और आईटी सेक्टर में तेजी से बढ़ने वाली कंपनी के तौर पर स्थापित किया है. पुतिन के इस बयान का एक मकसद पश्चिमी देशों को यह दिखाना था कि अब सिर्फ अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों की कंपनियां भी अपनी ग्लोबल पहचान बनाने लगी हैं और आने वाले समय में उनमें भी विस्तार की उतनी ही क्षमता है.
महिंद्रा का ब्रिक्स में कितना कारोबार
रूस : वैसे तो महिंद्रा ने रूस में अभी तक अपना कोई बड़ा प्लांट नहीं लगाया है लेकिन करीब 2 दशक पहले इस कंपनी ने अपने स्कॉर्पियो मॉडल की असेंबलिंग रूस में कराने की योजना बनाई थी.
दक्षिण अफ्रीका में महिंद्रा ने करीब 161 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
ब्राजील में भी महिंद्रा ने करीब 281 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
इंडोनेशिया में भी महिंद्रा समूह का करीब 10 करोड़ रुपये का निवेश है.
यूएई में महिंद्रा समूह ने अभी तक करीब 87 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
क्या बताया निवेश का नया रास्तापुतिन ने ब्रिक्स के मंच से कहा कि ब्रिक्स देशों को आगे बढ़ने के लिए नए तरीके से निवेश और सहयोग बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी एनबीडी मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि आज ब्रिक्स की सफलता और सहयोग को आगे ले जाने के लिए इस तरह के निवेश मॉडल की जरूरत है. एनबीडी के प्लेटफॉर्म से ट्रेड, एआई, फाइनेंस और बिजनेस कॉपरेशन को बढ़ाना आसान होगा. यह निवेश मॉडल पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर निर्भरता को कम करेगा और ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करेगा.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
September 11, 2026, 23:45 IST



